सादर अभिवादन
बस दो दिन और
फिर अयोध्या में मौज ही मौज
मिली - जुली रचनाएं देखिए
दरवाजा खुला।
"इतनी रात कहां कर दी।" अब्बू गुस्से से आगबबूला थे।
"कार्यक्रम ही लंबा खिंचा। क्या करती ?"
"क्या था कार्यक्रम? "
"राम भजन संध्या।" तसल्ली से बैठते हुए बेटी बोली।
"अरे! तुमने गया राम भजन?
"हां हां...फिर पर्स से नोट निकालते हुए वह गिनने लगी, एक दो तीन.....नोटों की चमक से,
अब्बू की आंखें चुधिंया गईं, "तू तो नात-ए-पाक कव्वाली गाती थी, फिर राम भजन....?"
विधना के भी खेल निराले
राम लला का घर छूटा।
देख पीर श्री राम लला की
जन-मन का हृदय टूटा।
विराम हुआ संघर्ष देख अब
राम नाम का कीर्तन हो।
आज के इस ज़माने में
हर आदमी का
अपना एक मकान होना चाहिए
मुक़ाम मिले ना मिले
मकान मिलना चाहिए
ज़िन्दगी दर बदर की ठोकरों से
गुलज़ार है
दिन में ख़ामोशी तो
रात में आँसुओ की दूकान है
सर्पगंधा एक पौधा है जिसकी जड़ों का रंग पीले या भूरे रंग का होता है। वहीं, इसकी पत्तियों का रंग चमकीला हरा होता है और ये हमेशा तीन-तीन के जोड़े में होती हैं। इसके फूल का रंग सफेद और वायलेट होता है। ऐसा माना जाता है कि इस पौधे को घर में लगाने से सांप नहीं आते हैं। साथ ही इसे सांप के काटने पर दवा की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका वैज्ञानिक नाम रावोल्फिया सर्पेंटिना
(Rauvolfia serpentina) है। इसे इंडियन स्नेकरूट के नाम से भी जाना जाता है।
सर्पगंधा की जड़ को पीसकर इसके पाउडर को खाने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
राममय हुई धरती सारी
हर्षित हैं खग, मृग, नर- नारी
महा उत्सव की करो तैयारी
आरती थाल करो तैयार
श्री राम आयेगें हमारे द्वार
मिष्ठानों के भोग बनाओ
दीप जलाओ घर - द्वार
आज बस
कल फिर
सादर




