सादर अभिवादन
अब खुद ही गिर जाओ तुम,
टूट कर जमीन पर
पत्थर मारने वाला बचपन,
मोबाइल मे व्यस्त है।।
रचनाएं ....
इ तना ही नहीं नेहरू ने अरुण की आर्थिक सहायता की और उसे फिर से पढ़ने के लिए भी प्रेरित किया ! काम के बोझ के बावजूद अरुण ने मेहनत की और 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा सफलतापूर्वक पास की !
आज वह कंटेंट क्रिएटर बन चुका है।
उसकी एक पहचान बन चुकी है ! अगर नीयत साफ हो और साथ देने वाला, सच्चा मित्र हो,
तो मंजिल मिल ही जाती है। गरीबी के कारण जिन हाथों ने कलम छोड़ सफाई का कपड़ा थामा था,
आज उन्हीं हाथों में कामयाबी की चाबी है।
आज वो लाखों दिलों पर राज कर रहा है ! यह उपलब्धि अरुण जैसे
हजारों बालक-बालिकाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है
किराए की हँसी चेहरे पे पहने रहे उम्र भर,
आँख क्या छलकी कि मुस्कुराना भूल गए हम।
बेच डाली मुस्कुराहट इक खिलौने के लिए,
ख़ुद अपनी हँसी से आँख मिलाना भूल गए हम।
AIIMS अधिनियम, 1956
नेहरू की तत्परता से नहीं,
अमृत कौर के लगातार दबाव से पास हुआ।
उन्होंने लड़ाई लड़ी:
अफसरशाही की सुस्ती से
मंत्रिमंडल की उदासीनता से
कांग्रेस की ढिलाई से
फाइलें चली क्योंकि उन्होंने जबरदस्ती चलवाईं।
(स्वतंत्र भारत की प्रथम स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृत कौर को
AIIMS के लिए पूरा श्रेय मिलना चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं।)
तुम्हारी हथेली
काश! कि ये दुनियारी हथेली
कोमल होती
तुम्हारी हथेली की तरह
मैं रख देती चुपके से
इच्छाओं के फूल
और गहरी साँसें
पतझड़ की टूटन
अब सँभलती नहीं
उदासियाँ दफ़न हो रही हैं
साँसों में
साँसें कितनी उथली चलती हैं
इन दिनों।
कच्चा चिट्ठा
अचानक प्रशांत बाबू बोल उठे. "कॉमरेडों, तुमने जबर्दस्त काम किया है. फैक्ट्री प्रबंधन के लिए डेथ वारंट तैयार कर दिया है.. हमने साबित कर दिया है कि फैक्ट्री मुनाफे में चल सकती है, बस मालिक की नीयत खोटी है."
उनके चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी. "शानदार! यह काम एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की टीम हफ़्तों में करती. अब हमारे पास आम सभा में मज़दूरों को देने के लिए केवल ही भाषण नहीं, बल्कि ठोस सुबूत हैं."
सादर समर्पित
सादर वंदन
सादर समर्पित
सादर वंदन
सुन्दर प्रस्तुति। सभी चयनित रचनाकारों को हार्दिक बधाई।
जवाब देंहटाएंआज फिर आपने बहतरीन लिंक प्रस्तुत किये हैे. अनवरत को स्थान देने के लिए आभार.
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