शीर्षक पंक्ति:आदरणीया सुधा देवराणी जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
तू बुला रहा हर आहट में
हर चिंता औ' घबराहट में,
तूने थामा है हाथ सदा
आतुरता नहीं बुलाहट में !
दुनिया सारी चहक उठी
बूँदों की सरगोशी सुनकर
सोंधी मिट्टी महक उठी
यह जीवन सारा
वसीयत में
तुम्हारे नाम पर
मैंने क्यों लिखा
जिस- जिसको दिखा
हस्ताक्षर में
मेरी लिखावट का
पुख्ता निशान
चैल, शिमला के पास एक सुंदर,
शांत हिल स्टेशन --
आप चैल से शिमला घूमकर भी शाम तक वापस आ सकते
हैं। रास्ते में एक चोटी पर स्टोन टेम्पल बना है, जहां तक पहुंचने में आपकी ड्राइविंग स्किल्स का
पूरा इम्तिहान हो जाएगा। शिमला के रास्ते मे कुफरी भी आता है, जहां आपको भीड़
के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा। लेकिन कोई बात नहीं, वहां आप सरकारी कैफे में कॉफी पीकर आगे बढ़ सकते
हैं।
आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस: बुद्धि और चेतना क्या टकराएंगी?
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव