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सोमवार, 29 मार्च 2021

2082 ----- होली का त्योहार ..... और .... अखबार ही अखबार ..

  होली है ....... होली है ...... होली है .....

आज तो हमें न पता कि यहाँ क्या चर्चा कर  रहे और क्या लिंक लगा रहे । भई होली है ...... जोगी सारा रा रा रा रा।

होली के चक्कर में कल एक पड़ोसी थोड़ी ठंडाई ले आये  कि भाभी बहुत बढ़िया बनाई आप पी कर देखो ।कहा भी हमने कि भैया सुना तुम बूटी बहुत बढ़िया छानते , हम न पियेंगे । तो बोले अरे आपको थोड़े ही पिला देंगे बूटी , ये तो ठंडाई है । उनका लिहाज करते हुए जैसे ही ठंडाई पी , जोर से  बोले बुरा न मानो होली है ......  जीत गए जी जीत गए हम तो शर्त जीत गए ....
 
और हम  हक्के बक्के मुँह फाड़े देख रहे उनको ..

 हम बोले , जे तो बहुत ही गलत बात कर दिए भैया आप ।अब बताओ सोमवार को पाँच लिंक का आनंद पर लिंक लगाने और तुम हमको टुन्न कर दिए । हो गया न सब गड़बड़ । अब हम क्या तो लिखेंगे और क्या चर्चा करेंगे .... सब तुम्हारी गलती ... लगे जार जार रोने ....

 भैया बोले काहे परेशान हो रहीं आप , ऐसा करो जिसकी पोस्ट लगानी न वो हमें दे दो ,हम अपने प्रकासक मित्र से छपवा लाते हैं अखबार में , तुम्हें  कछु न लिखना पड़ेगा । 
बस वो अखबार ही लगा देना  , अपने आप पढ़ लेंगे अखबार ।  हमें भी लगा ये बढ़िया । वैसे भी सबको ही अखबार में छपना बहुत ही पसंद ....न कुछ लिखना पड़ेगा न सोचना । हींग लगे न फिटकरी रंग चोखा ......  आइडिया बढ़िया दिया । बस फटाफट हमने उनको पोस्ट पकड़ाईं और लगे इन्तज़ार करने । थोड़ी देर में देखा प्रफ्फुलित मन चले आ रहे भैया हाथ में अखबार लिए । चेहरे पर हमारे भी मुस्कान दौड़ गयी लो जी हो गया काम ....पर ये क्या सारे अखबार अंग्रेजी में  । मैंने पूछा भैया जी ये हिंदी के ब्लॉग की पोस्ट अंग्रेजी में छपवा दी , ये क्या गज़ब किया ? 
बड़े इत्मीनान से बोले , हमारे जो मित्र हैं न प्रकासक उनके  हिंया अंग्रेजी में ही छपता अखबार । तो हम सब हिंदी का अनुवाद  अंग्रेज़ी में करा  दिए हैं। 
अब हम पर तो धीरे धीरे बूटी असर कर रही थी.... कुछ समझ आ रहा था कुछ नहीं .... तो बस अखबार उठा जैसे तैसे आज लिंक लगा दिए हैं । अब खुद ही पहचान लो कि किसकी रचना किस अखबार में छपी । हम तो बस होली की तरंग में बैठे । 

बस इतना बताये दे रहे कि न जाने काहे जिद्दी शर्त ले     रिश्तों के पीछे पड़ गए लोग .... और फिर कर रहे खुद      ही में आत्म मंथन  .... अब भला बताओ  त्योहार पर करता  कोई   ऐसा ?   नहीं न ... तो चलो हम तो फगुनाहट ही कर लें ....क्या गज़ब होली के गीत लिखे  और सबसे ज्यादा  तो चमत्कार जो हुआ वो जानने लायक ......खेली तो सूखी  होली  पर भीगे ज़बरदस्त अंतस तक ......









अब भैया अपना अपना अखबार छांटो  और पढो खोल कर ....  किसके हाथ कौन सा अखबार आये ..... मुझे कुछ नहीं मालूम ....  लिंक तक पहुँचने के लिए  ज़रा उलटिए  - पलटिये अखबार ..... अरे वही मतलब न कि.... करिए क्लिक  अखबार पर ...... 


