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मंगलवार, 5 सितंबर 2017

781.... 'शिक्षक व्यर्थ नहीं'

जय मां हाटेशवरी...
गुरु का अर्थ........... 
संस्कृत में गृ धातु से गुरु शब्द निष्पन्न होता है जिसका अर्थ भारी या प्रचंड अथवा बहुत शक्तिशाली होता है।
गुरु में यह अद्भुत शक्ति ज्ञान के कारण आती है यानि गुरु अपने विशिष्ट ज्ञान के कारण चरित्र परिवर्तन कारी होता है वह उस बोझिल चरित्र को भी अपने प्रभाव से शोधनीय बना देता है जिसका शोधन शायद ही किसी अन्य उपाए से संभव हो पाता।

एक समर्थ गुरु सामने वाले व्यक्तित्व में कौन कौन सी कमियां हैं वो कैसे दूर होंगी आदि सभी को आसानी से जान लेता है। मूल्यों या नैतिकता की दृष्टि से गुरु के विभिन्न प्रकार सदा से रहे हैं। कुछ गुरु ऐसे होते हैं जो अपनी सेवाओं के बदले किसी प्रकार का धन या कोई अन्य उपहार स्वीकार नही करते इस प्रकार के गुरु हर दौर में हमेशा से कम रहे हैं।

कुछ गुरु ऐसे होते हैं जो अपनी सेवाओं के बदले कुछ न कुछ स्वीकार कर लेते हैं किन्तु इस प्रकार के गुरुओं की संख्या भी हर दौर में कम ही रहती है। चूंकि वर्तमान दौर भौतिकता का है यहाँ ज्ञान की प्राप्ति धन अर्पित करने से ही शुरू होती है।अंग्रेज़ी स्कूलों में इंटर पास करते करते लाखों रुपया खर्च हो जाता है। सरकारी स्कूलों में भी किताब कापी आदि में बहुत पैसे खर्च होते हैं।इस प्रकार भौतिकता के इस दौर में धन की भूमिका निर्णायक हो चली है

अब ऐसी स्थिति में जो गुरु स्वतंत्र रूप से पढ़ा रहे हैं वे ..धन दो और ज्ञान लो...की स्थिति में अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं... अब जिस गुरु के पास जैसा ज्ञान होगा वो वैसा ही भारी या परिवर्तनकारी होगा।
समाज में लोगों की ये ज़िम्मेदारी है कि वो ऐसे गुरु से पढ़ें जो काफी समर्थ या चर्चित हो...अगर वो अधिक पैसा ले रहा है तो वर्तमान के भौतिक वादी परिदृश्य को देखते हुए, इस पर बहुत ग़ौर नही करना चाहिए।इससे लाभ ये होगा की गौण या कम समर्थ गुरु हतोत्साहित होंगे और अपने ज्ञान के विस्तार हेतु अधिक परिश्रम करेंगे। हो
ये रहा है कि लोग अधिक जांच पड़ताल नही करते बस किसी कोचिंग में दाखिला ले लेते हैं और बाद में पछताते हैं।

ज्ञान के सन्दर्भ में विशेषज्ञयता अति महत्वपूर्ण है और ये विशेषज्ञयता आसानी से प्राप्त नही हो पाती इसलिए गुरु के चयन में सावधान रहें।उसी गुरु से पढ़ें जो काफ़ी प्रसिद्ध हो।क्योंकि केवल समर्थ ही परिवर्तन कारी होता है बाकी नही।......फेसबुक से साभार।

"गुरू जनों  के श्रीचरणों में
श्रद्धा सुमन संग वंदन
जिनके कृपा नीर से
मिटा जीवन से तम।
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं|
पेश है....आज के लिये मेरी पसंद...

गुरु की शिक्षा
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आपसे मिली
शिक्षा की धरोहर
अमूल्य निधि
हूँ जो आज मैं
आपका आशीष है
चरण स्पर्श
ज्ञान पुंज से
तिमिर दूर कर
प्रज्ञा चक्षु दो

गुरू और शिष्य
गुरू रहे ना देव सम, शिष्य रहे ना भक्त
बदली दोनों की मती, बदल गया है वक्त !
शिक्षक व्यापारी बना, बदल गया परिवेश
त्याग तपस्या का नहीं, रंच मात्र भी लेश !

शायद तुम नहीं जानती
आँखों की दहलीज़ पे
बैठे कुछ ख़्वाब,
कब से राह देख रहे हैं नींद की
और नींद भटक रही है
यादों के सहरा में
सुकून के जुगनुओं का
पीछा करते हुए...

