माँ का जन्म देना, गुरु का ज्ञान देना, प्रकृति से मिलना
उऋण नहीं होने देता हर पल मिला
यदि चास्तमिते सूर्ये न दत्तं धनमर्थिनाम्।
तध्दनं नैव जानामि प्रातः कस्य भविष्यति।।
अर्थिप्रश्नकृतौ लोके सुलभो तौ गृहे गृहे।
दाता चोत्तरदश्चैव दुर्लभौ पुरुषौ भुवि।।
इस मानवता में तेरी जीत है
जन जन गाये तेरे गीत है
अपने भी रखे तुझ से प्रीत है
महानता की यह अनोखी रीत है
संसद में गूँजे आरक्षण
वर्ष रहा बिटिया के नाम।
इतने सारे चकाचौंध में
मैं बेचारी हुई अनाम।।
नेत्रदान के बारे में सामान्य सी जानकारी ये है कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी उम्र, लिंग, रक्तसमूह और धर्म का हो, नेत्रदान कर सकता है. लेंस या चश्मे का उपयोग करने वाले व्यक्ति, जिनकी आँखों की सर्जरी हुई हो वे व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं. बीमारी की दशा में एड्स, हेपेटाइटिस बी/सी, रेबीज, टिटनेस, मलेरिया आदि जैसे संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा मधुमेह, रक्तचाप, अस्थमा आदि से पीड़ित व्यक्ति नेत्रदान कर सकते हैं. यहाँ तक कि मोतियाबिंद से पीड़ित रोगी भी नेत्रदान कर सकता है, हाँ यहाँ एक सावधानी बरती जाती है कि पानी में डूबकर मरने वाले व्यक्ति की आंखें दान नहीं की जा सकतीं हैं.
ज़रूरतमंद को बमुश्किल दान मिलता है
छद्मवेशी को भरभूर दान मिलता है।
अब तो रक्तदान, नेत्रदान, अंगदान
देहदान को बढ़ावा देने की ज़रूरत है,