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सोमवार, 11 सितंबर 2017

787......'विचारों के अनेक रूप'

'विचारों के अनेक रूप' 
क्रांतिकारी विचार
कोमल विचार 
संवेदनशील विचार 
कलुषित विचार
 इन विचारों के स्रोत  
'चेतन अवस्था' 
'अचेतन अवस्था' 
'अचेतन' अवस्था से निकले विचार व्यक्ति के निजी हों ,आवश्यक नहीं। स्पष्ट है दूसरों के विचारों पर आधारित आपके विचार सृजनात्मक हों, 
ये भी आवश्यक नहीं 
सृजनात्मक हों तो एक सशक्त व्यक्तित्व का सृजन !
विध्वंसक हुआ तो आप स्वयं मूल्यांकन करने में सक्षम हैं। 
परन्तु चेतन अवस्था में उत्पन्न विचार आपके निजी होते हैं। और यह भी सत्य ,जहाँ तक संभव है ये रचनात्मक ही होते हैं और 
रचनात्मक हों तो सत्य पर आधारित ,निजी स्वार्थ से परे 
लोक कल्याणकारी 
देशहित में आवश्यक 
वर्तमान में यह परम आवश्यक है ,हमारे स्वयं के विचार हों न कि दूसरों के विचारों से प्रभावित होकर स्वयं के विचारों का सृजन, भले ही आपके निजी विचार लोगों  के आलोचना  का भागी क्यों न हो। 
स्मरण रहे ! बिना स्वयं के विचार मानव जीवन निरर्थक और अस्तित्वहीन है 
यदि विचार सत्य हैं तो आलोचनाओं से क्या भय ?
एक तार्किक मानव के जीवन की आधारशिला उसके स्वयं के विचार ही हैं। जो उसे सदैव सत्य मार्ग पर गमन करते रहने की प्रेरणा देते हैं। 
तो आपके क्या विचार हैं ?
 "पाँच लिंकों का आनंद" 
परिवार आपके सत्य विचारों का हृदय से  स्वागत करता है 

सादर अभिवादन  

 मनुष्यता...........मैथिलीशरण गुप्त
आज की सुखमय यात्रा का प्रारम्भ महान राष्ट्रकवि  "मैथिलीशरण गुप्त'' की एक कृति से करता हूँ ,जिसका संकलन  
आदरणीया  "यशोदा अग्रवाल" जी द्वारा किया गया है  


उसी उदार की कथा सरस्वती बखानवी¸
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती।
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती;
तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती।
मुसाफिर हौसला रख, वहाँ महफिल बहुत है...  आदरणीय "विशाल चर्चित" 


 राज-पाट सिंहासन पाया
सुख भोगा-आनन्द मनाया
फिर करता घोटाला क्यों?

 अंधेर नगरी, चौपट राजा ! ... 
आदरणीया "मीना शर्मा" 


 राजा पर कोई, अँगुली उठाए,
अँगुली क्या, गर्दन अपनी कटाए !
पंगु व्यवस्था है, अंधा कानून
रोम जले, नीरो बाँसुरी बजाए !

 दूर तक कोई नहीं - - -
आदरणीय  ''शांतनु सान्याल''


 वैसे तो यहाँ  रहनुमाओं की 
कोई कमी नहीं, फिर भी 
ज़िन्दगी लौट आती 
है अक्सर किसी 
अवितरित 
लिफ़ाफ़े की तरह, उम्र से 
पहले बुढ़ापा ओढ़े हुए,  
दहलीज़ पर अपने, 
बेतरतीब से 
पड़े हुए।


 कल  ज़माने  को  एहसास  हो 
छोड़  कर  कुछ  असर  जाईये 

'ज़ीनत'  जी   खूबसूरत  ग़ज़ल 
पढ़  के  दिल  में  उतर  जाईये 

 मुट्ठियाँ.....आदरणीया 
"दीप्ति शर्मा" 


 बंद मुट्ठी के बीचों - बीच
एकत्र किये स्मृतियों के चिन्ह
कितने सुन्दर जान पड़ रहे हैं
रात की चादर की स्याह
रंग में डूबा हर एक अक्षर
उन स्मृतियों का

 'किस बात की शर्म जमावड़े में शरीफों के शरीफों के नजर आने में' ... 
आदरणीय "सुशील कुमार जोशी"

 
किताबें ही 
किसलिये 
दिखें हाथ में 
पढ़ने वालों के 

जरूरी नहीं 
है नशा 
बिकना 
बस केवल 
मयखाने में 

 जी ही लेते हैं न... 
आदरणीया "अनुपमा पाठक" 


 वे अभिशप्त हैं 
ऐसा होने के लिए
आँखें बनी ही हों जैसे विडम्बनाएं देखने
और आहत हो रोने के लिए 

इतना होते हुए भी 
जी ही लेते हैं न 

 फोटोग्राफी : पक्षी 23 (Photography : Bird 23 ) 
आदरणीय,  राकेश कुमार श्रीवास्तव "राही"


