निवेदन।


फ़ॉलोअर

104 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
104 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2015

104....जीवन का नाम आराम नहीं।

सादर अभिवादन स्वीकारें
रोता वही है 
जिसने महसूस किया हो 
सच्चे रिश्ते को..
वरना...... 
मतलब के रिश्तें 
रखने वाले को 
तो कोई भी 
नही रूला सकता..

देखिए आज की पसंद.....


तुम देखना 
एक समतल भूमि होगी
कहीं दूर अवश्य...
उबड़-खाबड़ राहों से गुज़र कर
हम जिस तक पहुंचेंगे... !


दो जिंदगियों के बीच 
ऐसा कौनसा गठजोड़ है जो ताउम्र उन्हें एक रखता है। अरसा पहले यही सोच थी कि कहीं भी चले जाओ पति-पत्नी अक्सर जूझते हुए ही नजर आते हैं। जोधपुर में पैंतीस साल के दाम्पत्य के बावजूद उम्रदराज जोड़े को लड़ते-झगड़ते देखना हैरत में डाल देता था।


कान तरसते रह गये, बादरवा का शोर 
ना बरखा ना बीजुरी, कैसे नाचे मोर ! 
शीतल जल के परस बिन, मुरझाए सब फूल 
कोयल बैठी अनमनी, गयी कुहुकना भूल ! 



पहले मेरे पास नोकिया था छोटे स्क्रीन वाला .... 
व्हाट्सएप की जरूरत नही थी ...ब्लॉग और फेसबुक ,
यूट्यूब सब ...घर पर डेस्कटॉप पर वापर लेती थी ...
इस बीच टैब भी ले लिया .....अब सब कुछ गतिमान हो गया था 
मगर मैंने बड़े आकार का होने के कारण 
फोन का इस्तेमाल न होने वाला लिया था .


‘रे पथिक! ये क्षण विश्राम का नहीं,
जीवन का नाम आराम नहीं।
सचेत हर पल रहना तुझे,
आघात-संघर्षों के अनवरत सहना है तुझे।
अवरूद्ध पथ के कण्टक
अपने ही हाथों बीनने हैं, तुझे।


मुक्तक और रुबाइयाँ
गंध  मैने पिया, मदहोश  कोई और हुआ 
आंख  मेरी झंपी, खामोश  कोई और हुआ 
वाह  री पाक  मुहब्बत  असर  तुम्हारा है 
चोट मुझको लगी, बेहोश कोई और हुआ। 


क़द्र उसकी क्यों करें हम जिंदगी से जो है हारा ।
चल रहे है ठोकरों पर आज हम भी बेसहारा ।।
हारने का ये तो मतलब हैं नही क़ि टूट जाओ ।
टूटने के दर्द का तुम कुछ करो एहसास प्यारा ।



दिल की बातें तो आखों से होती हैं,
अल्फाजों से तो अक्सर झगड़ा होता है..
आज्ञा दें यशोदा को
फिर मिलते ही रहेंगे.....



इसे देखिए....पर हँसना मना है















Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...