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शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

4010...साफ़ पानी के अक्स की तरह चमकना सीख...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय डॉ.सुशील कुमार जोशी सर की रचना से। 

सादर अभिवादन। 

शुक्रवारीय अंक में पढ़िए आज की पसंदीदा रचनाएँ- 

1.  

कितना बहकेगा तू खुद उल्लू थोड़ा कभी बहकाना सीख

कदम दिल दिमाग और जुबां लडखडाती हैं कई बिना पिए

थोड़ा कुछ कभी महकना सीख

दिल का चोर आदत उठाईगीर की जैसी बताना मत कभी

साफ़ पानी के अक्स की तरह चमकना सीख

 आखें बंद रख जुबां सिल दे

उधड़ते पल्लुओं की ओर से मुंह फेर कर

फट पलटना सीख

2. 

तस्वीर की विशेषता

तस्वीर बनी बेहद  सुन्दर

उसकी कोई सानी न थी

रंगों का अदभुद ताल मेल

किसी अन्य से न था।

3. 

यही होता आ रहा है

मुझे पता  था

घूम फिर कर मुझ पर ही आएगा

रिश्तें के टूटने का दोष

4. 

दुख का रुमाल 

इस सर्दी में कंबल ज़रा-सा सरका

तो सुन्न पड़ गया अंगूठा

हवा के साथ सुर्र से घुस आई

तुम्हारी याद दुख बनकर

कोई सुख ओढ़ाने नहीं आया।

5. 

हमरा नहि भेटल भगवान

 
कतेक बेर ई सुनल दुबारा, छथि सभहक भगवान सहारा।

घर - घर मे पूजन भगवन के, तैयो दुख मे लोक बेचारा।

परमपिता ई कोना देखय छी, पिता-धर्म के नित अपमान??

आन लोक केँ-----

*****

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 

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