सादर अभिवादन
देश के कायदे भी बदल रहे हैं
कब क्या हो जाए
पता नहीं
जिधर से तेज हवा आए
पीठ उसकी ओर कर लें
वंदन
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
सादर अभिवादन
शुक्रवारीय अंक में
आज महात्मा गाँधी जी की
पुण्यतिथि है।
वैचारिक मतभेदों को
किनारे रखकर,
फालतू के तर्क-वितर्क में
पड़े बिना
आइये सच्चे मन से बापू को कुछ
श्रद्धा सुमन अर्पित करें।
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दुख से दूर पहुँचकर गाँधी।
सुख से मौन खड़े हो
मरते-खपते इंसानों के
इस भारत में तुम्हीं बड़े हो
- केदारनाथ अग्रवाल
एक दिन इतिहास पूछेगा
कि तुमने जन्म गाँधी को दिया था,
जिस समय अधिकार, शोषण, स्वार्थ
हो निर्लज्ज, हो नि:शंक, हो निर्द्वन्द्व
सद्य: जगे, संभले राष्ट्र में घुन-से लगे
जर्जर उसे करते रहे थे,
तुम कहाँ थे? और तुमने क्या किया था?
- हरिवंशराय बच्चन
गाँधी तूफ़ान के पिता
और बाजों के भी बाज थे ।
क्योंकि वे नीरवताकी आवाज थे।
-रामधारी सिंह "दिनकर"
तुम मांस-हीन, तुम रक्तहीन,
हे अस्थि-शेष! तुम अस्थिहीन,
तुम शुद्ध-बुद्ध आत्मा केवल,
हे चिर पुराण, हे चिर नवीन!
तुम पूर्ण इकाई जीवन की,
जिसमें असार भव-शून्य लीन;
आधार अमर, होगी जिस पर
भावी की संस्कृति समासीन!
- सुमित्रानंदन पंत
युग बढ़ा तुम्हारी हँसी देख
युग हटा तुम्हारी भृकुटि देख,
तुम अचल मेखला बन भू की
खींचते काल पर अमिट रेख
-सोहनलाल द्विवेदी
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गुरुवारिय प्रस्तुतिकरण लिए आज फिर हाजिर हूं
जम्हूरी, जलालत ललाट,
नई सरकार, वही ' सम्राट'।
जो नैतिकता को काट- काट,
और मर्यादा छांट- छांट।
इज्जत आबरू चाट- चाट,
नराधमों में बांट- बांट।नई सरकार, वही बांट- बांट।
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वसंत-पंचमी का त्योहार आने वाला है ! शोभा अनमनी सी बैठी हुई है ! अब तो हर त्योहार जैसे लकीर पीटने की तरह हो गया है ! न कोई..
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वो लम्हा तुम जरा बताओ,
जब मैं तुम्हारे संग नहीं था,
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अपराध की पहली सीढ़ी घर से ही शुरू होती है
- डाॅ (सुश्री) शरद सिंह
समाज में अपराध कब नहीं थे? हमेशा थे। किन्तु अब दिनों-दिन अपराध की जघन्यता बढ़ती जा रही है। कोई इंटरनेट को दोष देता है तो कोई पहनावे को, तो कोई वर्तमान वातावरण और संगत को। क्या अतीत में पहनावों में परिवर्तन नहीं हुए? या फिर आपसी संपर्क नहीं रहा? अतीत तो युद्धों के भयावह वातावरण से ग्रस्त था।
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शतरंजी चाल चलकर ...फिर हंस
सत्त पर सवार होकर ..फिर हंसे
एक होने के चाल पे,डोलकर राजा जी,
सर से नख तक जाल बुनकर ..फिर हंसे।
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पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
प्रातःवंदन
"किसकी है जनवरी,
किसका अगस्त है?
कौन यहाँ सुखी है, कौन यहाँ मस्त है?
सेठ है, शोषक है, नामी गला-काटू है
गालियाँ भी सुनता है, भारी थूक-चाटू है
चोर है, डाकू है, झुठा-मक्कार है
कातिल है, छलिया है, लुच्चा-लबार है
जैसे भी टिकट मिला
जहाँ भी टिकट मिला
शासन के घोड़े पर वह भी सवार है
उसी की जनवरी छब्बीस
उसी का पन्द्रह अगस्त है
बाक़ी सब दुखी है, बाक़ी सब पस्त है….."
नागार्जुन
सामाजिक सार लिए कथन के साथ ,
बुधवारिय प्रस्तुतिकरण में शामिल रचनात्मक रूप कुछ इस प्रकार है✍️
तो मैं तुम्हारे मौन से शुरू करूँगा
जहाँ करुणा
किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती।
अगर मुझे कोई प्रश्न सताने लगे
तो उत्तर मैं किताबों में नहीं
तुम्हारी आँखों के ठहराव में खोजूँगा
जहाँ गहराइयों में जवाब तैरते हैं..