होली की हार्दिक शुभकामनाएं 

मिलते हैं अगले सोमवार को 

नमस्कार 
संगीता स्वरुप 






52 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बेहतरीन प्रस्तुति।
    आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 💐

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  2. ग़ज़ब..
    लाजवाब होली अंक
    अपनी आन,बान और शान के साथ..
    रचनाओं के बारे में बाद में
    एक चुटकी गुलाल आपके चरणों में
    होली पर्व की शुभकामनाएं..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  3. भई वाहह!! गज़ब होलिमय प्रस्तुति।
    होली की शुभकामनाएँ।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  4. शुभप्रभात......
    होली की शुभकामनाएं.....
    बहुत अच्छा लगा......आप की प्रस्तुती पढ़कर.....
    सादर नमन......

    जवाब देंहटाएं
  5. रंगोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏 अत्यंत सुन्दर और अनूठी प्रस्तुति । इन्द्रधनुषी रंगों से सुसज्जित संकलन में मेरे सृजन को सम्मिलित करने हेतु बहुत बहुत आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  6. ईश्वर आपको स्वस्थ, प्रसन्न, दीर्घायु और खुशहाल रखें। आप हमेशा उल्लास और उमंग से भरे रहें ... चिन्तामुक्त रहें। इस होली आपका जीवन सच्चाई और अच्छाई के रंगों से सराबोर हो जाए। आपको सपरिवार शुभकामना। पूनम और विश्वमोहन।🌹🌹🌹😃😃🙏🙏

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    उत्तर
    1. आभार विश्वमोहन जी . हमारी तरफ से पूनम जी को भी होली की शुभकामनाएँ दीजियेगा

      हटाएं
  7. जी ! नमन संग आभार आपका संगीता जी .. मेरी एक पुरानी बतकही को अपने आज के पाँच अख़बारों की पोटली में से एक पोटली में समेटने के लिए .. साथ ही आपको बूटी संग ठंडई धोखे से पिलाने वाले अनोखे पड़ोसी भैया को "जोगीरा सारा रा रा रा रा" वाली होली की हम पाठक/पाठिकाओं (उन सभी से बिना अनुमति लिए हुए ही) की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं ...
    कारण - जिसकी वजह से आप आज टुन्न होकर अपनी अनोखी अदा (क्षमा किजिएगा, अदा नहीं अंदाज़ में) में "पाँच लिंकों का आनन्द" में अख़बारनुमा प्रस्तुति देकर सभी के अंतस में हड़बोंग मचा दिया है।
    क़ुदरत सब को ऎसे पड़ोसी/पड़ोसन वरदानस्वरुप प्रदान करें ..
    पर अंत में .. " अब "भैया" अपना-अपना अखबार छांटो " ...कह कर सभी पाठकों को तो अनुमति दे दी और "बहना" ना कह कर सभी पाठिकाओं को रोक दिया .. शायद ... वैसे भी आज सभी गुझिया, पुआ, दही बड़े, पकौड़ियाँ बनाने और खिलाने में व्यस्त होंगीं, ऐसा आप सोचीं हों ..है ना ?
    हम भी क्या-क्या बतकही किए जा रहे हैं .. एकदम से ...:) :) .. सच्ची बात बतलाएं!? .. दरअसल हमारी भी एक शुभचिंतिका पड़ोसन कल शाम ही बड़े प्यार से मुझ मधुमेह पीड़ित प्राणी को 'शुगर फ्री' बर्फ़ी कह कर , हरे रंग की कुछ काजू बर्फियां एक तश्तरी में अपने हाथों से बुने क्रोशिए वाले रुमाल से ढक कर दे गईं कि "भैया ! ये स्पेशल आपके लिए है।" .. अब क्या बतलाएं आपको .. उसको खाने के बाद से हम टुन्न कम, सुन्न ज्यादा हो गए हैं .. आकाश तो दूर , अभी तो घर की छत में ही इन्द्रधनुष दिखाई दे रहा है .. ऐसे में ही हम आपके भेजे अख़बारों को उल्ट-पलट भी लिए और बतकही भी कर रहे हैं जी .. लगी शर्त्त !!! .. बस यूँ ही ...
    इस मंच के माध्यम से सभी लोगों को सपरिवार "ज़बरदस्त अंतस तक" भींजने वाली होली की हार्दिक शुभकामनाएं ...
    मन तो कर रहा है कि बस ..
    बकबक करते ही रहें, बकबक-बकबक,
    हरी-हरी बर्फ़ियों का है असर जब तक ...
    जोगीरा सारा रा रा रा रा .. बस यूँ ही ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सुबोध जी ,
      होली की हार्दिक शुभकामनाएं
      अब लगा कि होली की कोई चर्चा हुई है । आपकी बतकही तो थी ही ज़बरदस्त जो ऊपर लिखी वो भी बिल्कुल तरंग में लिखी है ।
      अब हड़बोंग मैंने कहाँ मचाया ज़रा बताइए , जिनको (अनोखे पड़ोसी ) आप शुभकामना दे रहे सब उनकी ही हरकरत रही न । और हाँ आप क्या आग लगाने का काम कर रहे यहाँ । भैया हमारी तो आदत है भैया बोलने की तो बोल दिए कि सब समेटो अपने अपने अखबार भैया । आप हैं कि भड़का रहे हमारी पाठिकाओं को । वैसे भी घर घर में अखबार पर कब्जा सबसे पहले भैया लोग ही कर लेते 😄😄😄।
      और जे का बात हुई , हमने तो एक किरदार खड़ा कर लिया भैया के रूप में आप तो ज्यादा फिरकी ले रहे । पड़ोसन दे कर गयी पिस्ते की बर्फी और आप कपोल कल्पना कर सुन्न हुए बैठे । वैसे सोच रही कि पड़ोसन ने भी आपको भैया ही कहा 😂😂😂 ,
      खैर मज़ाक अलग आपकी टिप्पणी बहुत पसंद आई ।बिल्कुल होलीनुमा ।
      लगी शर्त भी कि एक जन्म के तो रिश्ते निबाहते नहीं सात जन्म की बात करते ।
      आपकी टिप्पणी होली का आंनद दे गई ।
      आभार ।

