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मंगलवार, 21 सितंबर 2021

3158 ..हमारी तरफ बेटी से पांव नहीं झुवाते !

सादर अभिवादन..
विदा हो गए
श्री गणेश जी
फिर आने के लिए
पूरे जोर शोर से
चलिए रचनओं की ओर
..


अंगुली पकड़ चलना सिखलाया  
साध रखूँ कदमों को बतलाया  
सफर बीच हों कितने भी काँटे  
तेरा आशीष लगे हमसाया  
जीवन यात्रा में  
तेरी वीणा बन जाना है !  


यह कहानी वाकई कुछ अलग सा ही है


विजय बाबू ने गहरी सांस ली और धाराप्रवाह अठ्ठारह सालों का सारा विवरण मिनी को सुना दिया! कथा के आज तक वर्तमान तक आते-आते विजय बाबू का गला रुंध गया था ! कमरे में पूरी तरह खामोशी फैली हुई थी ! चारों प्राणियों की आँखों से अविरल अश्रु धारा बहे चली जा रही थी ! पता नहीं कितनी देर ऐसे ही सब बैठे रहे ! फिर मिनी उठी और शम्भू काका के पैरों में झुक गई ! शभ्भु अचकचा कर उठ खड़ा हुआ, बोला ना बिटिया ना ! हमारी तरफ बेटी से पांव नहीं झुवाते !'' फिर मिनी के सर पर हाथ फेरते हुए असंख्य आशीषें दे डालीं !




ले
शक्ति
आसक्ति
सीमा पर
फौजी सैनिक
होते हैं कुर्बान
हमारे अभिमान ।।




मुहाने पर जा कर
नदी भूल जाती है
समस्त अहंकार,
सुदूर पीछे छूट जाते हैं,




घुसी आवाज़ों के पेंच को कान से खींचकर निकालते हुए, 
आँखें तरेर के और मूँछों से गुर्राते हुए सक्सेना साब बोले-

अबे हट सुरेशवा के चाचा! हम बुलाए हैं। हमरे बहुत खास हैं।

सक्सेना ग्रुप ने चैन की सांस ली। आखिर आदरणीय सक्सेना जी ने 
गुल हुई बत्ती की मरम्मत जो करा दी है...
...
आज बस इतना ही
सादर

 

9 टिप्‍पणियां:

  1. पठनीय सूत्रों से सजी
    सराहनीय प्रस्तुति दी।

    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    जवाब देंहटाएं
  3. आदरणीय दीदी,हर सृजन सुंदर और पठनीय, मेरे नव प्रयास को आपने यहां स्थान देकर मान किया,किसके लिए बहुत शुक्रगुजार हूं । बहुत बहुत शुभकामनाएं और बधाई 🙏💐 ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बढ़िया हलचल । सारे लिंक्स बेहतरीन।

    जवाब देंहटाएं
  5. रचना को सम्मिलित कर मान देने हेतु अनेकानेक धन्यवाद ! आपसी स्नेह ऐसे ही बना रहे

    जवाब देंहटाएं
  6. आपके साथ और सहयोग के लिए बहुत धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

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