सादर अभिवादन
नवंबर मास चालू आहे
आज का दिन
श्री भागवत महापुराण के नाम
श्री भागवत महापुराण के नाम
जय श्री राधे ....
सादर
अब रचनाएं देखिए ....
जोड़े-जोड़े नारियल-नेमुआ,
ठेकुआ-फल-पकवान।
धूप-दीप दौरा-सुप साजे,
लेकर आये फूल पान।।
बांस के बहंगिया सजाये,
अइली मैया तोरे द्वार।
कर जोड़ विनती करूँ
छठी मैया, मैया कर बेड़ा पार।
वो मुझको मेरी नजर से कब देखता है
वो जब भी देखता है मुझमें आईना देखता है।।
यूं तो मालूम है उसको मेरी मजबूरियां
फिर भी मुझसे मिलने के ठिकाने देखता है।।
मन खिलौना
उस नियति का है
जो बुनी खुद।
अनजाने में
कुछ जानकर भी
सह आवेग।
इक अनोखी
लघु कथा सी कुछ
लिखी दे प्राण।
आतंकवाद
गोली या निर्लज्जता?
फर्क नहीं पड़ता।
करे छलनी
ये एकबार तन
वो रह रह मन।
आज बस
कल सखी मिलेगी
सादर
