निवेदन।


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शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

1267....जीवन का अनमोल अवार्ड

नववर्ष की मेरी पहली प्रस्तुति पर
आप सभी सुधिजनों का
सादर अभिनन्दन

नवतिथि का स्वागत सहर्ष
नव आस ले आया है वर्ष
सबक लेकर विगत से फिर
पग की हर बाधा से लड़कर 
जीवन में सुख संचार कर लो
हर क्षण से खुलकर प्यार कर लो
★
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
चलिए आज की रचनाएँ पढ़ते हैं
★
आदरणीय प्रकाश जी की लेखनी से

बाबुजी के डाँट में,
घर छोड़े के ख्याल में,
सोचला के बाद
घर जाए में
बड़ा निक लागेला।

माई के दुलार में,
नोक-झोंक कईला से,
रूठला के बाद
'आँचल के छाँव' जाए में
बड़ा निक लागेला हो
बड़ा निक लागेला हो
बड़ा निक लागेला...
★★★★★
आदरणीय रवींद्र जी

वक़्त के गुलदान में 
अंकुरित हुआ है 
नन्हा-सा नया साल 
आशाओं के साथ 
नये ख़्वाबों का 
पल्लवन होने दो।  
आदरणीया दीपा जी
इसमें छुपा
रहस्य अपार है
ना होगी गर वेदना
ना होगा
सुख-दुख का 
आभास।
विरह-मिलन 
हैं जैसे दिन-रात।
★★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम जी

उम्र की प्रवाह में, सूनी सी राह में,

ढ़लती सी हर सांझ में, ढूंढ लेना मुझे

एकाकीपन के, विपिन प्रांतर में,

अकेली राह में, संग चलता मिलूंगा,

फूल हूँ, रंग सा, खिलता मिलूंगा!
★★★★★
आदरणीय संजय जी

बेटी ने बहू बनकर
बी.ए वाली बात दोहरायी
सुनकर उसकी बातें उसकी सास गुर्राई 
अगर आगे ही पढना था
तो पढ़ती 'अपने घर '
बहू है हमारी अब सेवा कर ,
★★★★★
आदरणीया पम्मी जी

सफ़्हो में ही कहीं न कहीं सिमटे रहेंगे
सफर के बाद भी यही कही बिखरे रहेंगे

सिफ़त ज़ीस्त का  हो समझना

हमारी लफ़्ज़ों की हरारत इनमें  ही निखरे रहेंगे
★★★★★★
और चलते-चलते पढ़िए
आदरणीया कामिनी जी की रचना
जीवन अनमोल"अवार्ड"


मुझे ऐसा लगा जैसे इस जीवन का सबसे बड़ा अवॉर्ड दे दिया हो मेरी बेटी ने मुझे। ईश्वर ने मुझे जो ये मनुज तन दिया है उससे मैंने कुछ तो ऐसा काम किया जो मेरी बेटी ने मुझे इतना बड़ा सम्मान दिया। सार्थक हो गया मेरा जीवन। मुझे वो सारी परेशानियां ,सारी कठिनाइयाँ ,लोगो की गालियाँ सब याद आने लगी लेकिन वे मुझे तकलीफ नहीं दे रही थी बल्कि एक सुखद एहसास करा रही थी। मैं ईश्वर को धन्यवाद देने लगी -हे प्रभु अगर आप ने मुझे उस वक़्त वो शक्ति ना दी होती तो शायद मैं उस वक़्त एक दृढ निश्चय के साथ एक कठोर फैसला नहीं ले पाई  होती और आज मेरी शालू उस उपहार से वंचित रह जाती जो उसके जीवन की  सबसे बड़ी ख़ुशी है। 



★★★★★
आज की प्रस्तुति कैसी लगी?
आप सबों की बहुमूल्य प्रतिक्रिया
की प्रतीक्षा रहती है।

हमक़दम के विषय के लिए


★
कल का अंक पढ़ना न भूले,
कल की खास प्रस्तुति लेकर आ रही हैं
विभा दी
आज के लिए आज्ञा दें।
★
खुशी के क्षण आमोद हर्ष
हर त्योहार पर तर्क-वितर्क
तिथि,प्रश्न के जाल में उलझा

सकपकाया खड़ा है नया वर्ष








गुरुवार, 3 जनवरी 2019

1266....दर्द का एहसास है, फिर भी तराने गा रहा हूँ...

सादर अभिवादन। 

हैं 
ख़ुश 
क़दम 
रखकर 
नये साल में 
तीसरा दिन है 
ख़ुशी हर हाल में।  



मेरी फ़ोटो

इक नयी उम्मीद का, सपना संजोए आ रहा हूँ,
दर्द का एहसास है, फिर भी तराने गा रहा हूँ.

 ज़िन्दगी में खो दिया जो, क्यूँ करूं उसका हिसाब,
आज अपने हाथ से, तकदीर लिखने जा रहा हूँ.