      हटाएं
    2. जी ! "भैया" ही कहा पड़ोसन ने 😢😢😢
      (सही पकड़े हैं ...😃😃😃) ..

      हटाएं
  8. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  9. अनूठा अंदाज भंग की तरंग में.
    होली की बहुत शुभकामनाएं!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. वाणी ,
      इन तरंगों के साथी हो , तो कुछ तो सीखना था न ।
      होली की शुभकामनाएँ ।
      आभार

      हटाएं
  10. होली की ठिठोली में प्रस्तुतिकरण का अलग सा अंदाज ! वाह

    जवाब देंहटाएं
  11. वाह होली पर यूं मादक सी प्रस्तुति संगीता जी अनोखा अंदाज है आपका, इसी बहाने हर अखबार पढ़ने को मिला सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
    मेरी रचना को अखबार कटिंग तक पहुंचा कर फिर यहां रहने के लिए हृदय तल से आभार।
    आपको एंव पूरे मंच को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. कुसुम जी ,
      सादर , अभी आपकी ही रचना पढ़ कर आ रही हूँ ।आपको मेरी छोटी सी कोशिश पसंद आई इसके लिए बहुत बहुत शुक्रिया ।

      हटाएं
  12. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति, रंग-बिरंगी होली है

    जवाब देंहटाएं
  13. आदरणीय दीदी
    संग्रहणीय अंक.
    पूरे अखबार पढ़े
    आनन्दित हुए..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. दिग्विजय जी ,
      आपकी सराहना पुरस्कार स्वरुप ही है ... आभार

