शीशा है ज़िंदगी यारो
जैसी सूरत बनाओगे
वैसी ही तस्वीर पाओगे
जीना तो है हर हाल में
गम़ रोको हँसी की ढाल में
चुनना हो गर जीवनपथ पे
अनदेखा कर के आँसू यारों
प्यारी-सी मुस्कान उठा लो
★
बच्चे,बूढ़े,जवान,स्त्री या पुरुष हर किसी के चेहरे पर सबसे
प्यारा लगता है मुस्कान का गहना।
प्यारा लगता है मुस्कान का गहना।
तन का बहुमूल्य श्रृंगार जिससे व्यक्तित्व निखर जाता है जिसे
देखकर सुखद अनुभूति होती है।
देखकर सुखद अनुभूति होती है।
आपने कभी महसूस किया है प्रकृति की मुस्कान,
फूल,तितली,पेड़,बादल ,झरने,बारिश,धूप
हवाएँ,चिड़िया, सब मुस्कुराते है और
जगत में प्राण की संजीवनी
प्रवाहित करते हैं।
मन अगर उदास हो तो किसी मासूम-सी
मुस्कान का जादू चल ही जाता है
इस बार हमक़दम के विषय
मुस्कान का जादू
सभी रचनाकारों का
अभिवादन करते हुये
आइये पढ़ते हैं हम सब
खूबसूरत , भावपूर्ण रचनाएँ
★
आदरणीया मीना जी की दो रचना
नहीं मिलता कोई माली
यहाँ जंगल के फूलों को !
नहीं करता क्षमा यह जग
कभी दूजे की भूलों को !
मगर नन्हा सा दीपक भी
अँधेरों से तो लड़ता है,
जगत के क्रूर भावों को,
दया के दान में बदलो !!!
किसी की आँख के.....
सपने जरूर देखो,
जी भर के जी लो जीवन...
हर रंग के सुमन से,
महके तुम्हारा जीवन...
हर हाल में कदम बस
आगे बढ़ाते रहना।।
तुम मुस्कुराते रहना,
और खिलखिलाते रहना,
बनकर गुलाब अपनी
खुशबू लुटाते रहना।।
★★★★★
आदरणीया कुसुम कोठारी जी
बिन मुस्कान रूप लगे
ज्यों कागज के फूल
देखन में सुंदर लगे
बिन सौरभ निर्मूल।
होठ बिन मुस्कान के
ज्यों बिना चाँद के व्योम
सूने सूने हैं लगत
ज्यों बिना पात के द्रुम।
★★★★★
आदरणीया साधना वैद जी
यूँ तो ज़िंदगी
इतनी बेनूर, बेरंग और उबाऊ
हो गयी है कि ऐसी कोई वजह
मिलती ही नहीं कि अधरों पर
हल्की सी ही सही
कोई मुस्कान कभी आ जाए लेकिन
★★★★★★
आदरणीया आशा सक्सेना जी
मुस्कान बहुत मंहगी पड़ती
जब दिल से दुआ न निकलती
ना शब्दों का आदान प्रदान
केवल अधरों पर मुस्कान |
वह भी केवल दिखावे की
जैसी दिखाई देती वैसी है नहीं
मन से निकली आवाज नहीं
ना ही आत्मीयता का प्रभाव |
★★★★
आदरणीया अनिता सैनी जी
दर्द - ए - जिंदगी की सौगात, मिला दर्द का मुक़ाम,
ग़मों की आड़ में खिली, अश्कों की मुस्कान ||
मुहब्बत के लिबास में, दर्द -ए -ग़म से हुई पहचान,
ग़मों का सितम क्या सितम , अश्कों में खिले मुस्कान ||
★★★★★★
आदरणीया पुरुषोत्तम सिन्हा जी
की दो रचनाएँ
की दो रचनाएँ
सपना देखा था इक छोटा सा,
मुस्कुराऊँगा जीवन भर औरों की मुस्कान बनकर,
फूलों को मुरझाने ना दूंगा,
इन किसलय और कलियों में रंग भर दूंगा,
पर जानता ही नहीं था कि आते हैं पतझड़ भी,
उजड़ चाते हैं कभी बाग भी खिल जाने से पहले,
हम सपने ही रहे देखते, इस सच को कब जान सके।
★★★★★★★
हँसिए-हँसाइए, रूठिए मनाइए,
गाँठ सब खोलकर, जरा सा मुस्कुराइए,
गुदगुदाइए जरा खुद को भूल जाइए,
भरसक यूँ ही कभी, मन को भी सहलाइए,
जीने के ये चंद बहाने सीख जाइए......
★★★★★★★
आदरणीया अभिलाषा जी
मुस्कान"कितना प्यारा है ये शब्द।
मनुष्य के व्यवहार का अनिवार्य अंग है
' मुस्कान'।मुस्कान के कई रूप होते हैं।
अलग-अलग अवसरों पर मुस्कान भी
अलग-अलग ही होती है।
सबसे मासूम और निश्छल मुस्कान होती
है,छोटे बच्चों की,एक पल में स्वर्गिक आनन्द
की प्राप्ति करा देती है।सारी थकान और
सारी परेशानी इस मुस्कान में तिरोहित हो
जाती है। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं और
बाहरी दुनिया से उनका सरोकार होता है,
★★★★★★
आदरणीया रेणु जी
लौट आया है दोनों संग -
वो भुला सा बचपन मेरा ;
निर्मल मुस्कान से चहक उठा -
ये सूना सा आँगन मेरा ;
एक शारदा - एक लक्ष्मी सी -
पा मेरी ममता इतराई है !
★★★★★★★
आदरणीय अनुराधा चौहान जी
एक रात एक कली खिली
भोर हुई तो फूल बनी
यौवन की दहलीज पर आकर
किसी के घर का नूर बनी
बनी किसी के गले का हार
चेहरे की मुस्कान बनी
भूल गई दर्द वो अपना
सबके दर्द की दवा बनी
★★★★★
चलते-चलते आदरणीय शशि जी
सोचता हूँ कि " मुस्कुराहट "और " प्रेम " में कितना प्रगाढ़ सम्बंध है ।
एक दूसरे के पूरक हैं ये दोनों , बिल्कुल दीया और बाती की तरह,
एक के बिना दूसरे का अस्तित्व कहाँ। यदि चोट " दिल " पर लगती है,
तो दर्द " मुस्कान " को होता है। अतः दिल दुरुस्त रहे ऐसा कोई " प्यार " चाहिए। अन्यथा मन का दीपक बुझा नहीं कि मुस्कान गायब , फिर कृतिमता मिलेगी , बनावट और सजावट मिलेगा ।
लेकिन मन की पुकार कुछ यूँ होगी-
★
आप के द्वारा सृजित आज यह अंक
आपको कैसा लगा?
कृपया अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया
अवश्य प्रेषित करें।
हमक़दम का अगला विषय जानने के लिए
कल का अंक देखना न भूलें।
★
हर क्षण बदलता है
कैनवास जीवन का
कोरे पन्नों में रंग
मुस्कान का छिड़ककर
तस्वीरों को निखार दीजिए



























