सादर अभिवादन....
सच में हम चाहते ही थे कि आज की प्रस्तुति हम दें
सच में हम चाहते ही थे कि आज की प्रस्तुति हम दें
सखी पम्मी कहीं किसी काम में उलझ गई हैं
वे सफल हो गई होंगी निश्चित रूप से
चलिए चलते हैं आज के आनन्द की ओर.....
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अश्कों का आँख से ढलना हमें अच्छा नहीं लगता
तड़पना,तेरा दर्द में जलना हमें अच्छा नहीं लगता
भीगाती है लहर आ कर, फिर भी सूखा ये मौसम है
प्यास को रेत का छलना हमें अच्छा नहीं लगता

बहुत भारी हो चली है
गुनाह में लज़्ज़त की तलाश
उग आयी नाग-फनी
कभी लुभाते थे
जहाँ गहरे सुर्ख़ पलाश
एक दिन यूँ ही
अलसायी सी
दोपहर में
तुम्हारी कविताओं की
किताब हाथ में आ गयी
जिसमे तुमने लिखी थी
मेरी ये सबसे पसंदीदा
कविता
कुर्सी के सामने दो कलमें खड़ी थीं,
सिर झुकाए... आँखों में पानी भरे,
दीनता मंडित चेहरे...
जन्मों से, अघी हों जैसे।
पर, ऐसा कैसे हो सकता है...?
कलमें?...
हाँ कलमें...,
कलमें तो समाज को रास्ता दिखाती हैं।

मुझे नकार मुझे ही अपनाती है
सीप में मोती बन स्वाति नक्षत्र को दमका जाती है
मेरा ही पात्र बन मुझे ही अँगुलि भर पानी पिला जाती है
इसी गरिमा को अपना मुझे ही छू जाती है।
मैं यही अनुभूति लिए
नकारते हुए अपनाते हुए
भीगते हुए बहते हुए
सीप में ही मोती बन जाती हूँ।
उसकी शख्शियत....सुप्रिया पाण्डेय

दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ हो जाये तो,
कसक ही क्या रह जायेगी,
कांटो को अलग कर दें जो फूलों से,
शनाख्त गुलशन की क्या रह जायेगी,
अच्छी पत्नी चाहिए तो...ज्योति देहलीवाल

मॉल में घुमते हुए शिल्पा को उसकी प्रिय सहेली उषा मिल गई। दो-तीन साल बाद अचानक मुलाकात होने पर उसकी खुशी का पारावार नहीं था। 'कैसी हो उषा?' 'अरे, पुछ मत यार...बहुत टेंशन हैं।' 'टेंशन? किस बात का टेंशन हैं?'
'वो मेरा बेटा दीपक...' 'क्यों, क्या हुआ दीपक को ? ...
-0-
अब बारी है...
हम-क़दम के तेईसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
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आज्ञा दें यशोदा को
उसकी शख्शियत....सुप्रिया पाण्डेय

दर्द लफ़्ज़ों में बयाँ हो जाये तो,
कसक ही क्या रह जायेगी,
कांटो को अलग कर दें जो फूलों से,
शनाख्त गुलशन की क्या रह जायेगी,
अच्छी पत्नी चाहिए तो...ज्योति देहलीवाल

मॉल में घुमते हुए शिल्पा को उसकी प्रिय सहेली उषा मिल गई। दो-तीन साल बाद अचानक मुलाकात होने पर उसकी खुशी का पारावार नहीं था। 'कैसी हो उषा?' 'अरे, पुछ मत यार...बहुत टेंशन हैं।' 'टेंशन? किस बात का टेंशन हैं?'
'वो मेरा बेटा दीपक...' 'क्यों, क्या हुआ दीपक को ? ...
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अब बारी है...
हम-क़दम के तेईसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........
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आज्ञा दें यशोदा को
