शीर्षक पंक्ति: आदरणीय अशर्फी लाल मिश्र जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
आइए पढ़ते हैं पाँच पसंदीदा रचनाएँ शनिवारीय अंक में-
बाहर खेल रहे रेणुका नंदन,
साथ था छौना वनराज का।
एक क्षण थी मातु अचंभित,
सचमुच छौना वनराज का?
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घौर बौड़ि आ, बेटा! | पलायन की पीड़ा और अपनों का इंतज़ार
छोटा भाई
तेरु दिनभर खटदु,
ब्याखुनि
नशे मा धुत्त ह्व़े आवै।
कैकू बि
ड़र-धौंस नी च अब,
नशे मा अपणु
परिवार भुलावे।
भुलि ग्यों
ऊं घर की मर्यादा,
ह्व़े ग्युं
छार-छार यो परिवार च,
सारु घौर आज
बीमार च।,
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"बैठो प्रिया, हड़ताल खत्म हो गयी है, मजदूरों को हड़ताल अवधि का वेतन एडवांस रूप में भी मिल गया है, वे फिर से काम पर हैं. फैक्ट्री को बंद करने की अनुमति के आवेदन की सुनवाई में प्रबंधन पूरी तरह नंगा हो गया है. फिर भी मजदूरों के हाथ में जो वेतन वही ट्रक सिस्टम वाला है जिससे छुटकारा पाने और फेयर वेजेज प्राप्त करने के लिए उन्होंने लड़ाई शुरू की थी.”
प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा धर्म
सुंदर अंक
जवाब देंहटाएंआभार
वंदन