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सोमवार, 16 जुलाई 2018

1095...हम-क़दम का सत्ताइसवाँ क़दम


मन की अस्थिर पृष्ठभूमि पर पल प्रतिपल अनगिनत विचारों का उदय होता है। विचारों की भीड़ से जब कोई सामान्य विचार मन की दीवारों को स्पर्श करता है और विशेष इच्छा में परिवर्तित हो जाता है, उस विशेष इच्छा को पूर्ण के लिए जब हम मन,वचन और कर्म से दृढ़ निश्चय करते हैं तो यही प्रबल 
उत्कट इच्छा संकल्प कहलाता है।
किसी भी कार्य का श्री गणेश करने के पूर्व संकल्प किया जाता है ताकि उस कार्य की सफलता सुनिश्चित हो जाये।
संकल्पित कार्य  को मन बार-बार दुहराता है और पूर्ण करने के लिए  प्रेरित करता है। 
जीवन में लिया गया सकारात्मक संकल्प मनुष्य की दशा और दिशा को बदलकर इच्छित फल प्रदान करता है। समाज और देश के बड़े बदलाव इसी संकल्प शक्ति पर निर्धारित होते है।

सादर नमस्कार

आइये अब इस सप्ताह हमक़दम के विषय संकल्प पर हमारे रचनाकारोंं की सृजनशीलता का अवलोकन करते है
आदरणीया मीना शर्मा जी की रचना
हौसले गर हों बुलंद
तो मंज़िलों की क्या कमी ?
सबके दिल में बस यही
एहसास लिख दे ।
अपनी धरती...

पत्थरों की बस्तियों में
लोग पत्थर हो गए,
पत्थरों के दिल में भी
जज्बात लिख दे ।
अपनी धरती...

★◆★

आदरणीया अनुराधा चौहान जी की दो रचना


उठ चल कर्म कर
दीप जला अंधेरा हटा
हवा के रुख को मोड़ ले
कर्म कर कर्मयोगी बन
दृढ़ संकल्प का भान कर
लक्ष्य का ज्ञान कर
धर्म कर्म से पूर्ण हो

★◆★

आदरणीया अनुराधा चौहान जी

हमें नया सबेरा लाना होगा
विश्वगुरु के पद पर
फिर भारत को पहुंचाना होगा
मरती सभ्यता संस्कारों को
फिर अस्तित्व में लाना होगा
हिल मिल कर हम साथ चलें

★◆★

आदरणीया दीपाली ठाकुर (दीपशिखा) जी

मन  विचलित 
मत करना अपना
कुछ  विलंब
जो हो जाए
है तुझमे 
इतना बल
जगा अपनी
धमनी और शिराएं
करले दृढ़ "संकल्प"
बना स्वयं
हस्तरेखाएँ 

★◆★

आदरणीया साधना वैद जी की दो रचनाएँ


आँखों के आगे पसरे 
मंज़रों को झुठलाना होगा,
कानों को चीरती 
अप्रिय आवाजों को भुलाना होगा,
मन पर पड़ी अवसाद की 
शिलाओं को सरकाना होगा,
दुखों के तराने ज़माने को नहीं भाते 

जीवन यदि सुरभित एवँ
निष्कंटक बनाना है तो
अंतर के सारे शूलों को
चुन कर मन उपवन के
कोने-कोने की
सफाई करनी होगी !

★◆★

आदरणीया  कुसुम कोठारी जी की रचना

दीप जला सखी दीप जला 
निराशा के तम को भगाने 
आशा का एक दीप जला 
राह हो कितनी भी मुश्किल 
दृढ़ संकल्प का दीप जला 

★◆★

आदरणीया नीतू ठाकुर जी की रचना

इस दुनिया के नक़्शे पर
अपनी पहचान बनाना है
जीवन एक संकल्प बनाकर
जन्म सफल कर जाना है
एक बार बस एक बार
उस अंबर को छू आना है

