सादर अभिवादन
पांच लिंकों का अगस्त माह से एक अभिनव कार्यक्रम
लघुकथा लिखिए ....
कम शब्दों में .. बड़ी बात कह डालने का अवसर ..
एक अलक (अति लघु कथा ) लिख डालिए झटपट--
शब्द विशेष है
"कल्पना"
तो आइए अपनी कल्पना को साकार कीजिए
रचना भेजने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026
हमें प्रेषित करें, माध्यम है ब्लॉग संपर्क फार्म द्वारा
2 अगस्त 2026 को प्रथम अंक
पाक्षिक प्रकाशन
रचनाओं का चयन आपके द्वारा
निश्चित रूप से आप बेहतर लिखते है
पूरी कहानी न देकर अपने ब्लॉग का लिंक दीजिए
आपके द्वारा लिखी रचनाएं प्रकाशित की जाएगी
साथ ही आदरणीय विभा दीदी के द्वारा त्रैमासिक प्रकाशित होने वाली
पत्रिका में स्थान पाने का भी अवसर मिलेगा
विशेष जानकारी के लिए गत रविवार का अंक देखें
विशेष जानकारी के लिए गत रविवार का अंक देखें
मेरी पसंदीदा रचनाएं
पंचायत में बूढ़े आदमी ने अपने बचाव में सरपंच से कहा l 'मैंने जो कुछ कहा था, वह एक टिप्पणी से अधिक कुछ नहीं था किसी को नुकसान पहुंचाना मेरा मकसद नहीं था।
सरपंच ने बूढ़े आदमी से कहा, 'आप एक कागज के टुकड़े पर वो सब बातें लिखें, जो आपने उस नौजवान के बारे में कहीं थीं, और जाते समय उस कागज के टुकड़े - टुकड़े करके घर के रस्ते पर फ़ेंक दें कल फैसला सुनने के लिए आ जाएँ
वक़्त लगता है फिर बनाने को,
एक टूटे से आशियाने को.
मसअले तो सुलझ भी जाते हैं,
कौन तैयार है भुलाने को.
कठिन वक्त है
कठिन घड़ी है
कठिन राह पर चलकर हमको
मंज़िल अपनी पानी है
अपनी अदा जो उत्तम हो
वह करके दिखलाना है
कुछ लोगो से सिख सके तो
कुछ उनको सिखलायेंगे
अपने हृदय की कोमलता से
सबको परिचित करवाना है
तुम्हें मुबारक हो तुम्हारे सतरंगी सपने,
अपनी किस्मत तो ब्लैक एंड व्हाईट है।
माना ये पेड़ इमली का है, आम का नहीं,
उसने कह दिया आम, तो वही राइट है।
तख़्तों को क्या ख़बर है थके पाँव की चुभन,
चलना ही लिख दिया गया जिनके विधान पर।
हर दौर में सलीब मिली अहल-ए-सच को ही,
इल्ज़ाम ही लिखा गया उनकी ज़ुबान पर।
सादर समर्पित
वंदन

