सादर अभिवादन
आज ग्यारह जनवरी है
आज ग्यारह जनवरी है
वर्ष भी याद है : सन उन्नीस सौ छियासठ
जगह भी याद है : ताशकन्द
जगह भी याद है : ताशकन्द
पुण्यतिथि है आज पूर्व प्रधान मंत्री
आदरणीय श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की
शत शत नमन उन्हें....
कुछ ज़ियादा तो नहीं पढ़ा आज...
इस ब्लॉग में पहली बार....
कविता भी अपना रूप बदल रही
ठहरो तो, अंधेरा जरूर मिटेगा
रात के साथ परछाइयाँ भी
गुम हो जाएँगी दिन के
निकलने से पर अभी
एक लड़ाई बाकी है
इस फासले का,
द्वंद्व का
उजाले के
सफर में,
रात को
गुजर
जाने
दो
यूँ
ही
मैंने आज खुद को किताबो के,
बाजार में देखा,
मोल मिल गया उन शब्दों को,
जो मेरे लिए अनमोल थे,
सभी पढ़ रहे है तुमको,
इक सिवा तुम्हारे,सभी जानते है,
किवाड़ों से वो देखता रहा उन्हें दिन-रात यहाँ
दिल की दीवारों पे कब दस्तक दें पता न चले
इंसान घिरा रहता आशंकाओं से इंसान के प्रति
फ़क़ीरों में या इंसानों में कौन है यह पता न चले
हर बात की एक बात है कि प्रेम का ओहदा सबसे ऊपर है......समाज की मान्यताओं से कहीं ज़्यादा ऊपर| तभी तो कृष्ण और राधा के रिश्ते को कृष्ण और रुक्मणी के वैवाहिक संबंधों के मुकाबले बहुत ऊंचा दर्ज़ा प्राप्त है| गर्गसंहिता के मुताबिक जिस तरह पार्वती शिव की शक्ति है उसी तरह राधा कृष्ण की शक्ति हैं| कृष्ण के प्रति राधा का प्रेम निस्वार्थ भाव से था....कहते हैं एक बार रुक्मणी ने कृष्ण को गर्म दूध पीने के लिए दे दिया था तब राधा के तन पर छाले पड़ गए थे......
प्रेम ना बाड़ी उपजे ।
प्रेम ना हाट बिकाय ॥
आज का शीर्षक...
कानून
किसी को भी
नहीं पढ़ाये जाते हैं
बड़े छोटे
का कोई भेद
नहीं किया जाता है
कभी कभी
उल्लू को भी
राजा बनाया जाता है
आज्ञा दें दिग्विजय को






