शीर्षक पंक्ति: आदरणीय डॉ.सुशील कुमार जोशी जी की रचना से.
सादर अभिवादन.
रविवारीय अंक में पढ़िए पाँच रचनाएँ (अंक प्रस्तुतकर्त्ता का रचनाओं के कंटेन्ट से वैचारिक रूप से सहमत-असहमत होना ज़रूरी नहीं है बल्कि ब्लॉगर डॉट कॉम पर जो प्रकाशित हो रहा है वह पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है क्योंकि 'पाँच लिंकों का आनंद' परिवार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है।)
मंच पर शोभित था पिनाक,
जयमाल शोभित सिया हाथ।
जो वीर पिनाक तीर संधान,
गले जयमाल सिया के हाथ।।
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http://halchalwith5links.blogspot.in </a>पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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प्रकाशित नहीं हो पा रहा है, शायद तकनीकी कारण हों. असुविधा के लिये खेद है.
कल लघुकथा का प्रथम अंक प्रकाशित होगा.
सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंआभार
सादन वंदन
आभार रवींद्र जी
जवाब देंहटाएंसादर प्रणाम, सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंसुप्रभात! सुंदर प्रस्तुति, आभार
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