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गुरुवार, 20 जून 2019

1434...कितनी सभ्यताएँ हम लाँघ चुके हैं ....

सादर अभिवादन। 

हर रोज़ देश पर चिंतन करते हैं हम,
संसद में जनप्रतिनिधियों का चरित्र देखते हैं हम,
जल-संकट हो या सैकड़ों बच्चों की अकाल मौत,
संसद में तो कुछ और ही गूँजता सुनते हैं हम। 
-रवीन्द्र    

आइये अब आपको साहित्य के रसास्वादन हेतु कुछ रचनाओं से परिचय करायें- 





छूट जाउँगी 
सकल इन बंधनों से,
राम तुम बन जाओगे 
छूकर मुझे 
और मुक्त हो जायेगी 
एक शापित अहिल्या 
छू लिया तुमने 
उसे जो प्यार से 
निज मृदुल कर से !




वीरागंणा गजब
पवन अश्व सवार थी।
दुश्मनों को धूल चटाती
हिम्मत की पतवार थी।




मोड़ ले, अपनी राहें! 
भर ना तू, 
उनकी चाहत में आहें! 
क्यूँ उनको ही चाहे, 
खुद को भटकाए, 
अंजान दिशाएं,
 क्यूँ खुद को ले जाए? 



 
दरक रही धरती की मिट्टी, उजड़े सारे बाग।
 त्राहि - त्राहि मचा रहा, छेड़ों अब नये राग।।

जल ही कल का जीवन है,कर लो इसका भान।
जो समय पर न चेते,खतरे में होगी अपनी जान।।


 
नृशंसता और बर्बरता का जमाना गया नही है  
जरा सोचिए तो 
कितनी सभ्यताएं हम लांघ चुके है 
फिरभी सभ्य हुए है हम कितने !


 
आज जब वॄंदा काम करके घर जाने लगी तो अरुन्धती ने रोकते हुये कहा- वॄंदा आज तुम्हारे मधुर का रिजल्ट आ गया। बडी उत्सुकता से वॄंदा बोली मैडम जी मिल जायगा न मधुर को दाखिला। वॄंदा की आंखों में उभर आयी चमक को देखकर प्रिन्सिपल मैडम जो विघालय में एक तेज तर्राक, और हदयहीना महिला समझी जाती थी, यह साहस नही कर पा रही थी कि कैसे मै इस माँ और बच्चे की आशाओं के दिये को अपने निर्मम उत्तर से बुझा दूँ। तभी उस अनपढ वॄंदा को समझ आ गया कि उसके सपनों के पंख कट चुके है, बहुत धीरे से अपने बेटे के सर पर हाथ सहलाती हुयी बोली- मैडम जी क्या बहुत खराब परचा किया था मेरे बेटे ने। 

हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए

💮


आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति के साथ। 

रवीन्द्र सिंह यादव  

17 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    बढ़िया प्रस्तुतिकरण..
    आभार...
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  2. शुभ प्रभात
    अच्छा लगा..
    आज का अंक..
    आभार...
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  3. नृशंसता और बर्बरता का जमाना गया नही है
    जरा सोचिए तो
    कितनी सभ्यताएं हम लांघ चुके है
    फिरभी सभ्य हुए है हम कितने !
    सुंदर लगी यह रचना। विशिष्ट चिंतन लिए अकथनीय।
    समस्त रचनाकारों का भी अभिनंदन ।।।

    जवाब देंहटाएं
  4. साधना वैद जी की विशिष्ट रचना मन को छू गई ...
    मुक्ति का वरदान पाकर
    छूट जाउँगी
    सकल इन बंधनों से,
    राम तुम बन जाओगे
    छूकर मुझे
    और मुक्त हो जायेगी
    एक शापित अहिल्या ....
    अतुलनीय लेखन हेतु साधुवाद व शुभकामनाएं ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपने सराहा हृदय प्रफुल्लित हुआ ! उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद एवं आभार पुरुषोत्तम जी ! सादर !

      हटाएं
  5. बहुत सुन्दर साहित्यिक हलचल प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  6. सुंदर साहित्यिक रचनाओं का संगम।
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए धन्यवाद, रवीन्द्र जी।
    शुभकामनाएँँ।

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!!बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  8. सभी को प्रश्न के घेरे में लेती सटीक भुमिका। सभी रचनाकारों को बधाई सभी रचनाएँ उत्तम /पठनीय।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया । सादर।

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति रविन्द्र जी ।

    जवाब देंहटाएं
  10. सभी रचनाएँ अच्छी लगीं। सुंदर प्रस्तुति हेतु आभार रवींद्रजी।

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत सुन्दर प्रस्तुति आज की रवीन्द्र जी ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार ! सस्नेह वन्दे !

    जवाब देंहटाएं
  12. हलचल की बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति। राजीव उपाध्याय

    जवाब देंहटाएं
  13. उम्दा अंक
    लाजवाब रचनाएँ
    मुझे यहाँ स्थान देने के लिए आभार आदरणीय सादर 🙏

    जवाब देंहटाएं

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