उषा स्वस्ति
त्योहारों, वारों,जयंती...
इस तरह की तमाम ..यंती और जीवन की आपाधापी
के बीच भी रचनात्मकता और सृजन की खुशबू बिखेरती रहती है..
☛ इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय वयोवृद्ध दिवस!
जानती हूँ आपलोगों को भी कुछ अजीब लगा होगा, है न...
किसी भी सभ्य समाज की कल्पना वरिष्ठ जनों के बिना
नामुमकिन है।पर आजकल के माहौल देख कर इसे भी मनाने
की जरूरत पड़..
नई पीढी के भटकाव की एक बडी वजह वरिष्ठों
को अनदेखा कर उनके विचारों अनुभवों को तवज्जों न देना..
☛ अब ज़रा short में ..दूसरी दिवस..
३अक्टूबर को विविध भारती रेडियो चैनल की स्थापना 60वर्ष पूरे ...
यह चैनल भारतीय आम आदमी के जीवन का बैक ग्राउंड म्यूजिक है..
अब सीधे point पे..
लिंकों के माध्यम से आज के चयनित रचनाकारों के नाम है..
गिरिजा कुलश्रेष्ठ जी ,संजीव तिवारी जी,अरुण साथी जी,
पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा जी,डा प्रवीण चोपड़ा जी और सुधा देवरानी जी.✍
🔗 मोहभंग .
लौटती रही मुझ तक ,
मेरी ही आवाज .
और मैं सोचती रही कि
पुकारा है मुझे पहाडों ने.
🔗 नाचा का एक गम्मत : भकला के लगन
छत्तीसगढ़ के लोकनाट्य नाचा में एक गम्मत खेला जाता है। इस गम्मत में नायक की शादी होने वाली रहती है, गांव का एक बुजुर्ग व्यक्ति उनके सामने बहुत सारी लड़कियों को लाकर एक-एक करके पूछता है।
सबसे पहले ब्राह्मण लड़की को सामने लाकर पूछता है कि इससे शादी करोगे?
साहब बहुत गरम है, कह रहे हैं कि गंधी जी को मार तो दिया पर वह मर काहे नहीं रहिस है। अगल-बगल में चेले चपाटी भी थे। वे लोग भी साहिब के गुस्से को देखकर मुंह लटका लिए। जयंती के दिन वैसे भी मुंह लटका ही लेना चाहिए। चेले चपाटी को यही लगा। पर साहेब का गुस्सा शांत ही नहीं हो रहा। तभी उधर से हमारे मघ्घड़ चा भी आ पहुंचे।
ढूंढता है तू क्या ऐ मेरे व्याकुल मन?
चपल हुए हैं क्यूँ, तेरे ये कंपकपाते से चरण!
है मौन सा कैसा तेरा ये अभ्यावेदन?
🔗 सुबह नाश्ते ना करने वालों के लिए एक संदेश...
दरअसल कई बार वाट्सएप पर कुछ ऐसे संदेश किसी डाक्टर से मिल जाते हैं कि अपना काम बढ़ जाता है ...यही लगता है कि इन्हें हिंदी में लिख कर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए..आज भी सुबह एक ऐसा ही संदेश मिला
ये मुई बरसात...
और टपक रही मेरी झोपड़ी
की घास-फूस......
भीगती सिकुड़ती मिट्टी की दीवारें
जाने कब खत्म होगा ये इन्तजार
सृजन को प्रेरित और मुखरित करने के लिए शब्दों को माध्यम बनाए ..
इतिश्री
पम्मी सिंह
धन्यवाद।✍