★◆★

आदरणीया आशा सक्सेना जी की रचना

जाने कितने वर्ष बीत गए
फिर भी रहता है इन्तजार
हर वर्ष पन्द्रह अगस्त के आने का
स्वतंत्रता दिवस मनाने का |
इस तिरंगे के नीचे
हर वर्ष नया प्रण लेते हैं
है मात्र यह औपचारिकता
जिसे निभाना होता है |
जैसे ही दिन बीत जाता
रात होती फिर आता दूसरा दिन
बीते कल की तरह
प्रण भी भुला दिया जाता |

आदरणीया डॉ. इन्दिरा गुप्ता जी की लेखनी से दो रचना

जीवन को साँचे में ढाल कर 
एक अभय वरदान बना  दूँ 
भाव बहे  संकल्प सरीखे 
ऐसा हर पथ विजन बना दूँ !

संकल्प करे तेरा आव्हान 
उसके संग गठबंधन हो 
सुबह हुई अब जागो मनवा 
सृजन हार का मान करो !


धधक धधक कर जल रही 
जाने कब से नार 
जाने कब तक और जलेगी 
राख हो रहे सब मन भाव ! 
केवल पीड़ा ही भाग्य लिखी 
नारी के जीवन में विधना 
कौन कलम लेकर कर  दी 
नारी के जीवन की रचना ! 
★◆★

आज यह अंक आपको कैसा लगा
कृपया  अपने बहुमूल्य विचारों से हमें अवश्य 
अवगत करवाये।
अगले विषय के लिए कल का अंक देखना न भूले।
फिर हाज़िर होगें नये विषय के साथ अगले सोमवार को।
तब तक के लिए
आज्ञा दीजिए

-श्वेता सिन्हा

20 टिप्‍पणियां:

  1. दुःस्कर क़म है संकल्प लेना
    और ले लिया है तो पूरा भी करना होगा
    थोड़ा क्लिष्ट विषय था इस बार का
    संकल्प और वादे सरकार ही लेती-देती थी
    बहरहाल साधुवाद सभी रचनाकारों को
    ये पड़ाव भी पार किया आपने
    शुभकामनाएँ...
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन संकलन
    उम्दा रचनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  3. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहतरीन रचनाएं सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत बहुत आभार मेरी रचना को इस सुंदर संकलन में स्थान देने के लिए 🙏

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह!!श्वेता ,बेहतरीन प्रस्तुति । सभी रचनाएँ एक से बढकर एक । सभी रचनाकारों को हार्दिक अभिनंदन ।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर संकलन सभी रचनाकारों को ढेरों शुभकामनाएँ, हलचल यूँही सतत प्रगति की ओर अग्रसर होता रहे ...

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर संकलन सभी रचनाकारों को ढेरों शुभकामनाएँ, हलचल यूँही सतत प्रगति की ओर अग्रसर होता रहे ...

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह!!श्वेता जी .....बेहतरीन प्रस्तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  11. बेहद सुंदर संकलन प्रेरणास्पद रचनाएं संकल्प को परिभाषित करती हुई। इतनी अच्छी प्रस्तुति के लिए
    आपका आभार श्वेता जी

    जवाब देंहटाएं
  12. वाह!श्वेता जी..बहुत सुंदर संकलन के साथ बहुत कुछ बताती भूमिका।सभी रचनाकारों को बधाइयाँ
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  13. वाह ! बहुत ही सुन्दर रचनाओं का बहुत ही सुन्दर संकलन आज का यह अंक ! मेरी दोनों रचनाओं को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार श्वेता जी !

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर विषय "संकल्प" और सारगर्भित रचनाएं.
    बधाई !

    जवाब देंहटाएं
  15. संकलन के सुन्दर संकल्प के साथ संकल्पों का सुन्दर संकलन!!! बधाई और आभार!!!

    जवाब देंहटाएं
  16. सुंदर भुमिका विवेचनात्मक, आकर्षक प्रस्तुति, दृढ़ संकल्प का दारोमदार लिये सुंदर रचनाओं का काफिला।
    मेरी रचना को चुनने का तहे दिल से शुक्रिया
    सभी सह रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  17. बहुत शानदार प्रस्तुती ...सभी को बधाई

    जवाब देंहटाएं

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