पाँच लिंकों का आनन्द

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मंगलवार, 27 जून 2017

711...अँधेरे में रौशनी की किरण – हेलेन केलर

जय मां हाटेशवरी....
• यदि हम अपने काम में लगे रहे तो हम जो चाहें वो कर सकते हैं.
• चरित्र का विकास आसानी से नहीं किया जा सकता. केवल परिक्षण और पीड़ा के अनुभव से आत्मा को मजबूत, महत्त्वाकांक्षा को प्रेरित, और सफलता को हासिल किया जा सकता है।
• खुद की तुलना ज्यादा भाग्यशाली लोगों से करने कि बजाये हमें अपने साथ के ज्यादातर लोगों से अपनी तुलना करनी चाहिए.और तब हमें लगेगा कि हम कितने भाग्यवान हैं.
• अकेले हम कितना कम हासिल कर सकते हैं , साथ में कितना ज्यादा.

सादर अभिवादन....

27 जून 1880 - 1 जून 1968

हेलेन केलर जो ना सुन सकती थी....
न देख सकती थी....
न बोल सकती थी....
फिर भी वो सब कुछ किया....
जो पूर्णतः सक्षम व्यक्ति के लिये करना भी....
मुमकिन नहीं....
....मैं आज उनके जन्म दिवस पर याद करते हुए....
...उन्हे नमन करता हूं....
पेश है आज की लिये मेरी पसंद....


हेलेन केलर: जो हमें 'देखना' और 'सुनना' सिखाती है...पारुल 
केलर जब 19 महीने की थीं, तो एक बीमारी ने उनकी ये तीनों शक्तियां ख़तम कर दी. जिस उम्र में बच्चे आसपास की हर चीज़ को देख कर समझते हैं. बोलते हैं. सवाल करते हैं. उस उम्र में केलर अनजान अंधेरे और सन्नाटे से जूझ रही थीं.


अँधेरे में रौशनी की किरण – हेलेन केलर
एक दिन हेलेन की माँ समाचार पत्र पढ रहीं थीं, तभी उनकी नजर बोस्टन की परकिन्स संस्था पर पङी। उन्होने पुरा विवरण पढा। उसको पढते ही उनके चेहरे पर प्रसन्नता की एक लहर दौङ गई और उन्होने अपनी पुत्री हेलन का दुलार करते हुए कहा कि अब शायद मुश्किलों का समाधान हो जाए। हेलन के पिता ने परकिन्स संस्था की संरक्षिका से अनुरोध किया जिससे वे हेलेन को घर आकर पढाने लगी।



हेमला सत्ता भाग 2... कविता रावत
“आज भूत का चोला छोड़ मैं फिर से मनुष्य हुआ हूँ। इसके लिए मैं आपका ऋणी रहूंगा। सदा आपके गुण गाता रहूंगा। आप न मिलते तो मैं भूत बनकर ही किसी दिन मरकर पड़ा रहता।“  हेमला को कृपा दृष्टि से देख कर ठाकुर ने सबसे कहा- “सुनो, अब से भूलकर भी भूत से नहीं डरना। भूत-भाव के भय से देखो कैसे सबने हेमला को मनुष्य से भूत समझ लिया, यह प्रत्यक्ष उदाहरण तुम्हारे सामने है।“


"अनंत का अंत".......प्रगति मिश्रा 'सधु'
हर शब्द में एक काशिश ~~~~
एक नया उन्माद होता है
शब्द प्रेम है, शब्द अनुभव है 
शब्द तुममें है, शब्द मुझमें है


शाम....श्वेता सिन्हा
उतर कर आसमां की
सुनहरी पगडंडी से
छत के मुंडेरों के
कोने में छुप गयी
रोती गीली गीली शाम
कुछ बूँदें छितराकर
तुलसी के चौबारे पर


कलम जब कफन को उठाती....डॉ जयप्रकाश तिवारी
कवि की कलम
जब कफन को उठाती
तब कविता, कहानी
नई जग मे आती,
समस्याओं का हल भी
वही तो सुझाती।

भाई कुलदीप जी का नेट कोमा में है
प्रस्तुति दिग्विजय अग्रवाल के द्वारा बनाई गई है
रचनाकारों को सूचना प्रकाशनोपरान्त वे स्वयं देंगे

धन्यवाद।





13 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात....
    सुंदर पठनीय लिंकों का चयन
    आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभप्रभात....
    दो सपताह से प्रस्तुति बनाते हुए....
    नैट चलना बंद हो जाता है....
    भाई साहब का आभार....
    प्रस्तुति बन रही है....

    आभार....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत ही सुंदर प्रेरणात्मक प्रस्तुति । सादर आभार। शुभ प्रभात

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत ही सुंदर संकलन। अनेक रूप - रंग - गंध से सुरभित हिन्दी वाटिका। मेरी रचना को स्थान देकर मुझे गौरवान्वित करने हेतु आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रेरणा और संदेशों से परिपूर्ण बहुत अच्छी लिंक।
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत प्रेरक प्रसंग,सुंदर कहनी और प्यारी कविताओं से सजे आज के अंक के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।
    मेरी रचना को मान देने के लिए आभार बहुत सारा शुक्रिया
    सादर ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर विषय वस्तु सुन्दर प्रस्तुति कुलदीप जी।

    उत्तर देंहटाएं
  8. शुभप्रभात
    आदरणीय, कुलदीप जी
    आज का अंक प्रेरणाप्रद है
    कहते हैं जहाँ चाह ,वहाँ राह
    सराहनीय रचनायें
    आभार।
    "एकलव्य"

    उत्तर देंहटाएं
  9. शुभ प्रभात । प्रेरक व्यक्तित्व हेलेन केलर को समर्पित यह अंक सुंदर रचनाओं से सुसज्जित है। सादर आभार।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति में मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

    उत्तर देंहटाएं
  11. SUNDAR LINK SANYOJAN .........

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर लिंक संयोजन....

    उत्तर देंहटाएं

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