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बुधवार, 14 अप्रैल 2021

2098..मधुमास दे गया सभी को..

 ।। भोर वंदन ।।

पूनम की चंदियाई साड़ी धुली ओस के झांझर पहने

स्वर्णकलश से धूप उँड़ेले आती हैं चैतिया हवायें!

बतियाने लग गई मुँडेरें इक दूजे से धीरे धीरे,

नव सम्वत् की शुभ्र ऋचाएँ अगरु धूम्र में लिपटी आएँ..!!

राकेश खंडेलवाल

विक्रम संवत का आरंभ एक शुभ संदेशवाहिका माना जाता है साथ ही स्वर्णिम उषा जो हमारे द्वार पर उत्सव रूपी समान है..तो फिर स्वागत करते हैं.. आ० उर्मिला सिंह जी की रचनाओं संग..


मधुमास दे गया सभी को नव वर्ष मंगल मय हो

 भूल जाएं विक्रम 2077 के गम को

 गुड़ी पड़वा मनाये शुभ मंगल मय को।

ज्ञानमय,ज्योतिर्मय शांतिमय..

     **

दूर कहीं, तुम हो,

जैसे, चाँद कहीं, सफर में गुम हो!

गैर लगे, अपना ही मन,

हारे, हर क्षण,

बिसारे, राह निहारे,

करे क्या!

देखे, रुक-रुक वो!

दूर कहीं, तुम हो,

जैसे, चाँद कहीं, सफर में ..

**


                                   काश!

काश जब वो पहली बार चिल्लाकर 

बात कर रहा था तब रोक लेती उसे 

या हाथ उठाकर मारने आया तभी 

उसकी मर्ज़ी और मेरी एक नहीं थी 

शायद, मुझे जान लेना चाहिए था 

की उसका ग़ुस्सा ठीक नहीं है या 

उसका तरीका और उसकी सोच ..

***


‘नो टू सेक्स फॉर वाटर’

प्रतिभा कटियार (समकालीन जनमत में प्रकाशित लेख)

मेरे घर के ठीक सामने एक कुआँ था. कुआँ अपनी सामन्य भव्यता के साथ मुस्कुराता था. यानी वो पक्का कुआँ था. उसकी जगत पक्की थी, मुंडेर उठी थी और पानी खींचने की गडारी (पहियेनुमा चकरी जिसमें रस्सी डालकर पानी खींचना आसान होता था.) थी. वो कुआं मुझे आज क्यों याद आ रहा है, यह बाद में बताऊंगी अभी यह बताने का मन है..

**


दहशत के बीच - डॉ (सुश्री) शरद सिंह जी

कुछ होने 

और कभी भी कुछ भी हो सकने की

दहशत के बीच

बहती हैं अनेक नदियां

पीड़ा की।

हज़ार मौत मरती है ज़िंदगी

उसकी - जो बीमार है

उसकी - जो बीमार के साथ

**


 सुंदर ग़ज़ल के साथ आज यहीं तक..

बादलों की ओट से मुझे चाँद दीदार करने दो,

आज की शाम जी भरके प्यार करने दो....

तुम ख़ामोश बैठें सिर्फ सुनते रहो,

इस एक पल में मुझे बातें हज़ार करने दो,

**

।।इति शम।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह 'तृप्ति'...✍️


16 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर प्रस्तुति
    आभार..
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन संकलन ,
    मुझे भी मंच पर स्थान देने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय। ।।।

    जवाब देंहटाएं
  3. behtarin , eke se badkar ek, lagta hai yaha baar baar aana padega, tahe dil se shukriya, sab likhani numa moti ek hi dhage mein sakalan karne ke liye. reading this lovely things just made my morning beautiful. thnks again.

    जवाब देंहटाएं
  4. सुन्दर उम्मदा संकलन ,हमारी रचना को पटल पर स्थान देने के लिए पम्मी जी की आभारी हूँ।

    जवाब देंहटाएं
  5. सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  6. सभी लिंक्स अभी पढ़े .... थोड़ी देर हो गयी न ... हो जाता है कभी कभी .... सारे लिंक्स कि रचनाएँ बेहतरीन ... पम्मी शुक्रिया ... अच्छी रचनाएँ पढवाने के लिए ...

    जवाब देंहटाएं
  7. बेहतरीन प्रस्तुति पम्मी दी।
    सराहनीय सूत्रों और शानदार भूमिका से सजी।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत अच्छा अंक
    बेहतरीन रंगों से सजा हुआ संयोजन ..बधाई आपको

    जवाब देंहटाएं
  9. पम्मी सिंह "तृप्ति" जी,
    आपको हार्दिक धन्यवाद कि आपने मेरी कविता को "पांच लिंकों का आनन्द" में शामिल किया है। यह मेरे लिए प्रसन्नतादायक है। 🌹🙏🌹
    - डॉ शरद सिंह

    जवाब देंहटाएं
  10. पठनीय एवं विचारणीय लिंक्स के सुंदर संयोजन हेतु हार्दिक बधाई पम्मी सिंह "तृप्ति" जी 🌹🙏🌹

    जवाब देंहटाएं
  11. आज १५ अप्रैल का टिप्पणी बक्सा खुल नहीं रहा ।
    क्या कोई तकनीकी समस्या है?

    जवाब देंहटाएं
  12. अरे वाह!इतना प्यारा अंक कैसे छूट गया!
    धन्यवाद पम्मी जी, बधाई!
    आपका और सभी रचनाकारों का अभिनंदन ।
    नव संवत्सर शुभ हो सभी के लिए ।

    जवाब देंहटाएं
  13. Yahan meri rachana ko apne sankalan mein shamil karne ke liye behad shukriya !
    Abhar!

    जवाब देंहटाएं

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