स्नेहाभिवादन !
आपके प्रिय साहित्यिक ब्लॉग पर कुछ रचनाओं के सूत्र
आपके समक्ष प्रस्तुत हैं --
पूर्व दिशा की अरूणोदय लालिमा और पक्षियों के
कलरव की मनमोहक गुंजन के साथ ---
आज की प्रस्तुति हमारी प्रथम प्रस्तुति है सारी गलतियाँ हमारी और शाब्बाशी हमारी टीम की है
ये रिश्ते ....
हल्की सी ठेस
तोड़ जाती पल में
काँच से रिश्ते
कटु वचन
छुईमुई से सच्चे
शर्मिन्दा रिश्ते
गुस्से की आँधी
टहनी से झरते
फूलों से रिश्ते
आपके प्रिय साहित्यिक ब्लॉग पर कुछ रचनाओं के सूत्र
आपके समक्ष प्रस्तुत हैं --
पूर्व दिशा की अरूणोदय लालिमा और पक्षियों के
कलरव की मनमोहक गुंजन के साथ ---
आज की प्रस्तुति हमारी प्रथम प्रस्तुति है सारी गलतियाँ हमारी और शाब्बाशी हमारी टीम की है
ये रिश्ते ....
हल्की सी ठेस
तोड़ जाती पल में
काँच से रिश्ते
कटु वचन
छुईमुई से सच्चे
शर्मिन्दा रिश्ते
गुस्से की आँधी
टहनी से झरते
फूलों से रिश्ते
निराले जग के परदों में छुपी यह बात सारी है
कहीं पर आग भारी है कहीं पानी की बारी है
तराशे जाता जो पलछिन , सजाता है कभी उसको
किसी मिट्टी की मूरत का वही सच्चा पुजारी है
दूसरे दिन हम 'थिम्फू' के दर्शनीय स्थलों को देखने गये, उससे पूर्व सुबह जल्दी उठकर होटल की दायीं ओर प्रातः भ्रमण के लिए निकले. यहाँ पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए काफी चौड़े मार्ग बने हैं, जिसपर सुबह-सुबह कुछ लोग दौड़ भी रहे थे ।
आकाशमुखी
हैं सभी
मुक्त
द्वार, पिंजर एकाकी,
उन्मुक्त जीवन
सभी चाहें, हम,
तुम हों या
पाखी।
मिट्टी
जितना सोखती है
धूप अपने भीतर
उतनी ही सोंधी होती है
उसकी महक
बहुत कुछ है
लिखने के लिये
बिखरा हुआ
समेटना
ठीक नहीं
इस समय
रहने देते हैं
होना
कुछ नहीं है
हिसाब का
बेतरतीब
ला कर
और
बिखेर देते हैं
-*-*-*-*- अब बारी है विषय की चौहत्तरवें अंक का विषय विषय
उजाला उदाहरण..
न कोई मीत मिले तो फ़क़ीरी कर ले जलती शमा को बुझा के जुदाई सह ले मिलती नहीं खुशियाँ तन्हाई जब होती स्याह रातों में ग़मों से फिर दोस्ती कर ले लोग ऐसे भी हैं उजाले में नहीं दिखते आज़माएँ उनको भी ग़र अँधेरा कर ले रचनाकार-श्री शशि गुप्त शशि
-*-*-*-*-
मेरा परिचय

मैं मीना भारद्वाज
जन्म और उसके बाद अध्ययन अध्यापन में जीवन का
अधिकांश समय पिलानी (राजस्थान) में ही बीता । फिलहाल
अपने परिवार सहित निवास स्थान बैंगलुरु (कर्नाटक) है ।
फुर्सत के पलों की रिक्तता भरने में किताबों से अधिक
गहरा मित्र भला कौन हो सकता है ? किताबों की दुनिया
मुझे बेहद प्रिय है । शैली चाहे गद्य हो या पद्य लिखना और
पढ़ना मेरे जीवन का अटूट हिस्सा है जो
मुझे पूर्णता प्रदान करता है ।
मीना भारद्वाज
हम अपने "ब्लॉग पाँच लिंकों का आनन्द" में
आपका स्वागत करते हुए उनके
उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं
उनका लेखन स्वस्थ और सुन्दर हो
-*-*-*-*- अब बारी है विषय की चौहत्तरवें अंक का विषय विषय
उजाला उदाहरण..
न कोई मीत मिले तो फ़क़ीरी कर ले जलती शमा को बुझा के जुदाई सह ले मिलती नहीं खुशियाँ तन्हाई जब होती स्याह रातों में ग़मों से फिर दोस्ती कर ले लोग ऐसे भी हैं उजाले में नहीं दिखते आज़माएँ उनको भी ग़र अँधेरा कर ले रचनाकार-श्री शशि गुप्त शशि
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मेरा परिचय

मैं मीना भारद्वाज
जन्म और उसके बाद अध्ययन अध्यापन में जीवन का
अधिकांश समय पिलानी (राजस्थान) में ही बीता । फिलहाल
अपने परिवार सहित निवास स्थान बैंगलुरु (कर्नाटक) है ।
फुर्सत के पलों की रिक्तता भरने में किताबों से अधिक
गहरा मित्र भला कौन हो सकता है ? किताबों की दुनिया
मुझे बेहद प्रिय है । शैली चाहे गद्य हो या पद्य लिखना और
पढ़ना मेरे जीवन का अटूट हिस्सा है जो
मुझे पूर्णता प्रदान करता है ।
मीना भारद्वाज
हम अपने "ब्लॉग पाँच लिंकों का आनन्द" में
आपका स्वागत करते हुए उनके
उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं
उनका लेखन स्वस्थ और सुन्दर हो
