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बुधवार, 10 मार्च 2021

2063..एक नायाब हीरा

 ।। उषा स्वस्ति ।।

"जाने कितनी सुबहें होंगी

कितनी होंगी शाम

कटती-बँटती रही जिंदगी

हो रही तमाम

कदमताल इस काल-चक्र पर-

चढ़ कितना नाचूँगा

मूँदे नयन भाग्य-लिपि अपनी-

यों कब तक बाचूँगा

उस अदृश्य को साँस-साँस में मिले न कभी विराम"

विमल राजस्थानी

जीवन में पल - पल होने वाले परिवर्तन को दर्शातीं पंक्तियाँ ,जो हर मोड़ पर नित्य नवरंगों को सजाती जिसे अवसर की तरह ही लेना चाहिए,तो फिर इसी अवसर का सदुपयोग करते हुए नज़र डालें लिंकों पर...✍️

🔅🔅

बेटी ..एक नायाब हीरा

बेटी पराया धन नहीं 
माँ - बाप का नायाब हीरा होती है 

बेटी की विदाई 

यह एक शब्द है 

पर क्या हम वाकई

🔅🔅🔅


कब तक आशा –दीप जलाऊँ 

कब तक आशा –दीप जलाऊँ ,          

इस अल्हड़ मन को समझाऊँ |

 जनम जनम से मन की राधा ,

खोज रही अपना मनभावन

🔅🔅







विवाह के इक्कीसवीं वर्षगाँठ पर

इक्कीस साल पूरे हो गए 

अपने विवाह को 

बच्चे  भी हो रहे हैं बड़े 

लेकिन एक तुम हो कि हर दिन 

ऐसे पेश आती हो कि 

लगता है आज पहला दिन हो 

अपने साथ का । 


तुम और मैं 

दोनों ही हो गए हैं 

धीरे धीरे मोटे 

और हमे पता ही नहीं चला 

लेकिन हमारी मोटाई का?

🔅🔅

महिला दिवस


 





इतिहास गवाह है,
विरोध हुआ 
बाल विवाह प्रथा का 
सती प्रथा का 
दहेज प्रथा का
कन्या भ्रूण हत्या का
लड़कियों को बेचने का
उनके साथ हो रहे अत्याचार का ...
पुनर्विवाह के रास्ते बने..
🔅🔅
आज की अंतिम प्रस्तुति दार्शनिकता को दर्शाती रचना के साथ यहीं तक..









एक शून्य है सबके भीतर

एक शून्य चहुँ ओर व्यापता, 

जाग गया जो भी पहले में 

दूजे में भी रहे जागता !

🔅🔅

।।इति शम ।।

धन्यवाद

पम्मी सिंह 'तृप्ति'...✍️

13 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन अंक..
    सारी रचनाएँ अप्रतिम..
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन अंक ।सुंदर चयन ।
    अपने ब्लॉग से यदि मैं किसी ब्लॉग पर जा कर टिप्पणी करने चाहूँ तो संभव नहीं हो पा रहा । जो लिंक फेसबुक पर हैं उन पर ही मैं कमेंट कर पा रही हूँ । समस्या के समाधान का प्रयास जारी है ।यदि कोई मदद कर सकता हो तो कृपया सलाह दें ।आभारी रहूँगी ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सादर नमन
      रश्मि प्रभा दीदी का ब्लॉग है महिला दिवस
      http://lifeteacheseverything.blogspot.com/2021/03/blog-post_8.html

      हटाएं
    2. आलोक सिन्हा..
      कब तक आशा दीप जलाऊँ
      https://aloksinha1508surbhi.blogspot.com/2021/03/blog-post.html

      हटाएं
    3. बाकी सब पर आपकी प्रतिक्रिया मौजूद है
      सादर नमन

      हटाएं
    4. यहाँ से सब लिंक्स पर कमेंट हो रहे । लेकिन जब मैं अपने ब्लॉग से रीडिंग लिस्ट , या जिन बलॉस के लिंक मैंने ब्लॉग पर लगाये हैं या जो मेरे ब्लॉग पर पाठक आया और उसके नाम को क्लिक कर उसके ब्लॉग तक पहुँचती हूँ तो वहां कमेंट नहीं कर पाती । पाँच लिंकों का आनंद और मुखरित मौन क्यों कि फेसबुक पर शेयर होता है तो यहाँ से मैं ब्लॉग पर जा के कमेंट कर पा रही ।बड़ी समस्या हो रही ।कोई हल बता सकता है तो कृपया बताएं ।

      हटाएं
  3. पठनीय रचनाओं से सजी हलचल, आभार ! संगीता जी, एक बार रिफ्रेश करके देखिए।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर सराहनीय अंक | सभी रचनाएँ मधुर प्रशंसनीय |बहुत बहुत बधाई ,हार्दिक शुभ कामनाएं |

    जवाब देंहटाएं
  6. अत्यंत सुंदर अनंदकर प्रस्तुति। हर प्रकार की सुंदर रचनाओं और भावों का समावेश। पढ़ कर बहुत आनंद आया। सभी रचनाएँ माँ और नानी को भी सुनाई।
    अत्यंत आभार इस प्यारी सी प्रस्तुति के लिये व आप सबों को प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर संकलन ।मेरी रचना को स्थान देने के लिए बहुत शुक्रिया।

    जवाब देंहटाएं

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