      हटाएं
  14. जी प्रणाम दी,
    क्या सचमुच ठंडाई पीने इतने अनूठे,सृजनात्मक प्रस्तुति के विचार आते ह़ै?🙂🙂
    दी इतनी जबरदस्त भूमिका लिखी है कि बस होली फीलिंग स्पेशल वाली हो ली।
    अख़बार में छुपी रचना और रचनाकारों के नाम की पहेली
    बडी लुभावनी लगी दी। ओंकार सर की सूखे रंग से भींजते अंतस,मीना दी की मधुमास के गहरे उतरते भाव,कामिनी जी के विचार मंथन से ओतप्रोत मानव मन का गहन आत्मचिंतन,कुसुम दी की भव्य और शानदार शब्दावली से गूँथी मनमोहक रचना और सुबोध सर जी की 'लगी शर्त
    में मानव मन का आईना दिखाती अनूठी रचना।
    एक से बढ़कर मोती चुनकर आपने अति सुंदर माला हम पाठकों के लिए उपहार स्वरूप लायी ह़ै।
    बहुत बधाई दी मुझे तो यह होली स्पेशल अखबार का रंगीन अंक बहुत पसंद आया।
    सादर शुभकामनाएं और
    सभी गुणीजनों,साहित्यप्रेमी पाठकों को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय श्वेता ,
      तुम का पीकर पढ़ रहीं ये प्रस्तुति ... पढ़ीं नहीं का ? ठंडाई के चक्कर में का पी गए ... तुम भी अजब -गजब ही कर रहीं .... ज़िन्दगी में ये सरप्राइज़ वाला खेल अच्छा लगता न ... लेकिन हमेशा नहीं ... होली की फीलिंग आई बस मुझे प्रसन्नता हुई ... हाँ बाकी जितनी भी रचनाएँ लीं वो वाकई समुद्र से मोती लाने के सामान थीं .. होली स्पेशल अखबार पसंद करने का बहुत बहुत शुक्रिया ...
      सस्नेह

      हटाएं
  15. गज़ब चर्चा सजाई है आज तो।

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  16. वाह पूरी होलियाना प्रस्तुति अखबार में लपेट कर भंग की तरंग में डुबो गईं आप।और भूमिका पढ़ कर तो वाकई नशा हो आया लगा आप सच में तरंग में ही हैं ।बहुत मजेदार प्रस्तुति।सभी अखबारों के पीछे छिपे पर्दानशीनों को बधाई। आपको और सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई...जोगीरा सारारारारा ...होली है ।😊

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    उत्तर
    1. उषा जी ,
      अब अकेले तो न थे न तरंग में . साथ तो आप लोगों का भी था ...प्रस्तुति से नशा चढ़ने कि फीलिंग आई तो हो गयी होली .... बहुत बहुत शुक्रिया ...

      हटाएं
  17. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति
    सभी विद्वजनों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐💐

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  18. गज़ब....

    बेहतरीन... नायाब प्रस्तुति आदरणीया संगीता स्वरूप जी ,
    आप सहित सभी मनीषियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏

    जवाब देंहटाएं
  19. वर्षा जी ,
    आपके द्वारा मिली प्रशंसा अलग ही महत्त्व रखती है .... बहुत बहुत शुक्रिया .

    जवाब देंहटाएं
  20. सबसे पहले तो होली के इस महफिल में देरी से आने के लिए क्षमा चाहती हूं दी, अभी अभी आप का आमंत्रण देख रही हूं, मेरी एक पुरानी रचना जिसमें अनगिनत गलतियां हैं उसे आपने जो मान दिया है इसके लिए हृदयतल से धन्यवाद, आप के स्नेह ने जो मुझे खुशी दी है उसे मैं शब्दों में बयां नही कर पाऊंगी,बस दी आपने होली की खुशी दोगुनी कर दी, और प्रस्तुति के बारे में क्या कहूं.. आपका तो हर अंदाज निराला है, आपको और इस मंच के सभी सदस्यों एवं पाठकों को भी होली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं सादर अभिवादन

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय कामिनी ,
      यदि मेरे छोटे से ओरयास से तुम्हारी होली की खुशियाँ बढ़ गईं तो मैं स्वयं को भाग्यशाली ही मानती हूँ ।
      एक बात कि मैंने ऐसे ही रेंडमली कोई पोस्ट नहीं उठाई है । ब्लॉग को काफी छान कर लायी हूँ तो कैसे मान लूँ कि अनगिनत गलती वाली पोस्ट लगाई है ? विषय अच्छा है । लोग यदि किसी के लिए कुछ करते हैं तो ये उनकी ख्वाहिश अपेक्षाएँ नहीं होनी चाहिये ।
      प्रस्तुति को सराहा इसके लिए आभार ।

      हटाएं
    2. दी, खुशी दोगुनी इसलिए तो हो गई थी कि आपने मेरे व्याकरण सम्बन्धी त्रुटियों को नजरंदाज कर मेरे लिखे विषय-वस्तु को महत्व दिया, आप की पारखी नज़र तो कोयले में से भी हीरा छांट लेती है, आप का यही अंदाज तो निराला है, एक बार फिर से शुक्रिया एवं नमन, आप के इस अथक श्रम को भी नमन

