पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

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मंगलवार, 17 नवंबर 2015

122......मन की कई परतें होती हैं

कल तक की 
उपलब्धियों से 
प्रफ्फुलित हूँ मैं
कई सौ प्रतिशत 
की वृद्धि
कुल पेज व्यू 27,170, 
फॉलोव्हर 53
और क्या...
बच्चे की जान लेगी 
क्या यशोदा तू 
121 दिन में....

चलिए चलते हैं आज की चुनिन्दा रचनाओं की कड़ियों का ओर...


आकांक्षा में आशा मौसी
तुम स्नेह भूले तो क्या 
एक दीप जलाया मैंने 
प्यार भारी सौगात का 
झाड़ा पोंछा कलुष मन का 
कोई भ्रम न पलने दिया 
मान का मनुहार का 



रश्मि प्रभा...मेरी भावनायें में
मेरे बच्चों,
मुझे जाना तो नहीं है अभी
जाना चाहती भी नहीं अभी
अभी तो कई मेहरबानियाँ
उपरवाले की शेष हैं
कई खिलखिलाती लहरें
मन के समंदर में प्रतीक्षित हैं


डॉ. ज्योत्सना शर्मा काव्ययुग में
निशा ने कहा 
भोर द्वारे सजाए 
निराशा नहीं 
तारक आशा के हैं 
चाँद आये न आए । 


मौन के दुर्दिन....वन्दना गुप्ता

चुप्पियों को घोंटकर पीने का वक्त है ये . मौन के दुर्दिन हैं ये जहाँ संवाद की हत्या हो गयी है ऐसे में जीत और हार बराबरी से विवश हैं सिर्फ शोक मनाने को .... 



कालीपद "प्रसाद".... मेरे विचार मेरी अनुभूति में
मौन हूँ, इसीलिए नहीं 
कि मेरे पास शब्द नहीं... 
मौन हूँ, क्योंकि जीवन में मेरे 
हर शब्द का अर्थ बदल गया है



रश्मि प्रभा...मेरी नज़र से में
मन की कई परतें होती हैं 
चेहरे की शुष्कता में 
नमी हाहाकार करती है 
खुदाई करो, अवशेषों से पहचान होगी 
कुछ कथा ये लिखेंगे 
कुछ कथा वे लिखेंगे 
कुछ अनकहे,अनपढ़े रह जायेंगे  .... 


नयी उड़ान में... उपासना दीदी
जीवन में
क्या पाया
या
खोया अधिक !
सोचती,
विश्लेषण करती।

आज अब अधिक नहीं...
इज़ाज़त दें...यशोदा को
















6 टिप्‍पणियां:

  1. शुभप्रभात...
    सुंदर लिंक चयन है दीदी आप का...
    कल ही पढ़ सकूंगा...
    कहीं जल्दि में हूं...
    आभार आप का....

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुप्रभात
    मुझे तो आपका संबोधन बहुत प्यारा लगता है |मैं नियमित रूप से यह ब्लॉग देखती हूँ सुन्दर रचनाएं पढ़ने के लिए |मेरी रचना देखी बहुत बहुत धन्यवाद |

    उत्तर देंहटाएं
  3. और ऐलैक्सा रैक छोड़ दिया आपने :)
    हलचल का 370,944, उलूक का छ: साल में 260,490 हुआ है ।

    सुंदर प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर हलचल,

    आप सभी का स्वागत है मेरे इस ब्लॉग "हिन्दी कविता मंच" के नये पोस्ट "मिट्टी के दिये" पर | ब्लॉग पर आये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें |

    http://hindikavitamanch.blogspot.in/2015/11/mitti-ke-diye.html#gpluscomments

    उत्तर देंहटाएं
  5. सुन्दर हलचल .......आभार यशोदा

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत हलचल प्रस्तुति
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं

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