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ख़ाली किनारे
✍️ अनीता सैनी
……..
यहाँ इस
समाज नाम की
चारदीवारी में
किसी न किसी को
कुछ न कुछ बचाने का ज़िम्मा
चुपचाप सौंप दिया जाता है।
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(१)
सत्तहत्तर वर्षों से
ठिठुरता गणतंत्र
पदचापों की
गरमाहट से
जागकर
कोहरे में लिपटा
राजपथ
पर कुनमुनाता है।..
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मैं जानता हूँ—
तुम मुझे समग्र रूप से
स्पर्शित नहीं कर सकती
क्योंकि
तुम एक सरल रेखा हो
और मैं—वृत्त।..
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।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
दोहे-चौपाई, कलमा, ख़ूब रटे, पर पलटे नहीं संविधान के पन्ने,
बस इतना ही काफ़ी है हमारा मौसमी देशभक्त बनने के लिए।
शीर्षक पंक्ति: आदरणीया कविता रावत जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
गणतंत्र दिवस के 77 वें उत्सव की शुभकामनाएँ।
चित्र साभार: गूगल
26
जनवरी 1950
का दिन हमें पूर्ण स्वतंत्रता को स्मरण
कराता है जब हमारा संविधान इस तारीख़ से लागू हुआ था। 76 वर्ष के लंबे
अनुभव में भारत ने दुनिया के समक्ष अपनी मज़बूत स्थिति को गर्व के साथ रखा है। सामरिक
दृष्टि से मज़बूती के तौर पर भारत दुनिया की आणविक हथियारों की क्षमतावाली शक्तियों-महाशक्तियों (भारत के अलावा अमेरिका,रूस,चीन,फ़्रांस,ब्रिटेन,इज़राइल,पाकिस्तान और उत्तर कोरिया) में उल्लेखनीय रूप से शामिल है.
भारत अपनी आर्थिक,सामाजिक,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक क्षमताओं के लिये विश्व विख्यात
रहा है किंतु आज भारत के समक्ष विकराल समस्याओं के रूप में जनसंख्या वृद्धि, बेरोज़गारी,सामाजिक विषमता, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता, स्वास्थ्य क्षेत्र में सीमित संसाधन और ढाँचागत कमियाँ, ग़रीबी जैसे मुद्दे
समाधान की राह ताक रहे हैं। युवा ऊर्जा का सदुपयोग करने हेतु नवीनतम आयामों को
विकसित करना और देश की एकता व अखंडता के लिये नागरिकों को सक्षम और सशक्त बनाना
बड़ी चुनौतियाँ हैं।
आज के दिन केवल महापुरुषों के योगदान और स्वतंत्रता के संघर्ष में राष्ट्रीय
आंदोलन को याद करना मात्र हमारा लक्ष्य नहीं है बल्कि हम अपने देश के लिये सदैव
समर्पित होकर कर्तव्य पथ पर डटे रहें।
'पॉंच लिंकों का आनन्द'
परिवार की ओर से आप सभी को गणतंत्र दिवस
की शुभकामनाएँ।
सादर अभिवादन।
सोमवारीय प्रस्तुति में आज पढ़िए गणतंत्र दिवस के उत्सव से जुड़ी रचनाएँ-
आओ मिलकर अलख जगाएँ: गणतंत्र दिवस पर एक विशेष देशभक्ति गीत
शपथ उठाएँ उन वीरों की, जो सीमा पर लड़ते हैं,
मातृभूमि की रक्षा में जो, हँसकर प्राण चढ़ाते हैं!
यही समर्पित श्रद्धांजलि हो, उन अमर सपूतों को,
सर्वोपरि हो देश हमारा, यही संकल्प दोहराते हैं!
गर्व से कहें हम सब एक हैं, दुनिया को ये दिखाएँ
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एक देशगान
-संविधान का गर्व तिरंगा
संविधान का गर्व तिरंगा
भारत का अभिमान है.
एक -एक धागे में इसके
वीरों का बलिदान है.
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कंठ में पहने देवनागरी की वर्णमाला
सुगंधित सतरंगी कुसुम कली मुक्ता मणि
कर में धारण कर कमल और जपमाला,
करकमल में कलम से लिखी स्नेह पाती
चित्रकला, नृत्य, नाट्य की वरद हस्तमुद्रा।
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श्रद्धांजलि
मधुर आवाज़, कोमल भावों के शायर ताहिर फ़राज का
मुंबई में निधन,
प्रशंसकों में शोक
सर-फिरा झोंका हवा का तोड़ देगा शाख़ को
फूल बनने की तमन्ना में
कली रह जाएगी
ख़त्म हो जाएगा जिस दिन भी तुम्हारा इंतिज़ार
घर के दरवाज़े पे दस्तक
चीख़ती रह जाएगी
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव