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सोमवार, 20 जुलाई 2026

4809...देखो…, मेरे पास काम बहुत हैं और तुम्हारे पास फुर्सत बहुत...

शीर्षक पंक्ति: आदरणीया मीना भारद्वाज जी की रचना से।

सादर अभिवादन।

सोमवारीय अंक में प्रस्तुत हैं  पाँच+ रचनाएँ-

अस्वीकरण: अंक प्रस्तुतकर्त्ता का रचनाओं के कंटेन्ट से वैचारिक रूप से सहमत-असहमत होना ज़रूरी नहीं है बल्कि ब्लॉगर डॉट कॉम पर जो पठनीय कंटेन्ट प्रकाशित हो रहा है वह पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है क्योंकि 'पाँच लिंकों का आनंदपरिवार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है।

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आइए पढ़ते हैं आज की चयनित रचनाएँ-

शुरुआत

देखो…,

मेरे पास काम बहुत हैं

और तुम्हारे पास फुर्सत बहुत

मेरी मानो तो ..,,

खाली वक्त में थोड़ा

आत्ममंथन करना

*****

जगन्नाथ से संवाद

मन में उमङ-घुमङ रहे थे बादल

अश्रु धारा में घुल गया काजल,

घनघोर घटा-सी घिर आई रात,

नींद में सुना मंद मधुर शंखनाद

स्वप्न में मेरे आए स्वयं जगन्नाथ ।

*****

1506 मेघ से मनुहार 

यह धरा ऊसर है तुम बिन

नद स्तर है निम्न तुम बिन

कितने जोड़े सूखी आँखें

बाट जोहती रोज दिन गिन

तप्त धरतीशुष्क वन हैं

आस में सूखे नयन हैं

*****

उनका क्या जो वोट न दें या जिनके वोटों की ज़रूरत न हो?

जब संसार में लोकतांत्रिक व्यवस्था आरंभ हुई थी तो मताधिकार केवल वयस्क पुरुषों को दिया गया था। महिलाओं को मताधिकार नहीं था। संसार की आधी जनसंख्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखने से वंचित थी। महिला समुदाय ने यह अधिकार लंबे संघर्ष के उपरांत प्राप्त किया। आज किसी भी लोकतंत्र में महिलाओं की बात और विचार पुरुषों की भांति ही महत्व रखते हैं। स्वतंत्र भारत में वयस्क मताधिकार में महिलाओं को आरंभ से ही सम्मिलित रखा गया। यह पृथक् बात है कि सदनों में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है।

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मन के पार ही वह मिलता है

शुद्ध प्रेम का स्वाद लेना हो तो मन को एक होना सीखना होगा। जहाँ तुलना होगी, स्पर्धा और ईर्ष्या होगी, वहाँ मन बँटा रहेगा। जहाँ बिखराव है, दूरी है, वहाँ दुख है, पीड़ा है। इसलिए योग के पथ पर चलना हरेक के लिए कितना आवश्यक है। कोई संगीतज्ञ, कवि, कलाकार या मूर्तिकार इस एकत्व का अनुभव करके आनंदित होता है, और उस आनंद को अपनी कला के माध्यम से जगत में प्रसारित करता है।

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गांधी के उपवास

देश में माँगें मनवाने के लिए अनशन करने की परंपरा है। आमतौर पर इसे गांधी की परंपरा माना जाता है। बेशक गांधी ने उपवास की परंपरा चलाई, पर इस बात की पड़ताल करें कि क्या गांधी जी ने भारत की आज़ादी के लिए अंग्रेजों पर दबाव बनाने के लिए क्या कोई अनशन किया थाबेशक उन्होंने लंबे स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और कुछ उपवासों के मार्फत उन्होंने ब्रिटिश-सरकार के प्रति विरोध भी दर्ज कराया। उस दौरान कम से कम 18 उपवास रखेजिन्हें वे आत्मशुद्धि और अहिंसक प्रतिरोध (सत्याग्रह) का सबसे शक्तिशाली हथियार मानते थे।

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फिर मिलेंगे।

रवीन्द्र सिंह यादव

 


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