मैं कब कहता हूँ.......बशीर बद्र


 

मैं हर लम्हे मे सदियाँ देखता हूँ
तुम्हारे साथ एक लम्हा बहुत है

मेरा दिल बारिशों मे फूल जैसा
ये बच्चा रात मे रोता बहुत है

जीवन अनसुलझी पहेली….कुसुम कोठारी 


                           

जर्द पत्तों का शाख से बिछड़ना
तिनके के नशेमनो  का उजडना।

ख्वाहिशों का रोज सजना बिखरना
सदियों से चला आ रहा ये सितम।





तलबपरस्त दुनिया में मक्कारी है, गद्दारी है 
रिश्तों में कुछ भी ऐसा नहीं, जिसे वफ़ा कहें। 

ज़मीं पर हो गई है, ख़ुदाओं की भरमार 
ऐ ख़ुदा ! बता तो सही, अब तुझे क्या कहें। 

                          
बच्चे 
नंगे ही 
भले-चंगे लगते है 
गरीब के 


हम-क़दम का नया विषय
........


आज बस यहीं तक। 
फिर मिलेंगे अगले गुरुवार। 
शुक्रवारीय प्रस्तुति - आदरणीया श्वेता सिन्हा जी

रवीन्द्र सिंह यादव 

बुधवार, 2 जनवरी 2019

1265..नींद से जागी आँखों में सपनीली,याथार्थ की कोई कहानियों..

।।उषा स्वस्ति।।

प्रभात-श्रृंग से घड़े सुवर्ण के उँड़ेलती;
रँगी हुई घटा में भानु को उछाल खेलती;
तुषार-जाल में सहस्र हेम-दीप बालती
समुद्र की तरंग में हिरण्य-धूलि डालती
सुनील चीर को सुवर्ण-बीच बोरती हुई,
धरा के ताल-ताल में उसे निचोड़ती हुई;
उषा के हाथ की विभा लुटा रहीं जवानियाँ..
                                              दिनकर
नींद से जागी आँखों में सपनीली,याथार्थ की कोई कहानियों के साथ आज की प्रस्तुति पर नजरें डालें..✍
☸☸

जनम जनम के अनुबंधों पर
हावी हो गई जग की रीत !
फिर सपनों के ताजमहल की
कब्र में सोई मेरी प्रीत !!!
मूरत तेरी गढ़ते जाना
पल-पल सूली चढ़ते जाना..

☸☸

अभिनन्दन
हर्षित जन गण
बीति बिसार
आगत का स्वागत
वर्ष नवल
समय अविरल
सत्य अटल
हो कर गतिमान..

☸☸


स्वप्न मेरे ...
हूबहू कल सा ही दिन था जो खिला
भोर बोझिल बदहवास सी मिली
धूप जैसी कल थी वैसी ही मिली
रात का आँचल भी तक़रीबन वही
पर नयी तारीख़ सबको थी मिली
सोचता हूँ क्यों रखूँ कोई गिला ...

☸☸

सुप्रिया सिंह जी ,की आध्यात्मिक ज्ञान...
कृपा से तेरी जग में तर गए कई अधम 
हर हर हर महादेव डम डम डमरू के स्वर 
कर रहे प्रसार जग में जीवन का प्रतिक्षण 
सत चित आनंद की त्रिवेणी है त्रिशूल में

☸☸

तन्हाई में बिखरी खुशबू ए हिना तेरी है
वीरान खामोशियों से आती सदा तेरी है
टपक टपक कर भरता गया दामन मेरा
फिर भी खुशियों की माँग रहे दुआ तेरी है
.......
हम-क़दम का नया विषय

यहाँ देखिए
........

☸☸
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह'तृप्ति.. ✍

मंगलवार, 1 जनवरी 2019

1264....इस नव-वर्ष में.....

जय मां हाटेशवरी......
आप सभी को पांच लिंकों का आनंद परिवार
की ओर से....श
नूतन वर्ष 2019 की शुभकामनाएं......
इस नव-वर्ष में.....
(वृद्धों को)
रह स्वस्थ आप सौ शरदों को जीते जाएँ,
आशीष और उत्साह आपसे हम पाएँ।

(प्रौढ़ों को)
यह निर्मल जल की, कमल, किरन की रुत है।
जो भोग सके, इसमें आनन्द बहुत है।

(युवकों को)
यह शीत, प्रीति का वक्त, मुबारक तुमको,
हो गर्म नसों में रक्त मुबारक तुमको।

(नवयुवकों को)
तुमने जीवन के जो सुख स्वप्न बनाए,
इस वरद शरद में वे सब सच हो जाएँ।

(बालकों को)
यह स्वस्थ शरद ऋतु है, आनंद मनाओ।
है उम्र तुम्हारी, खेलो, कूदो, खाओ। ---हरिवंशराय बच्चन
पांच लिंकों का आनंद पर यूं तो प्रति दिन सब कुछ ही  नया होता है.......
आज तो नया वर्ष है इस लिये.....
आज आनंद भी कुछ  नया है......
नन्ही सी जान हूँ मैं
माँ तेरा ही अंश
तेरी ही पहचान हूँ मैं

