पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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रविवार, 13 नवंबर 2016

485.....फिसलते हुऐ पुराने साल का हाथ छोड़ा जाता नहीं है

सादर अभिवादन
दीपावली मन गई
देव भी उठ गए कल
पर हमारे सरदार
विरम सिंह जी
जो बैठे सो बैठें ही हैं
अब तक...

आज की पसंदीदा रचनाएँ..संक्षिप्त में...


















8 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर हलचल । दिग्विजय जी अभी पचास एक दिन बचे हैं आपको नया साल याद भी आना शुरु हो गया :) आभारी है 'उलूक' सूत्र 'फिसलते हुऐ पुराने साल का हाथ छोड़ा जाता नहीं' को आज के सूत्रों में जगह देने के लिये ।

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    1. शुभ प्रभात भैय्या जी
      पचास ही दिन बचे है..
      याद तो किया ही जाएगा
      500-1000 के नोट जमा करने को भी
      इतने ही दिन बचे हैँ
      सादर

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  2. बढ़िया सूत्रों से सुसज्जित आज का अंक ! मेरी चिंता 'प्रदूषण घटायें - पर्यावरण बचाएं' को आज की हलचल में सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार दिग्विजय जी !

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  3. इस साल के बाक़ी बचे पचास दिन तो बैंकों के आगे लाइन में खड़े होने में ही गुज़रने वाले हैं. बैंकों और एटीएम के सामने खाने का टिफन और पानी की बोतल लेकर खड़े नर-नारी की लम्बी कतार देख कर किसी सैनिक अभ्यास का भ्रम हो रहा है. मोदीजी ने आने वाले साल में कुछ और नए शगूफे छोड़ने का संकेत दिया है. अब तो मन कर रहा कि बाकायदा वसीयत करके इस गम की दुनिया को अलविदा कह दिया जाए.

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    1. सत्य वचन भाई गोपेश जी
      शुभ प्रभात स्वीकार करें
      सादर

      हटाएं
  4. सुन्दर हलचल प्रस्तुति ....

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  5. बढ़िया हलचल. मेरी कविता को जगह दी. शुक्रिया.

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