नमस्कार !
पिछले सोमवार को मैंने जरा सी मिर्ची और धनिया पत्ती क्या बढ़ाई कि न जाने किस किस चीज़ की मांग होने लगी ..... ..... कोई बात नहीं हम भी पुराने खिलाड़ी हैं निराश नहीं करेंगे .... आप एक मांगेंगे हम दो देंगे .... इसलिए आज पाँच लिंक का कोई बंधन नहीं .... आज की चर्चा उन्मुक्त रूप से आप सबके सम्मुख हाज़िर करने की इजाज़त चाहती हूँ . वैसे आप इजाज़त दें या न दें मैंने तो वही करना है न जो मेरा मन कहे , तो आज मेरे मन की ही पढ़िए |
आज विश्व योग दिवस भी है तो एक संदेश
व्यायामात् लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखं।
आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥
अर्थात्
"व्यायाम से स्वास्थ्य, लम्बी आयु, बल और सुख की प्राप्ति होती है। निरोगी होना परम भाग्य है और स्वास्थ्य से अन्य सभी कार्य सिद्ध होते हैं।"
कहते हैं" स्वस्थ तन में स्वस्थ मन का वास होता है।"
"स्वास्थ्य सबसे बेशकीमती संपत्ति है।"
योग इन सभी शब्दांशों का निचोड़ है।
योग का अर्थ है जुड़ना। मन को वश में करना और वृत्तियों से मुक्त होना योग है।
योग शरीर में सूक्ष्म प्राण शक्ति को विस्तार देने की साधना है। स्वस्थ जीवन शैली का आधार योग को माना जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। कोरोना काल में योग की महत्ता की परीक्षा हो चुकी है।तो थोड़ा अपनी सेहत का ख्याल रखें , योग करें , प्राणायाम करें , और स्वस्थ रहें .....
यूँ तो हिंदी ब्लॉग जगत इतना विशाल है कि कुछ ब्लॉगर्स के नाम चयन करना बहुत मुश्किल काम है फिर भी मैं ब्लॉग्स के समंदर से कुछ ब्लॉगर्स का परिचय कराने जा रही हूँ ..... कुछ वो जो २००६ - २००७ से ब्लॉग लिख रहे हैं और अपने ब्लॉग पर नियमित पोस्ट डाल रहे हैं ..... और कुछ उन ब्लॉगर्स को लिया है जिन्होंने कुछ समय बाद अपना ब्लॉग शुरू किया लेकिन उनकी लिखने की क्षमता से और लेखन शैली से मन प्रभावित हो रहा है ... आइये मिलते हैं आज के कुछ मेरी पसंद के ब्लॉगर्स से ...... सच कहूँ तो बहुत लम्बी लिस्ट है मेरी |आज जिनसे परिचय करा रही हूँ उनके अतिरिक्त और भी बहुत नाम हैं जिनका परिचय ऐसे ही कराती रहूँगी... समझिएगा ये प्रथम कड़ी है ..... ऐसी कड़ियाँ और भी मिल सकतीं हैं ...... यदि आपको ये कड़ी पसंद आई तो ..... मेरा भी तो ऐसी चर्चा करने का प्रथम ही प्रयास है .....
सबसे पहले परिचय करा रही हूँ दिगंबर नासवा जी से , जिनसे आपमें से बहुत लोग अच्छी तरह परिचित हैं ...... यूँ तो गीत , अतुकांत रचनाएँ भी लिखी हैं लेकिन ग़ज़लों के शहंशाह कहें तो अतिश्योक्ति न होगी .... इन्होने अपना ब्लॉग २००६ में प्रारंभ किया था ...
२००६ में अपने देश से दूर शायद अकेले रहते हुए जो महसूस हुआ उसको इन्होने बहुत सहजता से वर्णित किया है .....
दिया जलेगा या बाती या तेल जलेगा
या मेरा दिल कोने मैं चुपचाप जलेगा
*****************************************
जून २०२१ की नयी पोस्ट
कश्तियाँ डूबीं अनेकों फिर भी घबराया नहीं ...
प्रेम हो, शृंगार, मस्ती, या विरह की बात हो,
कौन सा है रंग जिसको प्रेम ने गाया नहीं.
