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शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

4834 ...एक आजाद गुलाम सोच ले, कर ले मनन, लगा ले ध्यान।।

 सादर अभिवादन 


अब सिर्फ कहानी ही नहीं कविता भी
सादर आमंत्रित है
अगला अंक 16 अगस्त 26 को
इसके लिए रचना प्रेषण तिथि 
14 अगस्त 26 आज अंतिम दिन
नया विषय है 
आजादी, स्वतंत्रता, उड़ान
पिछला अंक देखिए

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एक ख्याल आजाद गुलाम
एक गुलाम आजाद 
एक आजाद गुलाम
सोच ले
कर ले मनन
लगा ले ध्यान

लिखना चाहे
तो लिख
भी ले
एक कलाम

कल के दिन
आने वाली

एक दिन
की आजादी
के जश्न का
आज की शाम

   





आसमाँ वही है, वही है धरती  
मौसम के मायने बदल क्यों जाते हैं  
जिसको पाने की जिद में उम्र गुजारी  
उसको पाकर भी हाथ खाली रह जाते हैं  





‘जो हुआ, अच्छा हुआ’ कहकर मैंने माँ को सारी बात बताई और कहा, अब आप मेरे  विवाह की चिंता न करें। सलोनी ने अलका के सामने खड़ी होकर एक प्यारी सी मुस्कान के साथ देखा। आज मैं हर तरह से सबल हूँ, मैंने अपने भीतर के हर भय का सामना किया है।अब कभी किसी भी बाधा से घबराने वाली नहीं हूँ। मेरे जीवन में कई उतार-चढ़ाव आये पर मैं सदा डटकर खड़ी रही और अपने आप से भी ऊपर उठकर उनका सामना किया है।




वे कहती थीं,
रूढ़ियाँ गढ़ने वाली
अपनी ही बनाई अँधेरी जगह में
खड़ा था।
बस।
मैंने उसे
कल्पना नहीं कहा।




कल दिल्ली के आंदोलन के बच्चे दिख रहे थे सभी को,
आज झारखंड के बच्चे अकेले पार कर रहे शमशीर को।

जो 'दीप' बनकर रोशनी बाँटने का ढोंग रचाते रहे,
वो कैमरों की चमक में ही तलाशते हैं अपनी ताबीर को।


सादर समर्पित
वंदन
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