निवेदन।


फ़ॉलोअर

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

4719,..राह से जीवन बना रे....

 सादर अभिवादन

21 अप्रैल ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 111वॉ (लीप वर्ष में 112 वॉ) दिन है। 
साल में अभी और 254 दिन बाकी है।
 आज राष्ट्रीय सिविल सेवा दिवस है

रचनाएं ....




राह  कुछ  गाती  रही  है  
राह  तो  साथी  रही  है 
राह  में  अनुभूतियां  है 
राह  से  जीवन  बना  रे





मिट्टी की सोंधी महक में,
छुपा है अपनापन सारा,
ये चाय नहीं, एक रिश्ता है,
जो हर बार लगे दोबारा




जो कला, संस्कृति, परंपरा,सृजन
स्मृति में चिन्हित हो चुका है,
हमारा परिचय बन चुका है,
सदियों से समय के झंझावत
झेल कर भी टिका हुआ है,
वह हमारी अमूल्य धरोहर है ।



तो फिर ..
नौ माह ना सही,
नौ सप्ताह तक ही 
गर्भ संभालने वाली 
श्वान माँओं (कुत्तियों) में भी तो 
होते ही होंगे ना भगवान ? 
है ना ? .


अनुभव, ना हो महज कोरा,
छुअन, ना हो सिर्फ कल्पनाओं में पिरोया,
और, मूर्त कहीं, हो जाए, सत्य,
मधुर, लगे ये स्पंदन!




सुनहरी सी ये डाल, 
जैसे विषु का पैगाम है,
कोन्ना के फूलों में बसता 
केरल का हर अरमान है।
सुबह की पहली किरण संग, 
जब ये आँगन में सजता है,
हर घर के कण-कण में तब, 
खुशियों का ऐलान है।




1. यदि उत्पादन बंद था, तो क्लीन रूम को मेंटेन करने के लिए बिजली की खपत 'पीक' पर क्यों थी?

2. स्टॉक रजिस्टर से गायब हुए 5,000 सिलिकॉन वेफर्स का विधिक स्पष्टीकरण क्या है?

3. क्या 'वेस्ट डिस्पोजल' के नाम पर असल में तैयार IC को फैक्ट्री से बाहर भेजा गया?

प्रिया ने खिड़की के बाहर देखा. दूर फैक्ट्री की लाइट जल रही थीं. उसे यकीन हो गया कि कल की 
जिरह केवल एक विधिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस 'सत्य' की स्थापना होगी 
जिसे प्रबंधन ने फाइलों के नीचे दबा रखा था.


सादर समर्पित
सादर वंदन

3 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात
    मिट्टी की सोंधी महक में,
    छुपा है अपनापन सारा,
    ये चाय नहीं, एक रिश्ता है,
    जो हर बार लगे दोबारा

    जवाब देंहटाएं
  2. जी ! .. सुप्रभातम् सह सादर नमन संग हार्दिक आभार आपका ...

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...