सादर अभिवादन
वंदन
जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!
जो लोग रोते नहीं हैं बिखरने लगते हैं
बहुत जरूरी है नम, ख़ाक की जड़त के लिए
ये और बात की फिर खुल गए सभी के लिए
तू दिल के बंद किवाड़ों पर पहली दस्तक था
आईने ने जब से ठुकराया मुझे
हर कोई पुतला नज़र आया मुझे।
रौशनी ने कर दिया था बदगुमा,
शाम तक सूरज ने भरमाया मुझे।
ऊबती सुबहों के सच मालूम था,
रात भर ख़्वाबों ने बहलाया मुझे।
मैं बुरा था, जब तलक ज़िंदा रहा
'अच्छा था ' ये कहके दफ़नाया मुझे
आख़िरी कुछ नहीं होता,
आख़िरकार होता है,
एक लंबे सफ़र में ,
मेरा तुन्हारा बस
किरदार होता है
पहले भी,
मेरे बाद भी रहेगा,,
मैं मर रही हूँ
मैं मर रही हूँ हौले हौले
एक पोशीदा मौत
इस बार जब मैं लौटी
वियतनाम से
छोड़ आयी अपनी आँखें वहाँ
जैसे छोड़ दिए थे
जापान में अपने कान
और सारनाथ में जिह्वा
क्या करुँगी इन सबका
कहो सखी
तुम क्यों न गई
देहरी के उस पार?
बुद्ध गए हैं जहाँ
त्याग के यह संसार
मुक्ति की चाह में!
आज बस
फिर आना है मुझे
