पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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बुधवार, 27 अप्रैल 2016

285..रिटायरमेंट के बाद रनिंग, जिसने जीवन ही बदल दिया


सादर अभिवादन..

गरमी ने पकाना शुरु कर दिया
आम अमरूद सब पीले हो गए
पीले तो हाथ भी हो रहे हैं लड़कियों के
लाल हो गए चेहरे लड़कों के भी....

आज की पढ़ी रचनाएँ.....



सोये हुए क्यों? कवि उठो ! दर्प को दर्पण दिखाओ
नैराश्य ओढ़े भूमि गत जो, हाथ दे उनको उठाओ  
स्वार्थ की संकीर्णता में, इंसानियत जो आज भूले 
झकझोर कर उन पशु सरीखे मानवों में प्राण लाओ 


घर आँगन छत देहरी सूनी,
सूना है मन तुम बिन माँ !
तुम्ही नहीं तो 
क्या घर आँगन !
कैसी वर्षा , कैसा सावन !
बादल भर भर बरस रहे हैं ,
फिर भी धूल उड़ी है आँगन .


मन का मंथन में....कुलदीप सिंह ठाकुर
मैं करण हूं
मुझे याद है
अपनी भूलों पर
मिले हर श्राप
पर मैं मुक्त हो चुका था
हर श्राप  से।
मैंने तो बस
सब कुछ लुटाया ही था



सच को कारावास अभी भी,
भ्रम पर है विश्वास अभी भी ।

पानी ही पानी दिखता पर,
मृग आँखों में प्यास अभी भी ।


खामोशी के सागर में,
मुस्कान कंकड़ डाल |
खुशियों की लहरें,
बना जाता है वह |



ये है आज की शीर्षक रचना का अंश
कह रही है दौड़ो.. और फिट रहो

वाह !!
मशहूर रनर तनवीर काज़मी का लगातार 100 दिन दौड़ने का न्योता मिला है ! नियमों के अनुसार 30 अप्रैल को पहले रन से , जो कम से कम 2 km का होगा, शुरू करके 7 अगस्त तक हर हालात में चाहे भयंकर वारिश हो अथवा बीमार हों,अथवा सफर में हों, बिना नागा दौड़ना होगा !

आज यहीं तक
कल फिर मिलते हैं
यशोदा













4 टिप्‍पणियां:

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