 भारतीय ग्रे हॉर्नबिल भारतीय उपमहाद्वीप में पाए जाने वाले 
एक आम हॉर्नबिल है। 
यह ज्यादातर वृक्षों पर और आमतौर पर जोड़े में देखा जाता है।
 इसमें एक हल्के भूरे या नीरस सफेद पेट के साथ पूरे 
शरीर में ग्रे पंख होते हैं। 
( प्रस्तुत विचार मेरे स्वयं के मौलिक विचार हैं )

आभार

 "एकलव्य"

   

18 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    विचार..
    क्या है विचार
    विचार क्यों
    पैदा होता है
    मन में
    विचारणीय
    विषय..
    विचार कर रही हूँ
    कि टिप्पणी में
    अपने कौन से
    विचार रखूँ..
    एक अच्छी प्रस्तुति
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. ऊषा स्वस्ति।
    "विचार" पर विचार करती आज की भूमिका विचारणीय है ध्रुव जी।
    बहुत -बहुत बधाई। आपका श्रम सामाजिक मूल्यों का उत्प्रेरक है , आपका चिंतन सामयिक एवं प्रेरक है।
    आज के सभी लिंक विचार को एक कसौटी पर कसते हैं, अत्यंत प्रभावशाली हैं।
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं।
    "पाँच लिंकों का आनन्द" की ओर से किया गया नवीनता के लिए प्रयोग सार्थक हो उठा है।
    आभार सादर।

    जवाब देंहटाएं
  3. आनंदित हूँ बच्चे
    ढ़ेरों आशीष व असीम शुभकामनाओं के संग शुभ दिवस 💐😍

    जवाब देंहटाएं
  4. उषा स्वस्ति..
    आपके विचार सामयिक एवं प्रेरक है..बहुत बढिया लिखते रहे
    सभी चयनित रचनाकारों को बधाई।
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  5. बेहद सुन्दर प्रस्तुति!
    आभार!

    जवाब देंहटाएं
  6. ध्रुव भाई फिर से अपने ही तासीर के अनुरूप विचारों पर अपना सराहनीय विचार एवं रचनाएँ पेश की है। इस चर्चा में सम्मलित सभी रचनाओं के रचनाकार को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर रचनायें
    शानदार संकलन

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत प्रभावी चिन्तन‎ और बहुत सुन्दर प्रस्तुति ध्रुव सिंह जी .

    जवाब देंहटाएं
  9. "विचार" ... एक विषय पे विचारों का गहन मंथन ... पर इनका मौलिक होना जरूरी है ...
    इस विषय के साथ सुन्दर हलचल ...

    जवाब देंहटाएं
  10. आनन्द देती बहुत लगन से बनायी गई आज की हलचल में 'उलूक' को भी जगह देने के लिये आभार ध्रुव जी ।

    जवाब देंहटाएं
  11. वाह ! लाजवाब लिंक संयोजन ! बहुत सुंदर आदरणीय !

    जवाब देंहटाएं
  12. विचार ही तो हैं.....
    जो हमारे अपने हैं....
    सुंदर....
    आनंदित हुआ मन....

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति. "विचार" अगर मनुष्य के जीवन में न हो तो वह मनुष्य नही होता. हमारे विचार ही हमारी पहचान होते हैं .लेखन की दुनिया में व्यक्ति विशेश के विचार ही उसे सबसे भिन्न बनाते हैं.

    जवाब देंहटाएं
  14. प्रिय एकलव्य -- आज के संयोजन का अवलोकन किया और सभी रचनाएँ पढ़ी | बहुत ही बढ़िया वैचारिक संकलन रहा | भूमिका में ' विचार ' विचार बहुत विचारणीय है | सचमुच विचार भले ही सृजनात्मक न हो पर उद्दात भावों से भरे जरुर होने चाहिए | संवेदनशील होना और मानवता के प्रति कल्याणकारी सोच रखने में ही विचारों की सार्थकता है | सब रचनाकारों को हार्दिक बधाई | खेद है कि सुशील जी के ब्लॉग पर टिपण्णी संभव ना हो पाई | उन्हें यहीं से शुभकामना प्रेषित करती हूँ | आपका आभार और हार्दिक सस्नेह शुभकामना|

    जवाब देंहटाएं
  15. मैथिलीशरण गुप्त जी की रचना उपलब्ध करवाने के लिए विशेष आभार ------

    जवाब देंहटाएं
  16. आदरणीय ध्रुवजी,हार्दिक आभार मेरी रचना को शामिल करने हेतु । आपका गहन अध्ययन, आपकी क्रांतिकारी सोच, एक जागरूक रचनाकार के रूप में आपका व्यक्तित्व
    प्रभावित कर जाता है । सभी रचनाएँ प्रभावशाली हैं,सुंदर हैं । कविवर्य मैथिलीशरण गुप्त जी की रचना से हमें अपने विचारों को निखारने, सँवारने की सीख मिलती है । विविधरंगी विचारों से सजी हलचल प्रस्तुति हेतु अनेकानेक धन्यवाद । सभी चयनित रचनाकारों को बधाई ।

    जवाब देंहटाएं

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