      हटाएं
  21. प्रिय दीदी, सुप्रभात और प्रणाम 🙏🙏मैं भी कामिनी की तरह क्षमा प्रार्थी हूँ कि इतनी मस्त प्रस्तुति और सारगर्भित प्रतिक्रियाओं से इतनी देर में रूबरू हुई। मस्ती और आनंद।में डूबे मन की भावपूर्ण अभिव्यक्ति पढ़कर मन प्रसन्न हो गया। अखबार की कतरन के पीछे छिपे रचनाकारों की रचनाएँ बहुत बढिया रही। सभी को बधाईयाँ और शुभकामनाएँ। समस्त पाठकवृंद का अभिनंदन। आपको बधाई और आभार इस नये अंदाज के लिंक संयोजन के लिए बेमिसाल प्रस्तुति में बस एक कमी खटकी। बस अमित जी का गाना भी हो जाता साथ में--
    भंग का रंग जमा हो चकाचक😁😁😁😁

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    उत्तर
    1. संयुक्त परिवार और त्योहार के बीच सामंजस्य बैठाते हुए देर से आना लाज़मीं था । तो क्षमा की बात क्यों ?
      भंग की तरंग में जाने कैसे तो चर्चा लगाई और कैसे अखबार छपवाए ,जो भुक्तभोगी हो वही समझ सकता । सुबोध जी से पूछ लो सुन्न हुए पड़े थे । यहाँ खुद ही ढोल मजीरा लिए बैठे रहे । वैसे गाने का कार्यक्रम यशोदा जी ने शाम को फिक्स कर दिया था ।
      खैर नोट कर लिया गया है सुझाव .... अगली बार बिल्कुल चकाचक .....अगर ....

      प्रस्तुति पसन्द करने के लिए शुक्रिया
      सस्नेह

      हटाएं
  22. वाह,वाह !होली के शुभ अवसर पर इससे खूबसूरत प्रस्तुति हो ही नहीं सकती संगीता जी । होली की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐💐💐💐

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    उत्तर
    1. प्रिय शुभा ,
      आप सबका यही स्नेह कुछ करने का हौसला देता है ।
      बहुत शुक्रिया

      हटाएं
  23. होली के पावन पर्व पर लाज़बाब प्रस्तुति।आप सभी को हार्दिक धुभकामनाएँ एवम बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  24. सुंदर, अति सुंदर प्रस्तुति दीदी, नया कलेवर, नया अंदाज़, अंक को अविस्मरणीय बना गया । आप मेरे होली गीतों पर मजेदार टिप्पणी कर रही थीं और मैं अपने आप में ही झेंप रही थी परंतु आज आपका होली में डूबा रंग देख मेरी सारी झेंप दूर हो गई । बस आपको जिंदाबाद बोलने का मन कर रहा है ।आपको मेरा सादर नमन और वंदन ।

    जवाब देंहटाएं
  25. प्रिय जिज्ञासा ,
    अरे मुझे तो याद ही नहीं कि क्या लिख आई तुम्हारे होली गीतों पर .... फिर से जाना पड़ेगा .. :) :)
    और जब तुमने कुछ लिख ही दिया तो झेंपने जैसी बात क्यों ? मेरे तो जो मन में आता है लिख देती हूँ .. बहुत सिरिअसली लेने की बात नहीं ... पढ़ते हुए जैसा महसूस करती हूँ लिख डालती हूँ . ये बहुत आदर्शवाद का दिखावा नहीं होता मुझसे ... चलो इस बात की ख़ुशी है कि तुम्हारी दुविधा ख़त्म हुई .. सस्नेह
    हाँ सराहना के लिए शुक्रिया ...

    जवाब देंहटाएं
  26. आदरणीय दीदी, मुझे आपका लिखा हुआ, हर शब्द बहुत सुंदर और अपनेपन से भरा हुआ लगता है, और आपके अंदाज के क्या कहने?बाद आनंद आ जाता है,सदैव स्नेह की अभिलाषा में जिज्ञासा ।

    जवाब देंहटाएं

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