शुक्रवारीय अंक में
आप सभी का स्नेहिल अभिवादन |
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आज
हर स्त्री के मन की बात
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सोते हुए ही
किसी भी स्त्री का
रुकता है सोचना ,
वरना तो पल पल
कुछ भी करते हुए
स्वयं से ही
चलता रहता संवाद
विषय कोई भी हो
करती रहती है
स्वयं की स्वयं से बात ,
कभी अतीत की गलियाँ
घूम आती है
गूँथते हुए आटा ,
तो कभी भविष्य
सोचते हुए
चिंतित मन के आगे
खिंच जाता सन्नाटा ।
संगीता स्वरुप
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अब आज की रचनाओं का आनंद लें .......
अब बहुत हो गयी श्वेता की नक़ल ......... कोशिश कर रही थी कि उसके जैसी प्रस्तुति लगा सकूँ ....... लेकिन सबका अपना ही तरीका होता है ...... एक जैसा तो नहीं हो सकता , तो भई मैं आ जाती हूँ अपने ही अवतार में ......
बात अवतार की चली है तो डॉक्टर रश्मि ठाकुर हिंदी लेखन में अवतरित हो रही हैं ...... पढ़िए और उत्साहित कीजिये ......... वैसे उन्होंने हम सब लिखने वालों के मन की बात कह दी है ....
कभी भावनाओं से बुहारती हूँ,
कभी आंसूओं से पखारती हूँ,
कभी इतना कोलाहल करते हैं,
कि चुप कराना मुश्किल,
कभी ऐसे चुप,
कि बोलवाना मुश्किल।
ये मेरे दोस्त हैं, मेरे हमनवा,
जो आते हैं, कहीं मन के कोने से,
जब मैं अकेली होती हूँ।
शब्द कभी भी आपको अकेले नहीं रहने देते ........... ऐसे ही बड़े बुजुर्ग भी अपने बच्चों का सदा ध्यान रखते हैं ........ लेकिन क्या जिस तरह आप शब्दों को पकड़ कोई नयी रचना बुन लेते हैं वैसे ही क्या बुजुर्गों का हाथ पकड़ते हैं ? ....... एक लघु कथा जो मन को छू गयी .....
वो तो ..वो तो.. ऐसे ही..वो बाबू जी को अचानक देख
शालिनी हड़बड़ा गई ।
उसने जल्दी से अपना आँचल ठीक किया और पैरो में झुकते हुए बोली..चरण स्पर्श बाबू जी ।
बाबू जी ने उसके शीश पर हाथ रखते हुए कहा जीती रहो बेटी । सानंद रहो, भगवान तुम्हें लंबी उमर दें ।
हर जगह विसंगतियाँ दिखाई देती हैं ........ वो चाहे परिवार की बात हो या समाज की .अब आलम ये है कि सब कुछ अच्छा ढूँढने का प्रयास कर रहे हैं .......
इस कंक्रीट के जंगल में मकान तो बहुत हैं
पर घर कहाँ हैं।
मकानों में, हवेलियों कमरे तो हैं अनगिनत
पर उनमें रहने वाले अपने कहाँ हैं।
यही सब कहाँ है ढूँढते हुए पहुँच गए ऐसे घर में जहाँ पितृ दिवस पर बच्चों से कुछ चित्र बनवाए गए थे ....... परिणाम आप लघु कथा पढ़ कर जानिये .......
बच्चों के चित्रों में विविधता थी ! किसीमें पापा बच्चों के लिए घोड़ा बने हुए उन्हें सवारी करा रहे थे,
किसीमें बच्चों को चॉकलेट और गुब्बारे दे रहे थे, किसी में बच्चे पापा के कंधे पर सवार थे तो किसीमें
बच्चों को पापा किताब से कहानी सुना रहे थे !
अब इस कथा के परिणाम से तो आप परिचित हो गए .....लेकिन देखिये नशा और क्या क्या गुल खिलाता है ...... पढ़ते हैं एक और लघु कथा ......
मगरू मन ही मन बुदबुदाया- साली पैसे भी ऐसे गिनकर देती है, जैसे खुद कमाती हो। फिर सब्जी वाले से बोला-अबे ठीक लगा ले चाचा। पीछे 20 का किलो दे रहा है, और तुम तो सीधे 50 पे पहुँच गए! ज़्यादा नहीं तो 20 का किलो लगा ले चाचा..
