सादर अभिवादन
एक अलक (अति लघु कथा ) लिख डालिए झटपट--
शब्द विशेष है "कल्पना"
तो आइए अपनी कल्पना को साकार कीजिए
रचना भेजने की आज अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026
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2 अगस्त 2026 को प्रथम अंक
पाक्षिक प्रकाशन
मेरी पसंदीदा रचनाएं
कम ही लिखते हैं आज कल
फेसबुक मे ही रमे रहते हैं
पर ग़ज़ब हो गया आज
दो रचनाएं लिख दिया
शुभकामनाएं डॉक्टर जोशी कुमार सुशील जी को
फेसबुक मे ही रमे रहते हैं
पर ग़ज़ब हो गया आज
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शुभकामनाएं डॉक्टर जोशी कुमार सुशील जी को
किसी दिन
जो कभी भूल जाऊँ मैं-
भूलते - भूलते
अगर कभी तुम्हें भूल जाऊँ मैं उस समय को उस पल को दोष नहीं देना
जब पहली बार मिले थे हम तुम!
चाय के उन दो कपों में खौलती भाप में धुंधले हुए आँसू जाने खुशी के थे कि दुख के.
कदम ख़ुद खुशी के लिए भी बढ़ा चुका हूँ बहुत बार,
मगर मेरे जाने का दर्द कोई ताउम्र ढो देगा।
बस इसी सोच में कदम खींच लेता हूँ पीछे,
मेरे बाद मेरे अपनों के लिए मेरे जैसा कोई नहीं हो देगा।
हमें कोई...
इख़्तियार नहीं
वक्त की चाल पर
फिर भी हर पल
दावा पेश करते हैं
वक्त के अपना होने का
अब कौन सा छछूंदर और ढूंढ के तुम ले आओगे
कितना गिरोगे हजूरे आला तुम अब लुढ़क जाओगे
रहने दो नापना एक फुट को तीस सेंटीमीटर से अब
अपनी उलझनों को जनता को खुद आ दिखाओगे
घर के राम कृष्ण हनुमान को साथ ले
सड़क कोई एक नापने निकल जाता है
अल्बर्ट पिन्टो गुस्सा भूल जाता है
लीला देख कर कल्कियों की भुनभुनाता है
सादर समर्पित
सादर वंदन