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गुरुवार, 19 जुलाई 2018

1098...क़लम थरथराये ज़ुबाँ लड़खड़ाये उन्मादी माहौल में .....

सादर अभिवादन। 
क़लम थरथराये 
ज़ुबाँ लड़खड़ाये 
उन्मादी माहौल में 
बोलो! 
वो क्या लिखेगा?
क्या कहेगा? 

आइये आपको  हैं आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर- 




भरी दुपहरिया हुई जिंदगी 
बिन आहट की रातें है 
मन घट रीता रीता सा है 
गगरी नैक भरा जाओ !




खंजर सी चुभती
हवाएं आज कल की
सुकूं दिल को ये पहुंचाती नहीं हैं
उडा देती हैं पल में
सजे आशियाने




विहँसती हैं धूप में क्यूं पत्तियां,
पत्तियों का बदन भी तो जला होगा,
खिलते हैं हँसकर ये फूल क्यूं,
ये कांटा फूलों को भी तो चुभा होगा,
वजह कुछ न कुछ तो रहा होगा,
चलो वजह वही हम ढूंढ लें.....



Profile photo

“डरा-सहमा ,घबराराया ,
थका -हारा ,निराश 
सब कोशिशें, बेकार 
मैं असाहाय ,बस अब 
और नहीं , अंत अब निश्चित था 
जीवन के कई पल ऐसे गुज़रें “




नया ज़ख़्म खाना नहीं चाहते हो तो 
पुराने ज़ख़्मों को सहलाए रखना। 
ये ख़ुशियाँ तो कल साथ छोड़ देंगी 
ग़मों को अपना हमदम बनाए रखना।

चलते-चलते ब्लॉग "मेरी धरोहर" से एक रचना -



जब - जब धरती भट्टी सी तपती 
चटकती गर्मी में ला के बौछारे, 
शीतल फुहारे तन मन को, 
सबके ठन्डक पहुँचाए !!


हम-क़दम के अट्ठाइसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........

आज के लिये बस इतना ही 
मिलेंगे फिर अगले गुरूवार।  
कल की प्रस्तुति - आदरणीया श्वेता सिन्हा 

रवीन्द्र सिंह यादव 

15 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात भाई रवीन्द्र जी
    शानदार संयोजन
    आभार
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. शानदार संकलन आदरणीय मेरी रचना को सम्मिलित कर आपने मेरा उत्साहवर्धन किया है इसके लिए आपका सादर आभार

    जवाब देंहटाएं
  3. अनुज सस्नेहाशीष
    सुंदर संकलन तैयार हुआ

    जवाब देंहटाएं
  4. प्रश्न वाचक भुमिका चिंतन देती

    आज कलम भी हुई लाचार
    क्या लिखे कैसी उहापोह
    दग्ध हो जो बुझ चुके
    उस ज्वालामुखी पर बैठ
    क्या अब जलती आग लिखे?
    जिन आंखों से लाज मिट गई
    उस को शरम का पैगाम लिखे?
    भ्रष्टा हो चुकी व्यवस्था पर
    राम राज्य का उपहार लिखे?
    आज मसी खुद लाल हो गई
    अब कैसे उजला पैगाम लिखे। 
    कुसुम कोठारी।

    बहुत सुंदर संकलन सभी रचनाकारों को बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत ही सुंदर संकलन रविन्द्र जी

    जवाब देंहटाएं
  6. सृजन का रविन्द्र उत्सव! बधाई और आभार!!!

    जवाब देंहटाएं
  7. वाह!!रविन्द्र जी ,बहुत खूबसूरत संकलन !!सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  8. भूमिका ....
    प्रश्न चिन्ह सी सौ सौ से सवाल करे
    किस प्रश्न का क्या हो उत्तर यही एक सवाल उठे !
    छोटी पर गहरी भूमिका ....मेरी पाती को सम्मलित किया ..आभार आ .रवींद्र जी ! आप सहज काव्य चितेरे है !

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  11. आदरणीय रवींद्र जी चार पंक्तियों में गहरी भूमिका लिखी है आपने।
    बेहद शानदार रचनाओं का सुंदर संयोजन है आज की प्रस्तुति में।
    लाज़वाब अंक की प्रस्तुति के लिए बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  12. सारगर्भित भूमिका के साथ सुंदर प्रस्तुति
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई।
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं

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