जय मां हाटेशवरी....... पहाड़ों ने टूटकर रास्ता तोड़ दिया,
नदियों के वेग ने घर तेरा बहा दिया,
तबाही के इस मंजर ने तुझे अंदर तक दहला दिया,
ये सब मानव तेरी करनी है, जिसका सिला प्रकृति ने दिया।
नदियों से रास्ता तुमने छिना है,
बाढ़ लाने का न्योता तुमने ही दिया है,
पेड़ों को तुमने काट दिया है,
परवतों को काटकर समतल किया है,
नदियों, परवतों को कोसने से कुछ नहीं होगा,
प्रकृति को प्रताड़ित तुमने ही किया है।
अब पेश है आज के लिये मेरी पसंद.....
सामने ‘उलूक’ को देख कर खुजली से भर जाता है लेकिन बाद में कही और जा कर खुजलाता है
बहुत ही खतरनाक होती है कुछ खुजली
अचानक शुरू हो लेती है कहीं पर भी कभी भी
गजब की खुजली होती है और बेबात होती है
कोई किसी को नहीं बताता है कि खुजलाता है
कोई किसी को नहीं दिखाता है कि खुजलाता है
खुजली को महसूस भर कर लेता है थोड़ा सा
दिमाग में अपने ही कुछ दही जमाता है
मौके का इंतज़ार करता है खुजलाने वाला
लोहा गरम देख कर हमेशा हथौड़ा चलाता है
प्यार का इत्र
इन पन्नों में
इस ग्रन्थ के बीच
मेरे सुमित्र
चाहती छूना
मिला है जो तुमसे
प्यार का इत्र
वर्तमान भविष्य के हाथों में
नवजात शिशु की पकड़ भी
कितनी मज़बूत है
मुट्ठी में अंगुली थमाकर देखती है माँ
जकड़ लेता है
दृढ़ता से
आप सिक्का हैं महज़ यूँ ही उछलते रहिए ...
इंतहा ख़्वाब की देखेंगे पलक में रह कर,
आप आँसू की तरह आँख से ढलते रहिए.
भीड़ हर बार शिकंजे में चली आएगी,
झूठ का ज़ायक़ा हर बार बदलते रहिए.
मैं तुम्हें नापता हूँ ऐसे
पछताऊँ न इसको मैं पा के
कैसे कर लूँ मैं इस पे भरोसा
कल को बदले अगर
रंग पीले से हो जाए भूरा
एक ग़ज़ल
सभा में भीड़ है दुर्योधनों की
युधिष्ठिर को निकाला जा रहा है
इधर गायें भटकती हैं सड़क पर
उधर कुत्तों को पाला जा रहा है
सुबह अखबार में खबरों को पढ़ के
हलक़ से क्या निवाला जा रहा है?
लोग आज की दुनिया के
जो लोग सारी चमक से दूर रहते
वे ही सफल होते जीवन में
यदि सफलता ना आती जीवन में
वे अपनी करनी को कैसे असफल होने देते |
यदि जीवन बेरंग होता जीवन से मन उचट जाता
धन्यवाद।