ना देख मुझे यूँ घृणित नजरों से
तेरे प्यार का ही परिणाम हूँ मैं
ना फैंक मुझे यूँ तू कूड़े में

नहीं करुँगी परेशान तुझे मैं
रहने दे आँचल की छाँव में
मत मार मुझे तू कोख में

सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने ।
लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ॥
 .        जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, पुष्प देता है, संवेदना देता है और हमें दया भाव सिखाता है उसी तरह यह नव वर्ष हमें हर पल ज्ञान दे और हमारा हर दिन,
हर पल मंगलमय हो ।

हमारे लिए आज का दिन बेहद ख़ास होता है... सुबह से पहले तारों भरे आसमान को निहारना... चमकते चांद को देखना कितना भला लगता है... अल सुबह रात की स्याही को दिन
के उजाले में बदलते देखना.. और इसी तरह भरी दोपहरी में धूप में बैठकर अपनी पसंद की किताब पढ़ना... फिर शाम को डूबते सूरज को देखना... ये सूरज भी कितने गुज़रे
दिनों की याद दिला जाता है... सुरमई शाम के बाद फिर तारों भरी रात आ जाएगी... नये साल के जश्न की रात... दिलकश संगीत होगा और संगीत पर थिरकती ख़ुशियां... 

रहे बरसते सुख के फूल
प्रिय के आंगन ऊपर से।
रहे सदा खुशहाल आप
यही कामना ईश्वर से।।

जब कभी
कान में फुसफुसाकर
कहती है ठंड
कि, आज बहुत ठंड है

इन दिनों
गिर रही है बर्फ
दौड़ रही है शीत लहर
जानता हूँ
तुम्हारी तासीर
बहुत गरम है

सुमित्रा ने कुछ सोचकर कर एक फ़ोटो पोस्ट किया 
जिसमें वह एक प्यारी सी लड़की के साथ खड़ी थी| उस लड़की की आँखें बहुत सुन्दर थीं|
'बहुत प्यारी बच्ची है दीदी, ये कौन है?'
'मेरी छोटी बहन जो देख नहीं सकती| समय से पूर्व जन्म लेने के कारण बहुत कमजोर थी तो इसे इन्क्युबेटर में रखा गया था| नर्स ने बिना आँखों पर रूई रखे उच्च पावर
का बल्ब जलाकर सेंक दे दिया जिससे इसकी आँखों की रौशनी छिन गई| यह बात तब पता चली जब वह आवाज होने पर अपनी प्रतिक्रिया तो देती थी किन्तु नजरें नहीं मोड़ती| यह पता चलने पर हमारे परिवार पर जो वज्रपात हुआ होगा वह तो तुम समझ सकते हो न तुषार|
मैंने फेसबुक पर यह तो नहीं लिखा कि यह सिनेमा 
देखकर मुझे मजा आया|'


मैं भारत हूँ , न धर्म कोई
हों द्वेषविहीन, न मर्म कोई
हो नये वर्ष का धर्म यही
हाथों में तिरंगा ले-लेकर
बन नया वर्ष फहराता हूँ।

नये वर्ष का नया सिपाही,गीत अनोखा गाता हूँ... 
नये वर्ष का नया सिपाही,गीत अनोखा गाता हूँ...        


इस नव-वर्ष में.....
केवल 2018 की जगह अब,
2019 हुआ  है,
बताओ, क्या कुछ और बदलेगा?

जहां सुरक्षित नहीं,  4 वर्ष की बेटी भी
सुनाई देती हैं अभी भी, चीखें निर्भया, गुड़िया की,
क्या बेटियां भय मुक्त निकल पाएगी बाहर?
इस नव-वर्ष में.....

क्या नव-विवाहिताएं घरों में सुरक्षित रह पाएंगी?
क्या दहेज के लोभियों की भूख मिट जाएगी?
क्या एक मृत  बेटी के पिता को न्याय  मिलेगा?
इस नव-वर्ष में....
........
हम-क़दम का बावनवाँ अंक...
विषय...
आशियाना
उदाहरणः
आओ देखो
ढूँढ लिया है मैंने
हम दोनों के लिये
एक छोटा सा आशियाना
चलो इस घर में आकर रहें
सारी दुनियावी ज़हमतों से दूर
सारी दुनियावी रहमतों से दूर !
प्रेम को ओढें
प्रेम को बिछाएं
प्रेम को पियें
प्रेम को ही जियें
रचनाकार साधना दीदी
अंतिम तिथिः 05 जनवरी 2019
प्रकाशन तिथिः 07 जनवरी 2019
धन्यवाद।
















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