सादर
अभिवादन।
गुरुवारीय प्रस्तुति में
आपका
स्वागत
है।
आँकड़े कहते हैं
केन्द्र सरकार
साल में सवा लाख
नौकरियों के विज्ञापन
प्रकाशित करती है
2.5 से 3 करोड़
आवेदन मिलते हैं
यदि प्रत्येक परीक्षार्थी
न्यूनतम 100 रूपये
आवेदन शुल्क
के साथ आवेदन करता है
तो....
सरकार को कितनी रकम मिली?
-रवीन्द्र
आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-

लोक तंत्र को कर रहे, नेता आज हलाल,
लोक
खड़ा
हो
देखता,
करता
नहीं
मलाल;
करता
नहीं
मलाल,
पेट
की
चिंता
भारी
,
छूट
चुके
सब
काम,
लोक
की
यह
लाचारी;
जहां फुटपाथ बिछौना
आसमां
छत
है
वह जिन्दगी की
क्या
बात
करे।
काश
हमारे
भी
आँगन
में
सूर्य
मुखी
खिलता
तन
की
थकन
मिटाने
को
कोई
बिछौना
होता
पांव
के
नीचे
धरती
सर
पर
छत
अम्बर
का
किस्मत
में
सूखी
रोटी
नमक
प्याज
ही
लिखता।

अनायास ही खुल गए स्मृति
के बंद किवाड़
मंदिर जाने
के मार्ग
में पड़ता
था एक घर
टूटी-फूटी
ईंटों से झांकता कुटिया का कोना
ढिबरी की रोशनी में मंजीरों
का स्वर
मधुर
एक साधु
अपने में मगन गाता रहता
भजन

झूठ कब पायदार है इतना,
दो क़दम चल के गिर ही जाना है।
ज़िन्दगी दायमी नहीं प्यारे,
एक दिन मौत सबको आना है।
पहनकर बैठी लाल चुनरिया
और लाल रंग की चोली।
पास मेरे तू आजा साजन,
नव दुल्हनियाँ बोली।
*****
हम-क़दम का नया विषय
यहाँ देखिए
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगले मंगलवार।
रवीन्द्र सिंह यादव