सादर अभिवादन
आज आंवला नवमी है
इसे अक्षय नवमी भी कहते है
आंवला नवमी, जिसे अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है,
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है।
इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है, जिसे भगवान विष्णु का निवास स्थान माना जाता है।
माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है।
खुद का खुद
के लिये
खुद के ही
सामने
और
रास्ता
दिखना
शुरु हो
जाता है
तेज रोशनी
से चौधिया
के अंधी
हो गई
आँखो
को भी ।
अग्नि की ज्वाला सी चंचल
गंगा की धारा सी निर्मल
राम प्राण हो जहाँ रमे हों
अंतस्तल वह तुममें देखा
अनुभव के पन्नों में तोले
शब्दों के वो कितने जोड़े
जो मुझको आशीष हुए हैं
उन मंत्रों में तुमको देखा
छेड़ते तुम न गर निगाहों से
मन मेरा मनचला नहीं होता
होती हर शै पे मिल्कियत कैसे
तू मेरा गर हुआ नहीं होता
कहती है माँ, कहूँ मैं सच हरदम
क्या करूँ, हौसला नहीं होता
फिर हम काम पर जायेंगे
तुम्हे साड़ी खरीदना हैं
लहंगेवाला
दिनभर हाथ-पैर चलायेंगे
तब न जुटा पाएंगे हम कुछ रुपए..
आज बस
सादर वंदन
