सादर नमस्कार
देव दिवाली
देव दिवाली हिंदू धर्म में विशेष पर्वों में आती है. वैदिक पंचांग के अनुसार देव दिवाली कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है. देव दिवाली, दिवाली के कुछ दिन बाद मनाया जाने वाला हिंदू धर्म का विशेष पर्व है, जो हर साल करीब नवंबर के महीने में मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार देव दिवाली के पर्व को भगवान शिव का जन्म दिवस मनाया जाता है.
आज की पसंदीदा रचनाएं
चलो आज हम सब मिल जुल कर
जगमग जग कर दें !
जैसे आज सजाया घर को
मन का भी श्रृंगार करें
ममता, करुणा, दया भाव से
अतिथि का सत्कार करें
द्वेष, ईर्ष्या, क्रोध मिटा कर
मन निर्मल कर दें !
चलो आज हम सब मिल जुल कर
जगमग जग कर दें !
समुंदर जिसमें बस तैरते रहो
आग जिसमें जलते रहो
शराब जिसको बस पीते रहो
नटखट कान्हा छुप जाता ज्यों
गोपी पनघट-पनघट खोजे,
उसके भीतर छिपा हुआ है
घूँघट उघाड़ वहीं न देखे !
मिलते अगर हम,
तो क्या एहसास होता
धड़कते दिल में,
क्या क्या ज़ज़्बात होता
बहते आँखों से आंसू,
या लब खिलखिलाते
या दोनों के संगम का,
एक साथ एहसास होता
कारवां सी, बहती ये नदी,
अक्श, बहा ले जाती,
बह जाती, सदी,
बहते कहां, सिल पे बने निशां,
बहते कहां, दास्तां!
पर्वत, पठार, खेत, ये बादल, ये बिजलियाँ
चिड़ियों के साथ गातीं थीं फूलों की वादियाँ
धानी, हरी ये भूमि थी मौसम भी खुशनुमा
मुट्ठी में बंद कर हम उड़ाते थे तितलियाँ
******
बस