युवा
जबकि वह लिखना चाहता था
काली स्लेट पर
सफ़ेद चाक से उजाला
वह रगड़ रगड़ कर
चमका रहा था
कडाही और तवे की काली पेंदी

उसकी पीठ पर
होना चाहिए था बस्ता
वह तेज़ी से उठाता था
लकड़ी के गट्ठर
कोयले की बोरी
गेंहू धान का बोझ

अध्यापक, शिक्षक या टीचर
तू वशिष्ठ था जिन्हें, राम भी,
कर प्रणाम, सौभाग्य समझते !
सांदीपन की समिधा लाते,
कृष्ण सुदामा मेह बरसते !
यदि चाणक्य नहीं होते तो,
चंद्रगुप्त को कौन जानता ?
खो आया सम्मान कहाँ, वह
जिसको तेरे नैन तरसते !!!
अरे ! चंद चाँदी के टुकड़ों,
पर जीना क्यों तुझे भा गया ?
ओ एकांत कुटीचर !
तू टीचर बनकर कहाँ आ गया !
साहस रख, प्रत्येक परिस्थिति,
स्थाई कभी न रहे, ना रही है !
आज राष्ट्र की बागडोर,
अध्यापक के हाथों में ही है !
भूल गए वो यदि अपना,
पूर्व रूप, तो भी चिंता क्या ?
नया वर्ग निर्माण, यह भी
ध्रुव सी अविचल,बात नहीं क्या ?
शिक्षक वर्ग कहेगा- 'शिक्षक व्यर्थ नहीं'
कुछ यहाँ रह गया !

आज शिक्षक दिवस है....
विद्यालयों में शिक्षकों  के मान-सन्मान का दिवस....
ब्लॉग और सोशल वैबसाइटों पर  शिक्षकों को इस पद की गरिमा बताने का दिन....
पर हमारे देश में गुरुओं को....
"गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु
गुरुदेवोमाहेश्वरा
गुरु साक्षात् परमब्रह्म
तस्मै श्री गुरुवे नमः !"

 तुमने तेज अर्जुन में देखा,
उस तेज को खूब निखारा तुमने,
दुर्योधन में अबगुण असंख्य देखे,
न दूर करने का तुमने प्रयत्न किया,
न बनाया तुमने उसे सुयोधन,
ये पृष्ठभूमि हैं, इस रण की,
सौ कौरव, पांच पांडव,
शिष्य थे केवल तुम्हारे,
हस्तिनापुर का सुनहरा कल हो,
भेजे थे तुम्हारे पास ये सारे,
लक्ष्य था तुम्हारा केवल द्रुपद ,
ये पृष्ठभूमि हैं, इस रण की,


धन्यवाद....









10 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात भाई कुलदीप जी
    शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ
    शिक्षक दिवस पर समर्पित अंक
    शानदार है
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ
    बहुत ही बढिया है लिकों का संकलन..
    आभार।

    जवाब देंहटाएं
  3. नमस्ते।

    शिक्षक दिवस की शुभकामनाऐं। राष्ट्र -निर्माण में जुटे शिक्षक वर्ग को मेरा सादर नमन। कुलदीप जी ने आज शिक्षक दिवस पर विशेषांक प्रस्तुत किया है। सभी लिंक अपना -अपना प्रभाव छोड़ते हुए। सभी चयनित रचनाकारों को बधाई एवं शुभकामनाऐं। आभार सादर।

    जवाब देंहटाएं
  4. शुभकामनाएं शिक्षक दिवस की। सुन्दर प्रस्तुति कुलदीप जी।

    जवाब देंहटाएं
  5. सुप्रभात आदरणीय कुलदीप जी,

    आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    बहुत सुंदर रचनाओं का चयन एवं प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति ..
    शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ...

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत बहुत धन्यवाद मेरी प्रस्तुति को स्थान देने हेतु । जो सिखाए वह शिक्षक ! आप सभी से कुछ ना कुछ सीखने को मिला है । अतः आप भी मेरे शिक्षक हुए । सभी को शिक्षक दिवस की बधाई व शुभकामनाएँ । सादर ।

    जवाब देंहटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.

    जवाब देंहटाएं
  9. Wishing you all a very Happy Teacher's Day. Bahut sundar links. Meri rachna ko sthan dene ke liye aapkaa bahut-bahut dhanyvad evam aabhar Kuldeep ji.

    जवाब देंहटाएं

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