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बुधवार, 11 जुलाई 2018

1090..सोशल मिडिया का इस्तेमाल..

।।शुभ भोर वंदन।।
शिकायत कर हम परेशानियों से बच
 नहीं सकते पर जिम्मेदारी उठाकर कुछ समस्याओं को कम जरूर कर सकते चाहे वो परेशानी 
सामाजिक, पारिवारिक या नई नवेली सर उठाती सोशल मिडिया का इस्तेमाल..
क्योंकि इसकी सक्रियता लगातार बढ रही है।
हाल की घटनाओं को मद्देनजर रख मानवता का ध्यान कर सोच-विचार के साथ इसका 
इस्तेमाल समय की जरूरत है।
इसी जनहित भावनाओं को मद्देनजर रखते हुए रूख करते हैंं आज के लिंकों की ओर..✍
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 ब्लॉग "मंथन" से..


दिल में दबी बात लबों तक लायें
सच और झूठ का फर्क है बहुत मुश्किल।
जो सुने न मन की बात उसे सुनायें कैसे

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ब्लॉग कडुवा सच ...
एक दिन ... 'कर्मदेव' और 'भाग्यदेव' .... इस बात पर आपस में बहस करते हुए कि - मैं बड़ा हूँ, मैं सर्वेसर्वा हूँ, मैं महान हूँ, इत्यादि तर्कों के साथ तू-तू मैं-मैं करते हुए  'महादेव' के पास पहुँचे ...
'महादेव' समझ गए कि - समस्या अत्यंत गंभीर है तथा तर्कों के माध्यम से इन्हें समझा पाना कठिन है इसलिए ...

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कौन करेगा ऐतबार
अरे रे रे रे ना बाबा।

मीठे सपनों की तिकड़म बाज़ी है
बस वादों की मीठी लफ़्फ़ाज़ी है
है बस झूठ मूठ का प्यार..अरे रे रे।
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ब्लॉग हमसफ़र शब्द से..



सुबह सुबह कांच का गिलास टूटा
पर उसने अपने नर्म ऊंगलियों से उठाई
टूटे कांच के टुकडो को
सुबह ही था
जब उसने मां से बात किया
बताया कि जीने के लिये
पैसो से ज्यादा
भरोसे की जरुरत होती है ना मां
यह तुमसे ज्यादा और कौन जानता है

⚫⚫

और अंतिम लिंक में पढिये ब्लॉग स्वप्न मेरे ...से..




घर बार वरना छोड़ के जाते नहीं ... सुनो

बस्ती के कुछ बुज़ुर्ग भी जलते हैं दीप से
रस्ता फकत चराग़ दिखाते नहीं ... सुनो

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एक विशेष आग्रह....
हम अपने प्रिय पाठकों को हर्षित हृदय से सूचित कर रहे हैं कि शनिवार दिनांक 14 जुलाई, रथयात्रा के दिन हमारे ब्लॉग का तीसरा वर्ष पूर्ण हो रहा है, इस अवसर पर आपसे आपकी पसंद की एक रचना की गुज़ारिश है 
आप कृपया शुक्रवार दोपहर तक दे देवें, हमारा तीसरा वर्ष 
यादगार वर्ष बन जाएगा....सादर

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हम-क़दम के सत्ताईसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........


⚫⚫
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍

15 टिप्‍पणियां:

  1. शिकायत
    एक प्राचीन परम्परा है
    पहले निराकरण हो जाता था
    अब दोहन होता है शिकायत कर्ता का
    विविध रतनाओँ का संगम
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. समझे न जो कोई बात उसे समझायें कैसे ।
    दिल में दबी बात लबों तक लायें
    सच और झूठ का फर्क है बहुत मुश्किल।
    जो सुने न मन की बात उसे सुनायें कैसे

    उलझनों से घिरे सब रहते

    उम्दा प्रस्तुतीकरण

    जवाब देंहटाएं
  3. विविधताओं से परिपूर्ण अति सुन्दर प्रस्तुति । मेरी रचना को इस संकलन में शामिल कर मान देने के लिए हार्दिक आभार आपका । विभा जी आपने मेरे लेखन को पसन्द किया इसके लिए तहेदिल दिल से धन्यवाद जी आपका ।

    जवाब देंहटाएं
  4. कर्म और भाग्य यूं ही भटकते रहेंगे अपने अभिमान के साथ हल ना मिलना ना मिलेगा हां दोनों ने गठजोड़ जिस दिन कर लिया सब कुछ साफ हो जायेगा
    सुंदर वृतांत ।

    जवाब देंहटाएं
  5. शानदार संकलन सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  6. शानदार रचनाएं सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  7. ज्वलंत बिषय पर सटीक व संक्षिप्त प्रस्तावना के साथ उम्दा रचनाओं का संकलन प्रस्तुत करती आदरणीया पम्मी जी की सार्थक प्रस्तुति.

    चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं।

    जवाब देंहटाएं
  8. सुप्रभात पम्मी जी,
    सोशल मीडिया की सक्रियता ने हमारे जीवन में खासा दखल कर रखा है। एक सुंदर सारगर्भित भूमिका के साथ बहुत सुंदर रचनाओं का शानदार संयोजन आज के अंक को सराहनीय बना रहा।

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह!!बहुत सुंदर प्रस्तुति । सभी चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत बहुत शुक्रिया और आभार आपका ! बेहतरीन प्रस्तुति !

    जवाब देंहटाएं
  12. लाजवाब भूमिका और संकलन ...मन प्रफुल्लित और तृप्त ...आभार पम्मी जी

    जवाब देंहटाएं
  13. बेहतरीन संकलन आदरणीया पम्मी जी।

    जवाब देंहटाएं

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