सादर नमस्कार
एक ऐसा पौधा जिसने कोरोना काल में खूब सुर्खियां बटोरी है। जी हां, हम बात कर रहे हैं गिलोय की, जिसने कोरोना के समय लोगों के लिए दवा का काम किया है। प्राचीन काल से ही गिलोय को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। गिलोय औषधीय गुणों से भरपूर होती है जिसकी तना, पत्तियां और जड़ें तीनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो आपके कई शारीरिक रोगों से बचाने का काम करती है। आइए जानते हैं, गिलोय जूस के फायदे क्या है, गिलोय किन किन बीमारियों में काम आती है, गिलोय किसे नहीं खाना चाहिए, इत्यादि।
आम इंसान को यह सब वर्षों से सत्ता से दूर विपक्षी दलों की छटपटाहट या आक्रोश लग सकता है ! पर सच्चाई किसी और ही दिशा-दशा की ओर इशारा करती है ! आज के देश के माहौल को देखते हुए कोई भी व्यक्ति जो राजनीती से जुड़ा हो और उसे जरा सी भी राजनितिक समझ होगी तो वह कभी भी ऐसे ब्यान दे कर अपने कैरियर को खत्म नहीं करना चाहेगा ! दरअसल ऐसे लोग राजनेता हैं ही नहीं ! उन्हें देश, धर्म, जाति, देशवासियों किसी से भी कुछ लेना-देना नहीं है ! उन्हें मतलब है सिर्फ और सिर्फ अपने हितों से ! और इसके लिए वे कुछ भी करने को आतुर रहते हैं ! वे सिर्फ विदेशी ताकतों के मोहरे हैं जिन्हें येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल करवा दी गई है और वे अपने आकाओं की बिछाई बिसात पर सिर्फ उनके आदेश के अनुसार ही हरकतें करते हैं !
कार्तिक की आई द्वितीया, उजियारी घड़ी आई,
यम पहुँचे यमुना द्वारे, बहना प्रेम लुटाई।
थाली में दीपक रोली, सजी स्नेह की थाली,
नयनों में अनुराग छलके, मन में भक्ति निराली।
गणपति को पहले वंदन, फिर यमुना ध्यान लगाए,
तिलक करे भाई के माथे, मंगल गीत सुनाए।
भाई दूज की जय, जय यमुना मैया की!
आज बस इतना ही
वंदन
वंदन
