शीर्षक पंक्ति: आदरणीया कविता रावत जी की रचना से।
सादर
अभिवादन।
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आज की पसंदीदा रचनाएँ-
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बाग घर आँगन लिपवा लो,
भाभी यह दालान लिखवा लो
पर अपने हिस्से भैया का प्यार नहीं दूँगा
दीवाली में लपट लाँघते खुब बजाए ताशे
यह माँ का कंगन बिकवा लो
भाभी यह अनबन मिटवा लो
पर इस आँगन में बनने दीवार नहीं दूँगा।
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मेरे ग़ज़ल संग्रह का द्वितीय संस्करण
हृदय देश का मध्यप्रदेश: महेश सक्सेना