धरोहर, हां..धरोहर ही तो है, लिखे गए पर जब कोई दस्तक हो और तमाम राज एक किताब की शक्ल ले तो इबादत तो बनती है..आज की प्रस्तुतिकरण और चंद लिंक जरूर पढे ✍️
मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ
जिंदगी आ, तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ
जिसमें माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो
चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ
हाँ, मुझे उड़ना है लेकिन इसका मतलब यह नहीं
अपने सच्चे बाजुओं में इसके-उसके पर रखू
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मुझे प्यार करने वाले को?
मेरी आँखों में आकर फिर
आँसू बन ढरने वाले को?
सूने नभ में आग जलाकर
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कि बे-शतर ये सफ़र आशिकी ने काट दिया
जो बच गया था तेरी बन्दगी ने काट दिया
वो मौत से भी अधिक खौफनाक था यारों
मगर वो दर्द ,मरी ज़िन्दगी ने काट दि
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पम्मी सिंह ' तृप्ति '✍️
प्रभावशाली पंक्तियाँ
जवाब देंहटाएंखेल भी चलता रहे और बात भी होती रहे
तुम सवालों को रखो मैं सामने उत्तर रखूँ
लिंक पर जाकर पढ़ी बहुत अच्छी गज़ल है !
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 8 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंचौथी और पाँचवी पंक्ति अतिरिक्त टाइप हो गई है |
बहुत बढ़िया
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