पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद

समर्थक

सोमवार, 28 मार्च 2016

255...सोने का मंगलसूत्र, कड़ी-कड़ी जोड़ा

सादर अभिवादन स्वीकारें
रात तो गुज़र ही जाती है
दिन गुज़रते भी देर नहीं लगती
बात नहीं न करनी है यहाँ..

आज की चयनित रचनाओं की ओर कदम रखें..

काश कि आस-पास उलझे हुये
यूं बेवजह लड़ते हुये 
लोगों को भी मिटा पाता 
किसी इरेज़र से 
और उगा देता वहाँ 
गुलमोहर और अमलताश के कई सारे पेड़....

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी में....कल्पना रामानी
जलधि जल में, निर्झरों पर, पर्वतों पर, खाइयों में
पूर्णिमा की चंद्र किरणें, रच रहीं सुखदाई होली।

चार दिन की चाँदनी सब, सौंपकर उपहार हमको
‘कल्पना’ आएगी फिर से, चार दिन हरजाई होली।

कौशल में....शालिनी कौशिक
दुखाऊँ दिल किसी का मैं -न कोशिश ये कभी करना ,
बहाऊँ आंसूं उसके मैं -न कोशिश ये कभी करना.

नहीं ला सकते हो जब तुम किसी के जीवन में सुख चैन ,
करूँ महरूम फ़रहत से-न कोशिश ये कभी करना .

मेरे गीत में....सतीश सक्सेना
कुछ श्राप भी दुनियां में आशीर्वाद हो गए,
जब भी तपाया आग ने , फौलाद हो गए !

यह राह खतरनाक है, सोंचा ही नहीं था ,
हम जैसे सख्तजान भी, बरबाद हो गए !

सुधिनामा में....साधना वैद
तुम न आये
बैरी चाँद सताए
कुछ न भाये !

ये है आज की शार्षक रचना का अंश

आपकी सहेली में....ज्याति देहलीवाल
दोस्तों, हमारे यहां कई त्योहारों में उखाने बोलने की प्रथा है। अभी राजस्थानी समाज में गणगौर का त्योहार मनाया जा रहा है। इस त्योहार में भी उखाने बोले जाते है। अत: पेश है हिंदी उखाने। यहां पर जो रिक्त स्थान दिए हुए है उन जगहों पर पति या पत्नी का नाम लेना होता है और पहली लाइन हम दो बार बोल सकते है। जैसेः...
सोने का मंगलसुत्र, कड़ी-कड़ी जोड़ा,

--- के लिए, मैने माता-पिता का घर छोडा।

आज्ञा दें यशोदा को

पर वो कौन है....







4 टिप्‍पणियां:

  1. यशोदा जी, मेरी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शामिल करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज की प्रस्तुति में सुन्दर सूत्रों का चयन किया गया है ! मेरी रचना 'आया बसंत छाया बसंत' को भी सम्मिलित करने के लिये आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार यशोदा जी !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति हेतु आभार!
    सभी को रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...