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शनिवार, 21 नवंबर 2020

1952.. बेटी बिदाई

यथायोग्य सभी को प्रणामाशीष

दुनिया कहती है...

जिसका 'उदय'होता है,

उसका 'अस्त' होना तय है!

लेकिन 

"छठ पर्व" सिखाता है़,,

जो 'अस्त' होता है..

उसका 'उदय' तय है।

विश्व को सन्देश बिहारियों की ओर से...

कहते हैं ढ़ाई दिन के लिए धरा आँगन बेटी मायके आती हैं ... छठ के पारण के प्रसाद के संग

बेटी बिदाई

मैंने देखा था उसे 

खिड़की से बाहर तांकते हुए 

शून्य में 

आखिर उसे शून्य से ही

शुरुआत करनी होंगी 

रिश्ते-नाते 

घर-परिवार 

यहाँ तक कि जिन्दगी भी

बेटी बिदाई

तन और मन मैंने साथ लिया है, बचपन सारा यहीं छोड़ दिया है,

नही चाहिए कोई भी हिस्सा, पर खत्म भी न मेरा किस्सा।

आए जब कोई तीज त्यौहार, मुझे याद कर लेना एक बार,

मन में उठे जब कोई हिलोर, हम आ रहें बस कह देना एक बार।

बेटी बिदाई

वह अपने को संयत रखने की भरसक कोशिश कर रहा था

पर उसके आँख की कोरें बार बार भीग जाती थीं

वह रूमाल को चश्मे के कोनों के पास लाकर

चुपके से उन्हें पोंछ लेता था

वह घर के सामने बैठे तीनों दोस्तों की ओर

देखने से बच रहा था

बेटी बिदाई

विकास -'यार अविनाश... सबसे पहले घर पहुंचते ही होटल अमृतबाग चलकर बढ़िया खाना खाएंगे...

यहाँ तेरी ससुराल में खाने का मज़ा नहीं आया।' तभी पास में खड़ा अविनाश का छोटा भाई राकेश बोला -'हा यार..पनीर कुछ ठीक नहीं था...और रस मलाई में रस ही नहीं था।' और वह ही ही ही कर जोर जोर से हंसने लगा। अविनाश भी पीछे नही रहा -'अरे हम लोग अमृतबाग चलेंगे, जो खाना है खा लेना... मुझे भी यहाँ खाने में मज़ा नहीं आया..रोटियां भी गर्म नहीं थी...।'

ज्यादातर मित्र साठ के करीब हैं। कुछ साठ पार हैं। कुछ आज ही साठ के हुए हैं। कुछ साठ से दूर हैं, लेकिन रोज साठ की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। मैं तो नहीं कराया था, लेकिन कुछ लेखक लोग खुद ही षष्टिपूर्ति का आयोजन भी कराते हैं। असल में आज कोई चालीस मित्रों का जन्मदिन है, इस अवसर पर उनके लिए शुभकामनाओं सहित, साठ पर लिखी कविताएं।
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पुन: भेंट होगी...
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5 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमन..
    मायके में
    बेटी का निवास
    बस ढाई दिन का
    इसी ढाई दिन में
    समूचा परिवार बंध जाता है
    आभार..
    सादर नमन..

    जवाब देंहटाएं
  2. एक से बढ़कर एक सुंदर कविताओं का संकलन ।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. मैंने देखा था उसे

    खिड़की से बाहर तांकते हुए

    शून्य में

    आखिर उसे शून्य से ही

    शुरुआत करनी होंगी

    रिश्ते-नाते

    घर-परिवार

    यहाँ तक कि जिन्दगी भी ..।..बहुत सुंदर..अभिभूत करने वाली रचना..।

    जवाब देंहटाएं

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