सादर नमस्कार
लोक आस्था का महापर्व-‘छठ’
छठ पर्व की पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी की कोई संतान नहीं थी। इसे लेकर राजा और उसकी पत्नी दोनों हमेशा दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति की इच्छा के साथ राजा और उसकी पत्नी महर्षि कश्यप के पास पहुंचे। महर्षि कश्यप ने यज्ञ कराया और इसके फलस्वरूप प्रियव्रत की पत्नी गर्भवती हो गईं लेकिन नौ महीने बाद रानी ने जिस पुत्र को जन्म दिया, वह मरा हुआ पैदा हुआ। यह देख प्रियव्रत और रानी अत्यंत दुखी हो गए।
संतान शोक के कारण राजा ने पुत्र के साथ ही श्मशान पर स्वयं के प्राण त्यागने व आत्महत्या करने का मन बना लिया। जैसे ही राजा ने स्वयं के प्राण त्यागने की कोशिश की वहां एक देवी प्रकट हुईं जो कि मानस पुत्री देवसेना थीं। देवी ने राजा से कहा कि वे सृष्टि की मूल प्रवृति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने कहा ‘मैं षष्ठी देवी हूं। यदि तुम मेरी पूजा करोगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करोगे तो मैं पुत्र रत्न प्रदान करूंगी।
आज भाई दूज है
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पढ़िए कुछ पसंदीदा रचनाएं
काला ही तो वह रंग है,
जो हमारे भीतर है,
बाहर भी हमें
वैसा ही दिखना चाहिए,
जैसे हम अंदर हैं।
पहले साहस की बाती बटता
गाढ़े स्नेहिल अभ्यंग में पगता
चिंतन की अडिग लौ बालता
गहन तम में निर्भय टिमटिमाता
--- अब बारी मुस्कुराने की ...
"बनिया समुदाय" के लोग इतने सफल व्यापारी कैसे होते हैं?
गुज्जु भाई बनिए की स्कूटी सुबह सुबह .. जोगिंग करने निकले वकील साहब से टकरा गई..
ज्यादा कुछ तो शारीरिक चोट नहीं आई.. पर वकील साहब का ट्रेकिंग शूट का पाजामा फट गया..
वकील साहब ने कहा : जल्दी से 500/- ₹ दे दो…वरना पब्लिक इकठ्ठी करता हूं..
गुज्जु भाई बनिए ने पैसे चुका दिये ओर बोले :
अब ये ट्रेकिंग शूट का पाजामा मुझे दे दिजिए..
वकील साहब ने कहा : पर मैने इसके नीचे कुछ पहना नहीं..
गुज्जु भाई : इस में मै क्या कर सकता हुं? जल्दी से पाजामा दे दो…वरना पब्लिक इकठ्ठी करता हूं..
वकील साहब ने 500/- ₹ वापस देने चाहे..
गुज्जु भाई : अब 1000/₹ से नीचे मुझे इसे बेचना नहीं है.
आग से नाता और बनिए से पंगा.. नहीं रखना चाहिए
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पीलापन छूटा तो
आजमाया तुमनें
रिश्तों की गहराइयों को
अंधेरा हुआ तो
कंधा छूट गया
परछाई का साथ मिला
अब क्या
सूरज के कंधे की सवारी
चश्में के लेंस में दिख रही
आदमी
क्यों चाहता है
अपनी ही शर्तों पर
जीना
सिर्फ
अमन चैन
सुख की
हरियाली
में सोना
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बस


