निवेदन।


फ़ॉलोअर

शनिवार, 19 दिसंबर 2020

1982.. औरतें कलाकार होती हैं

यथायोग्य सभी को प्रणामाशीष

मनुष्य को सुख क्यों चाहिए... मन की शान्ति के लिए.. मन की शान्ति क्या है... मन की शान्ति पाने के लिए शरीर का सात्विक होना...शरीर का सात्विक होना कैसे होगा...  आत्मा के विपरीत आचरण नहीं करना।

अनेकानेक बार लगा कि अपनी मनोस्थिति व परिस्थितियों को समझने के लिए मुझे बस जागना होगा। अलग-अलग आध्यात्मिक कार्य जैसे कि समाज के लिए नि:स्वार्थ सेवा, ॐ का जाप या साहित्य व शास्त्रों का अध्ययन मुझे मेरी नींद से जगाने में मदद करते रहे। यही मेरे ध्यान के माध्यम थे और जागने के आधार। इस बाहरी जागरूकता के आधार से ही मैं अपनी आन्तरिक जागरूकता प्राप्त की।

ज ज्ञान बाँटने का मन किया ... किसी के काम आ सके... जो, हो

शायद थक गया 

भटका हुआ मुसाफिर हूँ अब,

राह नयी दिखा दे मुझे. 

पक्की सड़कें अब भाती नहीं मुझे,

जंगल का पता कोई दे दे मुझे.

औरतें कलाकार होती हैं

पर उनका रास्ता कितना पथरीला था

कौन समझेगा!

और बाकी का क्या

कुछेक तो बीच में ही दम तोड़ देती हैं

याद आ रही है

अंत में थक हार के रात में बिस्तर पर सो जाना

 अलार्म लगाना

कल की तैयारी करना

 वह सामान्य जिंदगी आज कितना अनमोल सा लग रहा है

कल एक छलावा

रास्ते कई अनजाने है, चलना यहाँ संभल कर ।

हैं जमाना दुश्मन यहाँ, न कोई ऐसी तक़सीर कर ।।

मुझको मिला एक राही, रास्ते मे जो छोड़ गया ।

मैं किस पर भरोसा करू, मिला ऐसा तकदीर गर ।।

यह सब भूल जाना मेरे दोस्त

सबसे ख़तरनाक होता है

मुर्दा शान्ति से भर जाना

न होना तड़प का, सब कुछ सहन कर लेना

घर से निकलना काम पर, और काम से घर लौट जाना

><><><><><

पुन: भेंट होगी...

><><><><><

8 टिप्‍पणियां:

  1. न होना तड़प का,
    सब कुछ सहन कर लेना
    घर से निकलना काम पर,
    और काम से घर लौट जाना
    अप्रतिम..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  2. Pash; one of the best poet in modern era. He tried to eradicate the imbalance in society by his poetry.
    All links are appreciable.

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत खूब! यह ज्ञान का वितरण अमूल्य है।रचनाकारों के नाम भी उल्लेख किये जायें तो और अच्छा!👏👏

    जवाब देंहटाएं
  4. जी दी ज्ञान बाँटते रहिये कृपया:)
    सारगर्भित बहुत बहुत सुंदर मंथन को प्रेरित करती भूमिका।
    पठनीय सूत्रों से सजा बेहतरीन अंक।
    प्रणाम दी।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह!विभा जी ,बहुत ही खूबसूरत अंक ।

    जवाब देंहटाएं
  6. सारगर्भित शब्दों के साथ बहुत सुंदर अंक❄️🙏

    जवाब देंहटाएं
  7. सराहनीय अंक, सुंदर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...