स्वर्ग
विवाह के समय माँ अपनी बेटी को सीख देती है कि बेटी तू जिस घर में जा रही है, उसे स्वर्ग बना देना। विवाह की बेला तो वैसे ही सपनों में तैरने की बेला होती है, बेटी भी मना नहीं करती है। अब नये घर के काम काज भी ढेर सारे होते हैं, नये सम्बन्धी, नयी खरीददारी, ढेर सारी बातें मायके की, ससुराल की। कई तथ्य जो कुलबुला रहे होते हैं, उनको निष्पत्ति मिल जाने तक नवविवाहिता को कहाँ विश्राम। इस आपाधापी में बेटी को माँ की शिक्षा याद ही नहीं रहती है।
कुशल भगवन, सर्वहित प्रेरक बने हो,
तम हृदय में, प्रेम के दीपक जला दो ।
तव प्रतिष्ठा अनवरत होवे प्रचारित,
भावरस में ज्ञानपूरित स्वर मिला दो
***********************************
एक और चर्चित ब्लॉगर का परिचय ------ अपने बारे में कुछ कहना कुछ लोगों के लिए बहुत आसान होता है, तो कुछ के लिए बहुत ही मुश्किल और मेरे जैसों के लिए तो नामुमकिन फिर भी अब यहाँ कुछ न कुछ तो लिखना ही पड़ेगा न......... बाकी का परिचय ब्लॉग पर जा कर पढियेगा ... मिलिए शिखा वार्ष्णेय से .....
कौन
विज्ञान और विकल्प
कभी कहीं पढा था दीवारें मौन होती हैं.बचपन से आज तक सुनती आयी हूँ दीवारों के कान होते हैं.मेरा मन दीवारों के बारे मे कुछ और ही सोचता है.
सबसे पहली पोस्ट में दीवारों की बात तो अद्यतन पोस्ट में स्नेह , प्यार , दुलार की बात ... इनकी नयी पोस्ट १७ जून २०२१ को आई है ....
"नेह"
तुम्हारा नेह भी
हवा-पानी सरीखा है
चाहने पर भी
पल्लू के छोर से
बंधता नहीं
बस…,
*********************************************
मन की वीणा ब्लॉग का सञ्चालन करती हैं कुसुम कोठारी जी . इनका कोई चित्र नहीं है ब्लॉग पर | गुज़ारिश है कि कोई फूल पत्ते ही लगा लें तो चर्चा में लगाने के लिए आसानी हो जाएगी ...
खोल दिया जब मन बंधन से
उड़े भाव पाखी बनके
बिन झाँझर ही झनकी पायल
ठहर-ठहर घुँघरू झनके।
************************************************
एक और ब्लॉग २०१८ में प्रारंभ हुआ और पता नहीं उस ब्लॉग ने ताने बाने से किस किस को उलझाया ......... बहरहाल आप मिलिए उषा किरण जी से जिनका ब्लॉग है ताना बाना ..... अपने बारे में लिखती हैं .....
तूलिका और लेखनी के सहारे अहसासों को पिरोती रचनाओं की राह की एक राहगीर.
बिट्टा बुआ ( कहानी -भाग 1)
बचपन की न जाने कितनी स्मृतियां और न जाने कितने उन स्मृतियों के पात्र होते हैं, जो हमारे अस्तित्व को साधारण समझते हैं उन्हीं का अस्तित्व कभी-कभी हमारे मानस-पटल पर बहुत स्थान पा लेते हैं .
जो गुजर जाते हैं
वे कहाँ गुजरते हैं
गुजरते तो हम हैं
खुशबुओं से लिपटी
उनकी यादों की गली से
जाने कितनी बार…बार-बार…!!
*************************************************
एक अन्य ब्लॉगर जिनकी छंदबद्ध रचनाओं ने मन मोह लिया है वो हैं अनुराधा चौहान | अपने बारे में उनका कहना है ...... शब्दों का ताना-बाना बुनती हूँ। भावों के रंग भरती हूँ।बस इतनी सी पहचान है मेरी वही पहचान लिखती हूँ।
जीवन की भाग-दौड़ मेंबचपन की मासूमियतकहीं खोती जाती
अहिल्या बाई होलकर
धागे का वजूद
धागा हूँ मैं या बिलकुल धागे जैसी,
ताउम्र मोतियों को पिरोया मैंने
*****************************
प्रकृति पर इनकी बहुत खूबसूरत रचनाएँ आयीं हैं ....... और आज जो रचना लिखी है वो इनके मन के भावों को व्यक्त कर रही है ... इस रचना में ..... पिता के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है .....
मैं बुढ़ापे के आनंद में हूँ (संवाद-पिताजी से )
भीड़ बहुत है
वो छांव कहां से लाऊं
जो मुस्कान बिखेरे
वो शब्द कहां से लाऊं।
आज पाठकों को काफी कुछ पढ़ने को और ब्लॉग भ्रमण का अवसर मिला होगा .... अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराइएगा ....... यदि ऐसी अगली कड़ी आई तो मात्र पाँच ब्लॉगर्स से ही परिचय कराऊंगी ...... बहुत मेहनत लगती है भाई ...
अब गेंद आपके पाले में ......
संगीता स्वरुप /

