इसमें स्त्री के लिए गाली का प्रयोग हुआ है ... यानि कि हमेशा ही हमारे देश में नारी को दोयम दर्ज़ा ही मिला है ...... लेकिन आज हर क्षेत्र में जहाँ नारी आपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है वहीँ अपने काम में निपुण भी है ...... इसी को आप पढ़िए इस लेख में .....
कुछ लोग कहते है कि महिलाएं कमजोर और डरपोक होती है। महिलाओं को अच्छे से गाड़ी भी चलाना नहीं आती। जो महिलाएं सुंदर है वे बुद्धिमान नहीं होती और जो महिलाएं बुध्दिमान है वे सुंदर नहीं होती। उन लोगो को अपनी बुध्दिमानी और बहादुरी से पायलट मोनिका खन्ना ने करारा जवाब दिया है .
एक सैल्यूट मोनिका खन्ना को तो बनता है ......... और आगे के लिए शायद आप इनको भी सैल्यूट करें .......... जिनका नाम देश के राष्ट्रपति पद के लिए चयनित किया गया है ......... थोड़ी जानकारी उनके बारे में ....
संघर्षशील और जुझारू महिला आदरणीया द्रौपदी मुर्मू मैडम जी के नाम से लोकप्रिय हैं।ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर से आने वाली श्रीमती द्रौपदी मुर्मू यानी मैडम जी की भगवान शिव में गहरी आस्था है।मैडम जी प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय मिशन से जुड़ी जनजातीय समाज से पहली महिला हैं जो देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद हेतु राजग प्रत्याशी बनाई गई हैं |
मेरी निजी इच्छा तो यही है कि द्रोपदी जी ही इस पद की गरिमा को बढ़ाएँ ....... आगे देखिये होता है क्या ........ क्या फैसला आता है ......... और रही फैसले की बात तो चलिए पढ़िए एक लघु कथा ....
तभी घूँघट मे रोती नाथूराम की पत्नी अपनी बेटी को दोहत्थड़ जड़ते हुए चिल्लाई - “करमजली ! सास थी तेरी
दो लात मार भी दी तो मर तो नहीं गई थी तू ! घर से बाज़ार तो कभी गई नहीं , सकूल का मुँह माथा देखा नहीं और चल पड़ी
सीधी दिल्ली ।”
मैं तो इस फैसले के साथ हूँ और आप ? बेचारी के मन में कुछ अरमान थे , अभिलाषा थी ........अब चाह तो कोई भी ,कुछ भी कर सकता है ....... ऐसे ही एक चाह आप पढ़िए यहाँ ......
कभी तुझसे कोई शिकायत नहीं हो
चाहे जैसे रहूँ चाहे जो भी सहूँ !
कभी तुझसे कोई..
अब जब ऐसी अभिलाषा कर ली तो फिर क्या शिकायत ? वैसे आज कल शिकायतों का बड़ा दौर चल रहा है ........ राजनैतिक गलियारे में तो विशेष रूप से ...... खैर हम राजनीती की बात तो करते ही नहीं बस अपने मन की बात करते हैं ......... अरे मन की भी नहीं करते वरना कह देंगे लोग कि मोदी भक्त हैं ........चलिए सीधे सीधे ले चलते हैं एक व्यंग्य पर ......
चेतावनी: इस पोस्ट में योगी जी का न तो हाथ है न ही दिमाग इसलिए कृपया MYogiAdityanath योगी जी जैसे अनुभवहीन को इससे जोड़ कर न देखा जाए।

समय के साथ सोच, शब्द, भावनायें और उनकी परिणति ही नहीं बदली बल्कि तेजी से बदलते समय, मशीनीकरण और मानसिकता से प्रेम भी अछूता नहीं रहा है। अभी तक शब्दों और भावनाओं का मानवीयकरण हो रहा था पर आज यहां शब्दों, भावनाओं और मुहावरों का मानवीयकरण न होकर मशीनीकरण होगा। आज के घोर मशीनीकरण और घनघोर टीवीकरण के कर्कश, कर्णकटु स्वर 
के प्रदूषण से उपजी एक अनोखी, अनहोनी सी प्रेम कथा .....
लीजिये .... आप आनंद उठायें इस प्रेम कथा का ....... और अब मुझे दें इजाज़त ......... अरेएएएएए ...................... ओह , इतनी लम्बी पोस्ट ............. . मैं तो भूल ही गयी थी कि ये पोस्ट तो श्वेता की थी .......खैर अब झेलिये मुझे ....... ... और रहिये तैयार सोमवार को मेरे मन की बात सुनने के लिए ......
तब तक के लिए ......... नमस्कार
संगीता स्वरुप ...