पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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शनिवार, 18 जून 2016

337 .... पैसा




सभी को यथायोग्य
प्रणाशीष

पैसे के नशे में चूर से कभी मुलाकात हो तो दूर से सलाम




शायद मासूमियत घुट जाती है हमारी सोच सोच के यही,
जीना होता है अलग, कहानियों की तरह तो बिलकुल भी नहीं ।
शायद कहानियों में ही मोहब्बत होती है सिर्फ; जिंदगी में नहीं ।

शायद ये कुछेक पड़ावों की कहानियाँ सिर्फ यादें बन रह जाएँगी ।
शायद जिंदगी की ठीक-ठाक कहानी कभी न बन पायेगी ।
शायद आज बारिश होगी रिमझिम, धरती की प्यास बुझाने 




अभी, कुछ माह पहले, अखिल भारतीय लघुकथा लेखक सम्मेलन में भाग लेने के लिए हम सब लघुकथाकार 'मिन्नी कहानी' संस्था द्वारा कोटकपूरा पंजाब में आमंत्रित किये गये थे। वहाँ हम पति-पत्नी दोनों गये थे। उस सम्मेलन का समूचा वातावरण इतना अपनत्वभरा और आकर्षक था कि आज भी भुलाए नहीं भूलता। यही कारण रहा कि जैसे ही अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा- मंच ,पटना के तत्वावधान में आयोजित २८वें लघुकथा सम्मेलन के लिए आमन्त्रण मिला तो पटना जाने का भी इरादा पतिदेव को बता दिया। वह तैयार तो हो गये, लेकिन तारीख़ तय होते ही उन्होंने बताया कि वह साथ नहीं जा पायेंगे, उन्हें उन दिनों में बहुत जरूरी काम रहेंगे






ऐसे को
वैसे को
कौन पूछता है
ऐसे में या वैसे  में किसकी रूचि है ?
पैसा है जिसके पास उसकी बड़ी गरिमा हैं
पैसा है जिसके पास उसकी चहुँ ओर महिमा है






ग़म सलामत है तो पीते ही रहेंगे लेकिन,
पहले मैख़ाने की हालत सम्भाले जायें|

ख़ाली वक़्तों में कहीं बैठ के रोलें यारो,
फ़ुर्सतें हैं तो समन्दर ही खगांले जायें|





कल   रात   मुझे  नींद  बहुत  अच्छी  आई,
किसी    रूठे    हुए    के    मान    जाने    से।

तुम  पर  शक  की  कोई  गुंजाईश न रहेगी,
तुम   पास   तो   आओ   किसी   बहाने   से।






आप धोका दे कर क्षणिक मात्र का सुख तो भोग सकते हो लेकिन 
किसी असहाय का जीवन छीने का हक़ आपको कदापि नहीं l 
हो सकता है धोका देने के बाद आप जीवन भर पश्चाताप भी करें 
लेकिन आपने किसी का विश्वास तोड़ दिया जो अब
 शायद कोई भगवान का फरिश्ता ही दोबारा जोड़ पाये



फिर मिलेंगे ...... तब तक के लिए
आखरी सलाम


विभा रानी श्रीवास्तव



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